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विकसित भारत के लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए, सिंगापुर का विकास मॉडल

Lokesh Pal January 10, 2026 05:30 83 0

सन्दर्भ:

भारत का लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत बनना है, जिसके लिए वर्तमान में बुनियादी ढाँचे और विनिर्माण पर जोर दिया जा रहा है 1965 से सिंगापुर के प्रयास दर्शाते हैं, कि सतत विकास के लिए बाजार-संचालित विकास के साथ-साथ मजबूत सामाजिक सामंजस्य और समान अवसर की भी आवश्यकता होती है

पृष्ठभूमि: भारत और सिंगापुर (1965 से)

  • स्वतंत्रता के समय का आरंभ (1965): सिंगापुर की स्वतंत्रता के समय, इसकी प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत की तुलना में लगभग चार गुना थी। भारत और सिंगापुर दोनों ही उत्तर-औपनिवेशिक और सामाजिक रूप से विविध राष्ट्र थे।
  • वर्तमान परिणाम (2024-25): आज, सिंगापुर की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत की तुलना में लगभग तीस गुना है। यह विकास पथों में तीव्र अंतर को दर्शाता है

सिंगापुर के विकास मॉडल की प्रमुख विशेषताएँ/ सिंगापुर की सामाजिक संरचना

  • सामाजिक सामंजस्य: सिंगापुर ने सामाजिक सद्भाव को नैतिक आदर्श के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक आवश्यकता के रूप में माना
    • नेताओं ने जातीय असमानता को राष्ट्र निर्माण के लिए एक गंभीर खतरा माना, न कि केवल एक सामाजिक मुद्दा।
  • एकीकरण के साधन के रूप में आवास: सार्वजनिक आवास नीतियों ने क्षेत्र विशेष के भीतर जातीय मिश्रण को बढ़ावा दिया।
    • इससे नस्लीय बस्तियों के गठन को रोका जा सका, और गरीबी के कारण होने वाले स्थानिक अलगाव को कम किया जा सका।
    • सार्वजनिक आवास ने केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि साझा नागरिक स्थान भी निर्मित किए।
    • नागरिकों ने स्वयं को एक साझा राष्ट्रीय परियोजना का हिस्सा माना।
  • सामाजिक गतिशीलता पर विशेष ध्यान: सार्वभौमिक शिक्षा और कौशल विकास ने उत्पादक रोजगार तक पहुँच सुनिश्चित की। सार्वजनिक स्वास्थ्य में निवेश से सभी समुदायों में कार्यबल की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
  • अवसरों की समानता, परिणामों की गारंटी नहीं: राज्य का उद्देश्य शुरुआती स्तर को समान करना थान कि अध्यादेश द्वारा आय को समान करना
    • नकद हस्तांतरण पर सीमित निर्भरता ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल निर्माण को प्राथमिकता दी।
  • संस्थागत विश्वास और भ्रष्टाचार में कमी: गतिशीलता के एक विश्वसनीय सूत्र ने संस्थानों में विश्वास को मजबूत किया और अनुचित लाभ कमाने, भ्रष्टाचार और पहचान-आधारित राजनीतिक लामबंदी के लिए प्रोत्साहनों को कम किया।
    • चीनी, मलय और भारतीय समुदायों में कुल आय में वृद्धि हुई
    • आय में असमानता अभी भी बनी हुई है, लेकिन अब यह जातीयता से कठोरता से जुड़ी नहीं है।
    • आज भारतीय परिवार अक्सर कुछ आय संकेतकों पर समान या बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

भारत के लिए महत्त्वपूर्ण सबक

  • सामाजिक सामंजस्य ही आधारभूत संरचना है: भारत को सामाजिक सामंजस्य को केवल एक सामाजिक भावना के रूप में नहीं, बल्कि एक आर्थिक संपत्ति के रूप में देखना चाहिए जो उत्पादकता, निवेश और संस्थागत विश्वास का आधार है, और इसलिए ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो सक्रिय रूप से इसकी रक्षा और इसे मजबूत करें।
  • सामाजिक एकीकरण के लिए आवास: मिश्रित आय और मिश्रित समुदाय वाले आवास शहरी अलगाव को कम कर सकते हैं और गरीबी के स्थानिक संकेंद्रण को रोक सकते हैं
    • परिवहन-उन्मुख विकास से नौकरियों, स्कूलों और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच में सुधार होता है, जिससे सामाजिक गतिशीलता और श्रम बाजार में भागीदारी बढ़ती है।
  • विश्वसनीय ऊर्ध्वगामी गतिशीलता: भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश तभी विकास उत्पन्न करेगा, जब शिक्षा और कौशल बेहतर रोजगार और जीवन स्तर में परिवर्तित होंगे
    • स्पष्ट गतिशीलता के अभाव में, असमानता और भी बढ़ जाती है, जिससे सामाजिक अशांति, राजनीतिक लोकलुभावनवाद और मानव पूँजी की हानि होती है।
  • सतत जन स्वास्थ्य: जन स्वास्थ्य में सतत निवेश यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है, कि स्वास्थ्य परिणाम आय, क्षेत्र या सामाजिक पहचान से प्रभावित न हों, और बीमारी तथा कुपोषण के कारण उत्पादकता के नुकसान को कम किया जा सके।
    • मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियाँ कार्यबल में भागीदारी बढ़ाती हैं, और गरीबी को पीढ़ियों तक फैलने से रोकती हैं।

सिंगापुर मॉडल को दुहराने की सीमाएँ

  • भिन्न परिस्थितियाँ: सिंगापुर का छोटा आकार, केंद्रीकृत शासन प्रणाली और अद्वितीय भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ भारत से भिन्न हैं।
    • हालाँकि, संस्थागत स्वरूप नहीं बल्कि नीतिगत प्राथमिकताएँ और क्रम, हस्तांतरणीय सबक प्रदान करते हैं

निष्कर्ष

विकसित भारत को केवल एक नारा बनकर रह जाने के लिए, भारत को आर्थिक विस्तार के साथ-साथ मजबूत सामाजिक संरचना तथा समावेशी संस्थानों का निर्माण करना होगा, जो विकास को व्यापक और सतत राष्ट्रीय प्रगति में परिवर्तित कर सकें।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: “सिंगापुर ने एकीकृत आवास, सार्वभौमिक शिक्षा और सुदृढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे सामाजिक स्तंभों को अपनी विकास रणनीति के केंद्र में रखकर न केवल बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया, बल्कि सतत दीर्घकालिक प्रगति की नींव भी रखी।” भारत के ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के परिप्रेक्ष्य में, सिंगापुर के इस मॉडल से प्राप्त सीखों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, इन अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को भारत की जटिल सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप ढालने में, आने वाली प्रमुख चुनौतियों तथा बाधाओं की विवेचना कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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