प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत की आंतरिक सुरक्षा के समक्ष चुनौतियाँ
- भारत की क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं के लिए चुनौतियाँ
- इस संकट से निपटने के उपाय।
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उत्तर
वर्ष 2021 के तख्तापलट के पाँच वर्ष बाद, हाल ही में आयोजित म्याँमार की सैन्य-नियोजित चुनावों ने गृहयुद्ध और दमन के बीच सामान्य स्थिति दिखाने का प्रयास किया। भारत के लिए, जो भूगोल और एक्ट ईस्ट विजन से बँधा है, यह संकट सीमाओं और संपर्क को सुरक्षित रखने के साथ-साथ रणनीतिक नुकसान उठाए बिना लोकतांत्रिक प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने की मूल दुविधा को और गहरा करता है।
भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए उत्पन्न चुनौतियाँ
- शरणार्थी आगमन और सीमा दबाव: अस्थिरता के कारण 90,100 से अधिक विस्थापित म्याँमार के नागरिक मिजोरम और मणिपुर में प्रवेश कर चुके हैं।
- उदाहरण: मिजोरम में राज्य प्रशासन पर दबाव, जो एक सुसंगत राष्ट्रीय शरणार्थी ढाँचे की अनुपस्थिति को उजागर करता है।
- सीमापार उग्रवाद और उग्रवादी सुरक्षित ठिकाने: म्याँमार की खंडित सत्ता और सीमावर्ती क्षेत्रों में सशस्त्र समूहों की मौजूदगी भारत–म्याँमार सीमा पर समन्वित सुरक्षा प्रबंधन को बाधित करती है।
- उदाहरण: जब केंद्रीय सैन्य शासन परिधीय क्षेत्रों को नियंत्रित नहीं करता, तो भारत–म्याँमार सीमा प्रबंधन सहयोग जटिल हो जाता है।
- मादक पदार्थों और मानव तस्करी नेटवर्क: कमजोर प्रवर्तन के कारण गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र से मादक पदार्थों का प्रवाह तीव्र हुआ है।
- उदाहरण: मणिपुर और असम में मादक पदार्थों की आवक को लेकर आधिकारिक सुरक्षा आकलनों में बढ़ती चिंताएँ दर्ज की गई हैं।
- साइबर धोखाधड़ी और मानव शोषण नेटवर्क: संघर्ष क्षेत्र साइबर धोखाधड़ी केंद्रों के हब बन गए हैं।
- उदाहरण: वर्ष 2022 से अब तक म्याँमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित डिजिटल धोखाधड़ी और मानव तस्करी नेटवर्क से 2000 से अधिक भारतीयों को बचाया गया है।
भारत की क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं के समक्ष चुनौतियाँ
- कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KMMTTP) में देरी: सागाइंग और रखाइन क्षेत्रों में असुरक्षा के कारण परियोजना के क्रियान्वयन की गति धीमी हुई है।
- उदाहरण: सिटवे बंदरगाह तक भारत के पहुँच मार्ग को प्रभावित करने वाले बार-बार व्यवधान।
- भारत–म्याँमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग का बाधित होना: संघर्ष-प्रभावित क्षेत्र निर्माण और रखरखाव में बाधा डालते हैं।
- उदाहरण: सुरक्षा जोखिमों से लॉजिस्टिक लागत बढ़ती है और ठेकेदारों की अनिच्छा बढ़ती है।
- एक्ट ईस्ट नीति के उद्देश्यों के लिए जोखिम: आसियान के लिए भारत के प्रवेश द्वार म्याँमार में अस्थिरता क्षेत्रीय व्यापार गलियारों की व्यवहार्यता को कमजोर करती है।
- उदाहरण: सीमापार औद्योगिक गलियारों में निवेशकों के विश्वास में कमी।
- आपूर्ति शृंखला और अवसंरचना की संवेदनशीलता: 1 लाख से अधिक संरचनाओं का ध्वंस क्षेत्र की अवसंरचनात्मक भंगुरता और आपूर्ति शृंखलाओं की उच्च जोखिम-संवेदनशीलता को उजागर करता है।
- उदाहरण: भारतीय सहायता के अंतर्गत निर्मित अवसंरचना, क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण, तोड़फोड़ तथा संघर्ष-जनित क्षति के प्रति लगातार असुरक्षित बनी हुई है।
- शासन की कूटनीतिक अलगाव: आसियान और पश्चिमी देशों द्वारा चुनाव परिणामों को मान्यता न देने के कारण खुले राजनीतिक समर्थन से अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचने का जोखिम उत्पन्न होता है।
- उदाहरण: अतः भारत के लिए एक संतुलित और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जिसमें संपर्क और सुरक्षा हितों की रक्षा करते हुए वह किसी विवादित शासन को वैध ठहराने की धारणा से भी स्वयं को अलग रखे।
इस संकट से निपटने के तरीके
- संतुलित (कैलिब्रेटेड) सहभागिता बनाए रखना: दोषपूर्ण चुनावों को वैध ठहराए बिना शासन के साथ सीमित संवाद जारी रखना।
- उदाहरण: भारत का आधिकारिक रुख—“स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनावों” का समर्थन करते हुए कूटनीतिक चैनलों को बनाए रखना।
- सीमा प्रबंधन और आंतरिक तैयारी को सुदृढ़ करना: निगरानी, समन्वित पुलिसिंग और मानवीय समन्वय को मजबूत करना।
- उदाहरण: पूर्वोत्तर सीमा पर एकीकृत चेक पोस्ट और बेहतर खुफिया सूचना-साझाकरण।
- एक सुसंगत शरणार्थी और मानवीय नीति विकसित करना: सुरक्षा चिंताओं के साथ मानवीय प्रतिबद्धताओं का संतुलन।
- म्याँमार में बहु-हितधारकों से संवाद: नेपीडॉ के साथ ही नहीं, बल्कि स्थानीय पक्षकारों और जातीय समूहों से भी संपर्क बनाए रखना।
- उदाहरण: परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की समानांतर पहुँच की प्रथा।
- स्थिरता के लिए क्षेत्रीय मंचों का उपयोग: युद्धविराम और राजनीतिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए आसियान, बिम्सटेक और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के साथ कार्य करना।
- उदाहरण: SCO से इतर म्याँमार नेतृत्व के साथ प्रधानमंत्री की वार्ता, जिसमें लोकतांत्रिक संदेश के साथ सहयोग को जोड़ा गया।
निष्कर्ष
वर्ष 2026 के चुनाव म्याँमार में स्थिरता बहाल करने में विफल रहे और उन्होंने एक खंडित राजनीतिक व्यवस्था को ही रेखांकित किया है। एक कठोर नैतिक रुख रणनीतिक हानि का जोखिम पैदा करता है, जबकि बिना सोचे-समझे अपनाया गया व्यावहारिक दृष्टिकोण (Pragmatism) प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा सकता है। व्यावहारिक और विवेकपूर्ण मार्ग रणनीतिक सावधानी के साथ सैद्धांतिक जुड़ाव (Principled engagement) में निहित है, जिसमें म्याँमार में एक समावेशी राजनीतिक परिवर्तन की निरंतर वकालत करते हुए अपनी आंतरिक सुरक्षा और संपर्क की रक्षा करना सर्वोपरि है।
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