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Lokesh Pal
June 25, 2026 05:00
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हाल ही में कोचिंग सेंटर्स, होटलों और छोटे वाणिज्यिक भवनों में लगी आग ने एक गहन शहरी सुरक्षा संकट को उजागर किया है। यह समस्या केवल घातक दुर्घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कमजोर प्रवर्तन, असुरक्षित भूमि-उपयोग परिवर्तन, खराब ऑडिट तथा अपर्याप्त आपातकालीन तैयारियों को भी दर्शाती है।
भारत की बार-बार होने वाली अग्नि त्रासदियाँ – योजना, प्रवर्तन और जागरूकता में रोकी जा सकने वाली विफलताओं को दर्शाती हैं। केवल मुआवजे, सीलिंग ड्राइव और आपदा के बाद की प्रतिक्रियाओं से आगे बढ़कर एक सतत सुरक्षा संस्कृति, नियमित ऑडिट तथा बुनियादी ढाँचे के प्रति संवेदनशील शहरी शासन समय की माँग है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न. “अनियोजित शहरीकरण और नीतिगत विरोधाभासों ने भारत में मिश्रित-उपयोग वाले वाणिज्यिक भवनों को संभावित ‘फायर ट्रैप’ में बदल दिया है।” इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए तथा तात्कालिक प्रतिक्रियाओं के स्थान पर दीर्घकालिक संरचनात्मक तथा प्रशासनिक समाधान सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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