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भारत में एआई (AI) तकनीकी का उपयोग तथा इसका विनियमन

Lokesh Pal December 30, 2025 05:15 55 0

संदर्भ:

जैसे-जैसे एआई (AI) का उपयोग बढ़ रहा है, इस बात पर चर्चा हो रही है कि भारत नवाचार को बाधित किए बिना गैर-हस्तक्षेपकारी विनियमन, उपयोगकर्ता संरक्षण और घरेलू एआई क्षमता के विकास के मध्य संतुलन किस प्रकार बना सकता है।

एआई (AI) के प्रति भारत का वर्तमान विनियामक दृष्टिकोण:

  • मौजूदा कानूनों के माध्यम से विनियमन: भारत वर्तमान में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और आईटी नियमों (IT Rules) के तहत प्लेटफॉर्म्स को सम्यक तत्परता (due diligence) की आवश्यकता के द्वारा ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ के उपयोग को विनियमित करता है।
    • एआई (AI) का उपयोग ‘डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023’ (Digital Personal Data Protection Act, 2023) के साथ-साथ आरबीआई (RBI) और सेबी (SEBI) के क्षेत्र-विशिष्ट वित्तीय नियमों द्वारा भी विनियमित होता है।
    • वर्तमान कानून संबंद्ध जोखिमों (जैसे- धोखाधड़ी, गोपनीयता आदि) को विनियमित करते हैं।
  • देखभाल के स्पष्ट कर्तव्य का अभाव: भारत ने एआई-संबंधित मनोवैज्ञानिक चिंता के संबंध में ‘देखभाल के स्पष्ट कर्तव्य’ को परिभाषित नहीं किया है। यह बढ़ती एआई (AI) स्वीकार्यता के बावजूद उपभोक्ता संरक्षण में विनियामक खामियाँ उत्पन्न करता है।

चीन का एआई सुरक्षा ढाँचा:

  • भावनात्मक रूप से इंटरैक्टिव सेवाओं पर ध्यान: चीन ने हाल ही में भावनात्मक रूप से इंटरैक्टिव (emotionally interactive) एआई (AI) सेवाओं को लक्षित करते हुए मसौदा नियम जारी किए हैं।
    • ये नियम प्रस्तावित करते हैं, कि कंपनियों को उपयोगकर्ताओं को अत्यधिक उपयोग के खिलाफ चेतावनी देनी चाहिए तथा अत्यधिक भावनात्मक स्थितियों के संकेत प्राप्त होने पर हस्तक्षेप करना चाहिए।
  • औचित्य और जोखिम: ये नियम मनोवैज्ञानिक निर्भरता को संबोधित करने में उचित प्रतीत होते हैं, जिसे सामान्य सामग्री विनियमन पर्याप्त रूप से शामिल नहीं करता है।
    • हालाँकि, कंपनियों के लिए उपयोगकर्ताओं की भावनात्मक स्थिति की पहचान करना कठिन हो सकता है, क्योंकि यह अधिक हस्तक्षेपकारी निगरानी को प्रोत्साहित कर सकता है।

भारत बनाम चीन का दृष्टिकोण:

  • भारत का दृष्टिकोण: भारत का दृष्टिकोण कम हस्तक्षेपकारी है, क्योंकि यह भावनाओं की निगरानी नहीं करता है। हालाँकि, यह अधूरा बना हुआ है क्योंकि यह मुख्य रूप से मौजूदा कानूनों पर निर्भर है। भारत में वर्तमान में एक विशिष्ट एआई सुरक्षा जाल का अभाव है।
  • चीन का दृष्टिकोण: यह एक हस्तक्षेपकारी दृष्टिकोण का पालन करता है, जो सक्रिय रूप से भावनाओं की निगरानी करता है। यह इस उद्देश्य के लिए एक विशिष्ट सुरक्षा व्यवस्था बनाता है, और राज्य स्पष्ट रूप से उपयोगकर्ताओं के प्रति “देखभाल का कर्तव्य” (duty of care) ग्रहण करता है।

एआई (AI) के क्षेत्रीय विनियामक:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY): इसने प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने की आवश्यकता के लिए आईटी नियमों (IT Rules) का उपयोग किया है। इसने कृत्रिम रूप से उत्पन्न सामग्री की परिभाषा और लेबलिंग को भी अनिवार्य किया है।
    • MeitY का दृष्टिकोण व्यापक रूप से प्रतिक्रियाशील रहा है, जो उभरते एआई (AI) जोखिमों के भविष्य-उन्मुखी शासन को सीमित करता है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI): आरबीआई (RBI) ने ऋण (credit) में मॉडल जोखिम (model risk) को नियंत्रित करने के लिए अपेक्षाएँ निर्धारित की हैं।
    • इसने वित्तीय सेवाओं में उत्तरदायी एआई (AI) उपयोग का मार्गदर्शन करने के लिए FREE-AI फ्रेमवर्क प्रक्रिया भी विकसित की है।
  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI): सेबी (SEBI) ने विनियमित संस्थाओं द्वारा एआई (AI) टूल के उपयोग के लिए स्पष्ट जवाबदेही पर बल दिया है, जिससे पूँजी बाजारों में एआई-संचालित निर्णय लेने के लिए जिम्मेदारी सुनिश्चित की जा सके।

आगे की राह:

  • अपस्ट्रीम क्षमता (Upstream Capability) में सुधार: नवाचार को बाधित करने और विदेशी तकनीकों पर निर्भरता को बढ़ने से रोकने के लिए भारत को अपस्ट्रीम क्षमता को अवरुद्ध करने (choking) से बचना चाहिए। अपस्ट्रीम क्षमता में सुधार के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:
    • कंप्यूट तक पहुँच (Compute Access): बेहतर कंप्यूटिंग संसाधन (GPUs) प्रदान करना।
    • कौशल उन्नयन (Upskilling): एआई (AI) विकास के लिए कार्यबल को प्रशिक्षित करना।
    • सार्वजनिक खरीद (Public Procurement): सरकार को स्थानीय एआई (AI) स्टार्टअप्स से खरीदारी करनी चाहिए।
    • उद्योग के लिए अनुसंधान: प्रयोगशाला अनुसंधान को बाजार उत्पादों में परिवर्तित करना।
  • व्यापक रूप से विनियमन: भारत को निम्नलिखित उपायों के तहत विनियमन सुनिश्चित करना चाहिए:
    • उच्च-जोखिम वाले संदर्भ: जब एआई (AI) का उपयोग स्वास्थ्य और ऋण जैसे उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में किया जाता है, तो अतिरिक्त दायित्व आरोपित किए जाने चाहिए।
    • घटना की रिपोर्टिंग: कंपनियों को मॉडल व्यवहार और प्रणालीगत विफलताओं पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की आवश्यकता होनी चाहिए।
    • देखभाल का कर्तव्य: कंपनियों को भावनात्मक या हस्तक्षेपकारी निगरानी का सहारा लिए बिना उपयोगकर्ता की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

भारत को संप्रभु एआई क्षमताओं के निर्माण के लक्ष्य को नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता के साथ संतुलित करना चाहिए; साथ ही एआई (AI) के उपयोग से उत्पन्न होने वाली मनोवैज्ञानिक हानि को ‘देखभाल के कर्तव्य’ (duty of care) के सिद्धांत के तहत कानून में औपचारिक रूप से मान्यता दी जानी चाहिए।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: भारत अभी कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मुख्य रूप से मौजूदा IT, वित्तीय और डेटा संरक्षण कानूनों के माध्यम से नियंत्रित करता है, इससे भारत के AI वातावरण के लिए उत्पन्न होने वाली चुनौतियाँ पर चर्चा कीजिए। अपस्ट्रीम क्षमता निर्माण और डाउनस्ट्रीम उपयोग-आधारित विनियमन का समन्वय भारत के AI गवर्नेंस ढाँचे को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकता है?

(15 अंक, 250 शब्द)

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