Q. विश्व व्यापार संगठन (WTO) बहुपक्षवाद से एकपक्षवाद की ओर बढ़ते बदलाव के कारण अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है। प्रमुख मुद्दों का विश्लेषण कीजिए और भारत की सुधार रणनीति का सुझाव दीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

March 27, 2026

GS Paper IIInternational Relations

प्रश्न की मुख्य माँग

  • विश्व व्यापार संगठन के लिए संकट को उत्पन्न करने वाले प्रमुख मुद्दों की चर्चा कीजिए।
  • भारत की सुधार रणनीति सुझाइए।

उत्तर

बहुपक्षीयता से एकपक्षीय व्यापार प्रथाओं की ओर बदलाव के कारण विश्व व्यापार संगठन अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है। विश्व व्यापार संगठन के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में हाल ही में हुई चर्चाओं ने भारत जैसे विकासशील देशों के हितों की रक्षा करते हुए सुधारों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है।

WTO  संकट को बढ़ाने वाले प्रमुख मुद्दे

  • एकतरफावाद और व्यापार संरक्षणवाद का उदय: प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ विश्व व्यापार संगठन के नियमों को दरकिनार करते हुए एकतरफा शुल्क और व्यापार बाधाएँ लागू कर रही हैं, जिससे बहुपक्षीय व्यवस्था कमजोर हो रही है। यह प्रवृत्ति नियम-आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली में पूर्वानुमेयता और विश्वास को कम करती है।
  • विवाद निपटान तंत्र का अवरुद्ध होना: अपीलीय निकाय के निष्क्रिय होने के कारण विश्व व्यापार संगठन की विवाद समाधान प्रणाली प्रभावहीन हो गई है।
    • उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा अपीलीय निकाय में नियुक्तियों को अवरुद्ध करने से व्यापार विवादों का अंतिम निपटारा अवरुद्ध हो गया है।
  • बहुपक्षीय समझौतों की ओर झुकाव: कुछ चुनिंदा देशों के बीच हुए समझौते समावेशी बहुपक्षीय प्रक्रिया को हाशिए पर धकेलने का जोखिम उत्पन्न करते हैं।
    • उदाहरण: ई-कॉमर्स पर संयुक्त वक्तव्य पहल (JSI) जैसी पहलें सभी WTO सदस्यों की सहमति के बिना आगे बढ़ती हैं।
  • सर्वसम्मति-आधारित निर्णय प्रक्रिया में गतिरोध: सभी सदस्यों की सहमति की अनिवार्यता के कारण वार्ताएँ लंबे समय तक अटकी रहती हैं।
    • उदाहरण: खाद्य सुरक्षा हेतु सार्वजनिक भंडारण जैसे मुद्दे सहमति के अभाव में लंबे समय से लंबित हैं।
  • विकासात्मक चिंताएँ और असमानता: विकासशील देशों का तर्क है कि वर्तमान नियम विकसित देशों के पक्ष में अधिक झुके हुए हैं, जिससे उनकी नीतिगत स्वतंत्रता सीमित होती है। विशेष एवं भिन्न उपचार (S&DT) और डिजिटल व्यापार से जुड़े विवाद इस असमानता को दर्शाते हैं।

भारत की सुधार रणनीति

  • विवाद निपटान तंत्र की बहाली पर जोर: भारत विश्व व्यापार संगठन के मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों में एक पूर्णतः कार्यशील विवाद निपटान तंत्र की पुनर्स्थापना का लगातार समर्थन करता रहा है, ताकि संगठन की विश्वसनीयता और नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
  • खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक भंडारण की सुरक्षा: भारत खाद्य सुरक्षा हेतु सार्वजनिक भंडारण पर स्थायी समाधान की माँग करता है, यह तर्क देते हुए कि वर्तमान नियम विकासशील देशों की कल्याणकारी नीतियों को अनुचित रूप से सीमित करते हैं।
  • ई-कॉमर्स मोरेटोरियम के विस्तार का विरोध: भारत इलेक्ट्रॉनिक प्रसारणों पर सीमा शुल्क से छूट की समीक्षा की माँग करता है, क्योंकि इससे राजस्व हानि होती है और डिजिटल औद्योगिकीकरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  • विशेष एवं भिन्न उपचार (S&DT) का संरक्षण: भारत इस बात पर बल देता है कि विकासशील देशों के लिए नीतिगत स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु विशेष एवं भिन्न उपचार प्रावधानों को बनाए रखा जाए, विशेषकर तब जब विकसित देश इन लाभों को कम करने का दबाव बना रहे हैं।

निष्कर्ष

WTO संकट का समाधान सुधार और समावेशिता के बीच संतुलन स्थापित करने में निहित है। भारत को बहुपक्षवाद का समर्थन करते हुए अपने विकासात्मक हितों की रक्षा करनी होगी और संस्थागत सुधारों को आगे बढ़ाना होगा, ताकि बढ़ती एकतरफावादी और संरक्षणवादी प्रवृत्तियों के बीच एक निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी वैश्विक व्यापार प्रणाली सुनिश्चित की जा सके।

WTO faces an existential crisis driven by the multilateral to unilateral shift. Analyse key issues and suggest India’s reform strategy. in hindi

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