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1946 का रॉयल नेवी विद्रोह: तीव्र ध्रुवीकरण के बीच एकजुटता

Lokesh Pal February 19, 2026 05:15 3 0

संदर्भ:

18 फरवरी 2026 को रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह की 80वीं वर्षगांठ थी। यह एक अल्पकालिक किंतु महत्वपूर्ण सशस्त्र विद्रोह था, जो बंबई (अब मुंबई) से शुरू होकर भारत के विभिन्न नौसैनिक ठिकानों तक फैल गया।

पृष्ठभूमि

  • तनावपूर्ण वातावरण: वर्ष 1946 तक भारत में तीव्र ब्रिटिश-विरोधी भावना व्याप्त थी, जिसे सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फौज (INA) के सैनिकों पर चल रहे मुकदमों ने और बढ़ावा दिया।
  • घटना की शुरुआत: विद्रोह 18 फरवरी 1946 को तब शुरू हुआ जब बंबई के पास HMIS तलवार पर तैनात नौसैनिक ने भूख हड़ताल शुरू की।
  • प्रेरक घटना: बी.सी. दत्त नामक एक नौसैनिक को जहाज की दीवार पर “क्विट इंडिया” लिखने के लिए गिरफ्तार किया गया, इसके पहले कमांडर किंग ने नौसैनिकों का अपमान करते हुए उन्हें भिखारी और कुली कहा था।
  • संगठित नेतृत्व: ‘नेवल सेंट्रल स्ट्राइक कमेटी’ के गठन ने आंदोलन को राजनीतिक दिशा प्रदान की।

विद्रोह के कारण

  • दयनीय परिस्थितियाँ: नौसैनिकों को अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ता था, जिसमें निम्न गुणवत्ता वाला भोजन भी शामिल था।
  • नस्लीय भेदभाव: भारतीय और ब्रिटिश नौसैनिकों के बीच वेतन अंतर और अधिकारियों द्वारा नियमित नस्ली उत्पीड़न।
  • गरिमा की खोज: हालाँकि यह आंदोलन भोजन और वेतन संबंधी समस्याओं से शुरू हुआ, परंतु यह धीरे-धीरे समानता और आत्म-सम्मान की लड़ाई में बदल गया।

विद्रोह का विस्तार और स्वरूप

  • व्यापक विद्रोह: यह केवल “विद्रोह” नहीं, बल्कि एक समन्वित और संगठित आंदोलन था।
  • भौगोलिक विस्तार: यह बंबई से आगे बढ़कर कराची, मद्रास, कोचीन, विशाखापत्तनम, कलकत्ता और अंडमान द्वीपों तक फैल गया।
  • भागीदारी: 2,000 से अधिक नौसैनिक, 78 जहाज और 20 तटीय संस्थान इस विद्रोह में शामिल हुए।
  • रणनीतिक कदम: नौसैनिकों ने जहाजों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और संभावित ब्रिटिश सैन्य कार्रवाई से बचाव हेतु जहाजों की तोपें बंबई की ओर मोड़ दीं।

राजनीतिक मांगें और नेतृत्व

  • नेवल सेंट्रल कमेटी: एम.एस. खान के नेतृत्व में समिति ने बेहतर भोजन और समान वेतन की मांग की।
    • एक प्रमुख मांग INA सैनिकों की रिहाई थी, जिससे यह साबित होता है कि यह विद्रोह केवल सैन्य शिकायतों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें गहरी राजनीतिक उद्देश्य भी शामिल था।

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के बीच एकजुटता

  • राजनीतिक मतभेदों से परे एकता: कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच प्रतिद्वंद्विता के बावजूद, इस विद्रोह में हिंदू–मुस्लिम श्रमिक वर्ग की दुर्लभ एकता देखने को मिली। स्थानीय निवासियों ने मिलकर बैरिकेड का निर्माण किया और ब्रिटिश सेनाओं का विरोध किया।
  • राजनीतिक प्रतीकवाद: नौसैनिकों ने सुभाष चंद्र बोस के चित्र को अपने आंदोलन में उपयोग किया तथा कांग्रेस, मुस्लिम लीग और कम्युनिस्ट पार्टी के झंडे फहराए, जिससे विचारधारात्मक एकजुटता का संकेत मिला।
  • जन समर्थन: बॉम्बे में छात्रों और मजदूरों ने नौसैनिकों का समर्थन करने के लिए 21–22 फरवरी 1946 को हड़ताल की।
    • नागरिकों ने गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास हड़ताल कर रहे मजदूरों को भोजन भेजा।

ब्रिटिश प्रतिक्रिया और दमन

  • कठोर कार्रवाई: ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने सख्त कदम उठाने का आदेश दिया। भारतीय रेजिमेंटों के हिचकिचाने के बाद ब्रिटिश सैनिकों को तैनात किया गया।
  • हताहत: नागरिकों पर मशीनगन से गोलीबारी में 200–300 लोगों की मृत्यु हुई, जो जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद सबसे बड़ा नरसंहार था।
  • आत्मसमर्पण: 23 फरवरी को नौसैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया।
    • यह ब्रिटिश भय के कारण नहीं, बल्कि सरदार पटेल और मुहम्मद अली जिन्ना जैसे राष्ट्रीय नेताओं के आग्रह पर हुआ, जिन्हें भविष्य के स्वतंत्र राष्ट्र में सैन्य अनुशासन टूटने का डर था।

समकालीन प्रासंगिकता

  • वैकल्पिक दृष्टिकोण: यह विद्रोह दर्शाता है कि धार्मिक सीमाओं के पार एकजुट जन आंदोलन संभव है, जो सांप्रदायिक राजनीति के लिए एक विकल्प प्रस्तुत करता है।
  • “विद्रोह” से परे: यह उस संकीर्ण औपनिवेशिक दृष्टिकोण को चुनौती देता है, जिसने इस घटना को केवल अनुशासनात्मक उल्लंघन तक सीमित कर दिया और इसे एक राजनीतिक विद्रोह के रूप में नहीं देखा।
  • धर्मनिरपेक्ष-श्रमिक एकता: यह हमें याद दिलाता है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सांप्रदायिक पहचान से परे मजबूत धर्मनिरपेक्ष और श्रमिक वर्ग की एकजुटता भी मौजूद थी।

निष्कर्ष

वर्ष 1946 का रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह एक प्रेरक और औपनिवेशिक-विरोधी आंदोलन था, जिसने थोड़े समय के लिए सैनिकों और नागरिकों को सांप्रदायिक विभाजनों से ऊपर उठकर एकजुट किया।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: भारत के उपनिवेशवाद उन्मूलन की प्रक्रिया के संदर्भ में 1946 के रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह के कारणों, विस्तार और महत्व पर चर्चा करें।

 (10 अंक, 150 शब्द)

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