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Lokesh Pal
May 29, 2026 05:30
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वर्ष 1961 से प्रतिबंधित होने के बावजूद, दहेज प्रथा भारत में एक “सभ्यतागत विरोधाभास” बनी हुई है, जहाँ एक ओर देवियों की पूजा की जाती है, वहीं दूसरी ओर बेटियों को मूल्य नकद धन, कार और मकान जैसे भौतिक संसाधनों के आधार पर आँका जाता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: भारत में दहेज अब केवल एक सामाजिक बुराई नहीं रह गया है, बल्कि यह हिंसा की एक सतत प्रक्रिया का रूप ले चुका है, जो अंततः स्त्रीहत्या तक पहुँच सकती है। वर्तमान कानूनी ढाँचे के आलोक में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए तथा इसके उन्मूलन हेतु एक व्यापक रणनीति सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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