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भारत में उच्च गुणवत्ता युक्त शिक्षा की आवश्यकता और संबंधित प्रयास

Lokesh Pal January 12, 2026 05:00 67 0

संदर्भ:

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 भारत में उच्चतर शिक्षा क्षेत्र में सुधार कर रही है, क्योंकि शिक्षा की गुणवत्ता भारत के आर्थिक विकास, सामाजिक गतिशीलता और नेतृत्व हेतु केंद्रीय है।

NEP-प्रेरित गति का महत्त्व:

  • उच्च शिक्षा में प्रणालीगत सुधार: अलगाव में कमी और समन्वय संबंधी सुधारों के लिए विनियमन आवश्यक है।
    • डिग्री आधारित संरचनाएँ लचीली हो रही हैं, जिसमें कई निकास विकल्प और 4 वर्षीय कार्यक्रम शामिल हैं।
    • पाठ्यक्रम, शिक्षाशास्त्र और मूल्यांकन बहुविषयक अधिगम की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं।
  • निरंतर राज्य समर्थन का महत्त्व: चीन के उदाहरण से स्पष्ट है, कि राज्य का निरंतर ध्यान पैमाने और गुणवत्ता दोनों में सुधार करता है।
    • जबकि भारत संस्थागत रूप से भिन्न है, स्पष्ट नीतिगत निर्देश बेहतर संस्थागत निष्पादन को सक्षम बनाते हैं तथा उच्चतर शिक्षा में जनता के विश्वास को मजबूत करते हैं।
  • जनसांख्यिकीय महत्त्व: सर्वाधिक युवा जनसंख्या वाले राष्ट्र के रूप में, भारत का भविष्य उच्चतर शिक्षा के परिणामों पर निर्भर करता है।
    • अधिगम, कार्य और नेतृत्व संबंधी तैयारी दीर्घकालिक सामाजिक तथा आर्थिक विकास को आकार देगी।

विगत वर्षों में हुए महत्त्वपूर्ण परिवर्तन:

  • अनुसंधान पारितंत्र को संस्थागत बनाना: अनुसंधान राष्ट्रीय रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) दीर्घकालिक वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देता है।
    • ₹1 लाख करोड़ की अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना, बाजार के लिए तैयार नवाचार तथा निजी भागीदारी पर केंद्रित है।
    • साथ में, ये बुनियादी अनुसंधान और अनुप्रयुक्त नवाचार का एक दुहरा ट्रैक निर्मित करते हैं।
  • उच्चतर शिक्षा संस्थानों (HEIs) द्वारा संस्थागत नवाचार: IIM ने स्नातक कार्यक्रम शुरू किए हैं, जबकि विश्वविद्यालय कल्याण, जीवन कौशल और शिक्षुता (apprenticeships) जोड़ रहे हैं, जो व्यापक शैक्षणिक और करियर पथों की ओर परिवर्तन को दर्शाता है।
    • NEP के बाद, विश्वविद्यालयों ने अपने प्रथम 4 वर्षों के स्नातक समूहों को स्नातक करने की दिशा में बढ़ना शुरू कर दिया है, हालाँकि 3 वर्ष के स्नातक का मार्ग अभी भी एक विकल्प है।
    • अनुसंधान के साथ ‘बैचलर विद ऑनर्स’ अधिक शैक्षणिक गहराई और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रदान करता है।
    • QS रैंकिंग, 2026 में भारत के 54 विश्वविद्यालय शामिल थे, जो 2015 में 11 और 2025 में 46 से अधिक थे, जो इसे चौथा सर्वाधिक प्रतिनिधित्व और सबसे तेजी से उभरता हुआ G20 देश बनाता है, तथा बेहतर अनुसंधान परिणाम, संकाय शक्ति और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को दर्शाता है।
  • बदलते वैश्विक गतिशीलता प्रतिरूप
    • 5 लाख से अधिक भारतीय विदेश में पढ़ते हैं (MEA), लेकिन कठोर वीज़ा नियम और भू-राजनीतिक तनाव पहुँच को सीमित कर रहे हैं।
    • उच्च गुणवत्ता युक्त घरेलू विकल्प अधिक महत्त्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
    • उच्च शिक्षा दोनों तरह से वैश्वीकृत हो रही है, विदेशी विश्वविद्यालय भारत में प्रवेश कर रहे हैं और भारतीय संस्थान विदेश में विस्तार कर रहे हैं।

अगले चरण को आकार देने वाले विकास कार्य:

  • विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: यह विधेयक ओवरलैपिंग जनादेश और विनियामक विखंडन को संबोधित करता है।
    • यह विनियमन, मानकों और प्रत्यायन (accreditation) के लिए अलग-अलग परिषदों के साथ एक एकल शीर्ष निकाय का प्रस्ताव करता है।
    • दो-तिहाई विद्यार्थियों को शिक्षित करने वाले निजी संस्थानों के साथ, गुणवत्ता आश्वासन के लिए मजबूत प्रत्यायन तथा सार्वजनिक प्रकटीकरण आवश्यक हैं।
  • शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण: शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सतत शहरों के लिए AI में चार उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) स्थापित करने की घोषणा की है, जो संरचित नवाचार मंच प्रदान करते हैं।
  • विज्ञान संबंधी शिक्षा को सुदृढ़ करना: कौशल और डीप-टेक तैयारी को बेहतर करने के लिए मेकर्सपेस, प्रोजेक्ट-आधारित अधिगम और उद्योग-स्टार्टअप लिंकेज को बढ़ावा देकर, व्यावहारिक अनुभव की कमी को दूर करने की आवश्यकता है।
  • गुणवत्ता बनाए रखते हुए पहुँच का विस्तार: भारत का लक्ष्य 2035 तक 50% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करना है, जिसके लिए राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे के रूप में उच्चतर शिक्षा को निरंतर प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
    • डिजिटल प्लेटफॉर्म भौतिक क्षमता सीमाओं को पार करते हुए, पहुँच का विस्तार कर सकते हैं।
    • हालाँकि, शैक्षणिक मानक और अधिगम आवश्यकता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र में होनी चाहिए।

निष्कर्ष

विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, राज्य और संस्थानों के मध्य विश्वास, बेहतर कार्यान्वयन और उत्कृष्टता के प्रति व्यापक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है, जिससे बड़े पैमाने पर विस्तार उच्च गुणवत्ता युक्त मानव पूँजी भी प्रदान कर सके।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. परीक्षण कीजिए, कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और प्रस्तावित विनियामक सुधार उच्चतर शिक्षा क्षेत्र में पहुँच, गुणवत्ता और समानता संबंधी मुद्दों को किस प्रकार संबोधित करते हैं। एक ऐसे पारिस्थितिक तंत्र में जहाँ निजी संस्थान अधिकांश नामांकनों के लिए उत्तरदायी हैं, आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए कि क्या विनियामक समेकन प्रभावी शासन तथा शिक्षार्थी हितों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

(15 अंक, 250 शब्द)

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