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Q. विश्लेषण कीजिये कि कैसे क्षेत्रीय आंदोलनों एवं स्थानीय प्रयासों, जैसे तिलक द्वारा गणेश उत्सव के परिवर्तन ने भारतीय राष्ट्रवाद के बड़े उद्देश्य में योगदान दिया। भारत के अन्य भागों से भी इसी तरह के उदाहरणों पर प्रकाश डालिए। (15 अंक, 250 शब्द)

September 7, 2024

GS Paper IModern History
प्रश्न की मुख्य माँग

  • विश्लेषण कीजिए कि किस प्रकार क्षेत्रीय आंदोलनों और स्थानीय प्रयासों, जैसे तिलक द्वारा गणेश उत्सव में परिवर्तन, ने भारतीय राष्ट्रवाद के व्यापक उद्देश्य में योगदान दिया।
  • भारत के अन्य भागों से भी इसी प्रकार के उदाहरणों पर प्रकाश डालिए।
  • उनकी समकालीन प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।

 

उत्तर:

बाल गंगाधर तिलक द्वारा गणेश चतुर्थी को एक निजी धार्मिक समारोह से सार्वजनिक आयोजन में परिवर्तित करना, भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ था। सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से राष्ट्रवादी भावनाओं को स्थानीयकृत करके, तिलक ने जनता को संगठित किया और राजनीतिक विमर्श के लिए एक मंच तैयार किया। इस दृष्टिकोण ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकता और प्रतिरोध को बढ़ावा देकर भारतीय राष्ट्रवाद के  उद्देश्य में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

क्षेत्रीय आंदोलन और भारतीय राष्ट्रवाद में योगदान

  • एक सार्वजनिक आंदोलन के रूप में गणेश उत्सव: गणेश उत्सव में तिलक द्वारा किये गये  परिवर्तन ने सार्वजनिक समारोहों के लिए एक मंच तैयार किया, जिससे राष्ट्रवादी विचारों पर चर्चा होने लगी और हिंदू समुदाय के बीच एकता को बढ़ावा मिला। 
    • उदाहरण के लिए: त्योहार के दौरान, लोग देशभक्ति के गीत गाते थे और स्वराज पर चर्चा करते थे, जिससे राष्ट्रवादी भावनाओं का प्रसार होता था।
  • शिवाजी महोत्सव और राष्ट्रीय गौरव: वर्ष 1896 में तिलक ने शिवाजी महोत्सव की शुरुआत की। जिसमें उन्होंने शिवाजी जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उपयोग करके भारत के अतीत पर गर्व की भावना जगाने, राष्ट्र की धरोहर के प्रति सामूहिक चेतना को बढ़ावा देने और औपनिवेशिक आख्यानों के विरुद्ध संगठित  प्रतिरोध करने का प्रयास किया। 
    • उदाहरण के लिए: शिवाजी उत्सव ने महाराष्ट्र के युवाओं को राष्ट्रवाद अपनाने और ब्रिटिश शासन का विरोध करने के लिए प्रेरित किया।
  • धर्म और राष्ट्रवाद में प्रतीकवाद: तिलक ने राजनीतिक संदेश देने, धर्म को राजनीति के साथ मिलाकर एकता को बढ़ावा देने और राष्ट्रवादी आदर्शों को बढ़ावा देने के लिए गणेश चतुर्थी के धार्मिक उत्साह का इस्तेमाल किया। 
    • उदाहरण के लिए: तिलक का प्रसिद्ध नारा ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ अक्सर समारोहों के दौरान दोहराया जाता था, जो धार्मिक आयोजनों को भारतीय स्वतंत्रता के उद्देश्य से जोड़ता था।
  • जन भागीदारी और लामबंदी: तिलक ने गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों का उपयोग विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोगों को एकजुट करने के लिए किया, जिससे उन क्षेत्रों में एकजुटता और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा मिला जहाँ प्रत्यक्ष सक्रियता चुनौतीपूर्ण थी। 
    • उदाहरण के लिए: इन त्यौहारों में अक्सर व्यापारी, छात्र और किसान शामिल होते थे, जो व्यापक आधार वाले राष्ट्रवादी आंदोलन में योगदान देते थे
  • ब्रिटिश नीतियों के प्रति प्रतिकार: तिलक के त्योहारों ने हिंदू एकता को बढ़ावा देकर, भारतीय सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देकर और औपनिवेशिक प्रभाव का विरोध करके ब्रिटिश ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति को चुनौती दी। 
    • उदाहरण के लिए: गणेश उत्सव, भारतीय संस्कृति की शक्ति को प्रदर्शित करता था।

भारत के अन्य भागों से समान उदाहरण

  • बंगाल में दुर्गा पूजा: तिलक के प्रयासों के समान ही, बंगाल में राष्ट्रवादी नेताओं द्वारा दुर्गा पूजा को एक सार्वजनिक उत्सव में बदल दिया गया, जो उपनिवेशवाद विरोधी विचारों पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता था। 
    • उदाहरण के लिए: सुभाष चंद्र बोस और अन्य नेताओं ने इस त्योहार का उपयोग स्वदेशी आदर्शों को बढ़ावा देने और ब्रिटिश सामानों के बहिष्कार को प्रोत्साहित करने के लिए किया।
  • गुजरात में सार्वजनिक गणेशोत्सव: सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा गुजरात जैसे अन्य क्षेत्रों में भी फैल गई, जहाँ यह औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लोगों को एकजुट करने और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का माध्यम बन गया। 
    • उदाहरण के लिए: गुजरात में, नेताओं ने इन सार्वजनिक आयोजनों का उपयोग आत्मनिर्भरता और ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के विरोध का संदेश फैलाने के लिए किया।
  • केरल में ओणम: केरल में, ओणम, एक क्षेत्रीय फसल उत्सव है, जिसे राष्ट्रवादी कारणों से भी जोड़ा गया था और नेताओं ने इस अवसर का उपयोग लोगों को इकट्ठा करने और ब्रिटिश शोषण के खिलाफ राजनीतिक विचारों पर चर्चा करने के लिए किया था। 
    • उदाहरण के लिए: महात्मा गांधी ने स्थानीय समुदायों के साथ स्वराज और आत्मनिर्भरता के महत्त्व पर चर्चा करने के लिए ओणम के दौरान केरल का दौरा किया था।
  • उत्तर भारत में राम नवमी: हिंदी पट्टी में, राम नवमी जैसे त्योहार राष्ट्रवादी विचारधाराओं का प्रसार करने के लिए एक मंच बन गए हैं, जहाँ राष्ट्रवादी नेता उत्पीड़न के खिलाफ प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में राम की कहानियों का उपयोग करते थे 
    • उदाहरण के लिए: रामायण  का उपयोग भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई के रूपक के रूप में किया गया, जिससे लोगों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ उठने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
  • कर्नाटक में उगादी: कर्नाटक में उगादी का उत्सव सामाजिक सुधारों और राष्ट्रवादी आंदोलन पर चर्चा करने का अवसर बन गया। स्थानीय नेताओं ने इन सभाओं के दौरान स्वदेशी और स्वशासन को बढ़ावा दिया।

क्षेत्रीय आंदोलनों की समकालीन प्रासंगिकता

  • विविधता में सांस्कृतिक एकता: गणेश चतुर्थी जैसे क्षेत्रीय त्योहार, विविध सांस्कृतिक समूहों के बीच एकता को बढ़ावा देते हैं, साथ ही सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए मंच के रूप में भी कार्य करते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: वर्तमान समय में महाराष्ट्र में, गणेश चतुर्थी, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय की थीम के साथ मनाई जाती है ।
  • सामाजिक परिवर्तन के लिए मंच: आज कई क्षेत्रीय त्योहारों में लैंगिक समानता और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे सामाजिक संदेश शामिल होते हैं, जो राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ संरेखित होते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान, अक्सर देवी दुर्गा के चित्रण के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के विषयों को प्रदर्शित किया जाता है ।
  • आधुनिक राष्ट्रवाद: क्षेत्रीय आंदोलन अब डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे आधुनिक राष्ट्रवादी विषयों को उजागर करते हैं, जो बदलाव के उत्प्रेरक के रूप में इन त्योहारों की धरोहर को जारी रखें हुए हैं। 
    • उदाहरण के लिए: आजकल सार्वजनिक उत्सवों में अक्सर स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत जैसी सरकारी पहलों को बढ़ावा देने वाले प्रदर्शन और झांकियाँ शामिल होती हैं ।
  • राजनीतिक लामबंदी: तिलक की तरह समकालीन राजनीतिक दल, गणेश चतुर्थी के साथ जनता तक पहुँचने के लिए अन्य क्षेत्रीय त्योहारों का उपयोग करते हैं, जो राजनीतिक भाषणों और लामबंदी के लिए मंच के रूप में कार्य करते हैं । 
    • उदाहरण के लिए: कई राज्यों में, राजनीतिक नेता क्षेत्रीय त्योहारों के दौरान लोगों को संबोधित करते हैं और अपने राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देते हैं
  • पारंपरिक शिल्प का पुनरुद्धार: त्योहार,पारंपरिक शिल्प और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करते हैं और उन्हें राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के बड़े विचार से जोड़ते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: ओणम के दौरान, स्थानीय हस्तशिल्प और बुनाई उद्योगों को बढ़ावा देना आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के साथ संरेखित होता है ।

क्षेत्रीय आंदोलन और गणेश चतुर्थी जैसे स्थानीय प्रयास भारत के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। जैसे-जैसे भारत अधिक समावेशी और प्रगतिशील भविष्य के लिए प्रयास करता है, ये त्योहार न केवल सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देंगे बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक न्याय जैसे समकालीन मुद्दों को संबोधित करने के लिए मंच के रूप में भी कार्य करेंगे, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए उनकी प्रासंगिकता बरकरार रहेगी।

 

Analyse how regional movements and localised efforts, like Tilak’s transformation of the Ganesh festival, contributed to the larger cause of Indian nationalism. Also highlight similar examples from other parts of India.  in hindi

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