प्रश्न की मुख्य माँग
- क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव।
- द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव।
- सुझावात्मक उपाय।
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उत्तर
प्रेह विहार के निकट थाईलैंड–कंबोडिया के बीच पुनः संघर्ष ने लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को फिर से उजागर कर दिया है। युद्ध विराम के टूटने और नागरिकों के बढ़ते विस्थापन ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न कर दी हैं। यह बढ़ता तनाव आसियान की सीमित संकट-प्रबंधन क्षमता को भी सामने लाता है, जिससे तात्कालिक कूटनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता रेखांकित होती है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव
- आसियान की स्थिरता के लिए खतरा: बढ़ती हिंसा दक्षिण-पूर्व एशिया की एक स्थिर आर्थिक क्षेत्र के रूप में छवि को कमजोर करती है।
- आसियान की संकट-क्षमता में कमजोरी: म्यांमार संकट से पहले ही जूझ रहे आसियान के लिए एक और संघर्ष क्षेत्रीय एकजुटता को कमजोर करता है, क्योंकि वह म्यांमार में कहीं बड़े संकट से निपट रहा है।
- व्यापक भू-राजनीतिक हस्तक्षेप का जोखिम: बढ़ते तनाव के चलते बाह्य पक्षों का युद्धविराम में मध्यस्थता हेतु हस्तक्षेप बढ़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीति और जटिल हो जाती है।
- उदाहरण: पूर्व में हुए युद्धविराम के लिए मलेशिया के प्रधानमंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति का हस्तक्षेप आवश्यक हुआ था।
- आर्थिक अनिश्चितता का कारण: निरंतर संघर्ष क्षेत्रीय आर्थिक तनाव पैदा करता है और सीमा-पार व्यापार में विश्वास को कम करती हैं।
द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव
- अविश्वास में वृद्धि: बार-बार होने वाली हिंसा औपनिवेशिक कालीन सीमाओं से जुड़ी ऐतिहासिक शिकायतों को पुनर्जीवित करती है।
- उदाहरण: प्रेह विहार विवाद की जड़ें वर्ष 1904–1907 के फ्रांको–सियामी समझौतों से संबंधित है।
- कूटनीतिक संबंधों में गिरावट: शत्रुता के कारण संबंधों का स्तर घटाया गया है और समझौतों को निलंबित किया गया है।
- उदाहरण: जुलाई में हुए लैंडमाइन विस्फोट के बाद थाईलैंड ने कूटनीतिक संबंधों का स्तर घटा दिया।
- राष्ट्रवादी विमर्श को बढ़ावा: दोनों पक्षों में क्षेत्रीय दावों के इर्द-गिर्द घरेलू जनमत को संगठित करने की प्रवृत्ति तेज हो सकती है।
- व्यापार और सीमा सहयोग में व्यवधान: सीमा बंदी और व्यापार प्रतिबंध स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को कमजोर करते हैं और संपर्क को बाधित करते हैं।
- उदाहरण: कंबोडिया ने थाई वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया और प्रमुख सीमा चौकियाँ बंद कर दीं।
सीमा संघर्षों की रोकथाम और समाधान हेतु उपाय
- कूटनीतिक संवाद का पुनरुद्धार: आसियान के नेतृत्व में या तटस्थ मध्यस्थता के माध्यम से दोनों पक्षों को संरचित वार्ता में वापस लाया जाना चाहिए।
- उदाहरण: मलेशिया के पूर्व प्रयासों से अस्थायी युद्धविराम सुनिश्चित हुआ था।
- विश्वास-निर्माण उपायों को सुदृढ़ करना: संयुक्त गश्त, विसैन्यीकृत क्षेत्र या संचार हॉटलाइन गलत अनुमानों को कम कर सकते हैं।
- जमीनी स्तर पर सीमा-निर्धारण: विवादित क्षेत्रों के आसपास परस्पर स्वीकृत मानचित्रण और सीमा सर्वेक्षण लागू किए जाएँ।
- उदाहरण: प्रेह विहार की सीमा अब भी “जमीनी स्तर पर काफी हद तक अनिर्धारित” बनी हुई है।
- मानवीय सुरक्षा प्रावधान: संकट के दौरान विस्थापन को प्रबंधित करने के लिए सीमा पार नागरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाना।
- आसियान के संघर्ष-निवारण तंत्र: प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को संस्थागत रूप दिया जाए और तनाव-वृद्धि रोकने के लिए आसियान की विश्वसनीयता का उपयोग किया जाए।
निष्कर्ष
थाईलैंड-कंबोडिया संघर्ष ने ऐतिहासिक विवादों के अनसुलझे रहने पर क्षेत्रीय शांति की संवेदनशीलता को प्रदर्शित किया है। स्थायी स्थिरता के लिए निरंतर कूटनीति, स्पष्ट सीमांकन और आसियान के नेतृत्व में विश्वसनीय संघर्ष-निवारण तंत्र की आवश्यकता होगी। भविष्य में तनाव बढ़ने से रोकने के लिए विश्वास-निर्माण प्रयासों के साथ संवाद की ओर लौटना आवश्यक है।
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