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Q. "अफ्रीका के साथ भारत का जुड़ाव वैचारिक एकजुटता से रणनीतिक साझेदारी में विकसित हुआ है।" इस संदर्भ में, भारत के लिए नामीबिया के रणनीतिक महत्त्व का विश्लेषण कीजिए। अफ्रीका में भारत का दक्षिण-दक्षिण सहयोग मॉडल चीन के निवेश-संचालित दृष्टिकोण से किस प्रकार भिन्न है? (15 अंक, 250 शब्द)

July 10, 2025

GS Paper IIInternational Relations

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत के लिए नमीबिया के सामरिक महत्व पर चर्चा कीजिये।
  • अफ्रीका में भारत का दृष्टिकोण चीन से किस प्रकार भिन्न है?
  • अफ्रीका में भारत के लिए आगे की राह सुझाइये।

उत्तर

भारतीय प्रधानमंत्री की नमीबिया यात्रा लगभग तीन दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है, जो अफ्रीका पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने को दर्शाती है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से नमीबिया के स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन किया है और वर्ष 1986 में नई दिल्ली में पहले SWAPO दूतावास की मेजबानी की थी। यह यात्रा उसी क्रम को आगे बढ़ाती है, जिसका उद्देश्य खनिज, ऊर्जा, रक्षा और विकास सहयोग में संबंधों को मजबूत करना है।

भारत के लिए नमीबिया का सामरिक महत्त्व 

  • महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुँच और ऊर्जा सुरक्षा: नमीबिया यूरेनियम, लिथियम, जिंक और दुर्लभ पृथ्वी धातुओं से समृद्ध है, जो इसे भारत के ऊर्जा परिवर्तन और हरित प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के लिए एक प्रमुख भागीदार बनाता है।
    • उदाहरण: नमीबिया तीसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक है और भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिजों का एक प्रमुख स्रोत है।
  • आर्थिक और व्यापार साझेदारी वृद्धि: भारत-नमीबिया व्यापार 178% वृद्धि के साथ 2023 में 654 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया; भारतीय निवेश कुल मिलाकर लगभग 800 मिलियन डॉलर है, जो मुख्य रूप से खनिज क्षेत्रों में है।
    •  उदाहरण: भारत के प्रमुख निर्यातों में मशीनरी और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं; आयातों में खनिज तेल और जस्ता शामिल हैं।
  • रक्षा एवं क्षमता निर्माण सहयोग: भारत ने ITEC के माध्यम से नमीबिया के रक्षा कार्मिकों और अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है, तथा नमीबिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास और वार्ता में भाग लेता है।
    • उदाहरण: नमीबिया ने अफ्रीका-भारत फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास (AF-INDEX) और भारत-अफ्रीका रक्षा वार्ता में भाग लिया।
  • स्वास्थ्य एवं मानवीय सहायता: भारत ने स्वास्थ्य संकटों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता प्रदान की है, जिससे सद्भावना और विश्वसनीयता मजबूत हुई है।
    • उदाहरण: वर्ष 2021 में 30,000 कोविशील्ड खुराक भेजी गईं; वर्ष 2017 और वर्ष 2019 में सूखा राहत के रूप में चावल भेजा गया।
  • पर्यावरण और वन्यजीव सहयोग: नमीबिया ने ऐतिहासिक स्थानांतरण परियोजना के माध्यम से चीतों को पुनः भारत लाने में भारत की मदद की, जिससे वन्यजीव संरक्षण में गहन सहयोग प्रदर्शित हुआ।
    • उदाहरण: चीतों को भारत लान के लिए हुये वर्ष 2022 के समझौता ज्ञापन ने एक प्रमुख मांसाहारी प्रजाति के विश्व के पहले अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण को दर्शाया।

अफ्रीका में भारत का दृष्टिकोण चीन से किस प्रकार भिन्न है?

  • जन-केन्द्रित और क्षमता निर्माण पर ध्यान: भारत केवल बुनियादी ढांचे के बजाय प्रशिक्षण, शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य में निवेश करता है, तथा स्थानीय सशक्तिकरण पर बल देता है।
    •  उदाहरण: नमीबिया विश्वविद्यालय ( ओंग्वेडिवा परिसर) में भारत विंग की स्थापना 12 मिलियन डॉलर के अनुदान के माध्यम से की गई थी।
  • कम निर्भरता, उच्च भागीदारी मॉडल: भारत ऋण-आधारित वित्तपोषण से बचता है, तथा स्थानीय स्वामित्व के साथ सह-निर्मित विकास मॉडल पर ध्यान केंद्रित करता है।
    • उदाहरण: नमीबिया की यूरेनियम खदानों में चीन के  नियंत्रण के विपरीत, भारत पारदर्शी संयुक्त उद्यमों में संलग्न है।
  • रणनीतिक नियंत्रण पर नैतिक कूटनीति: भारत, अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को केवल भू-राजनीतिक हितों पर ही नहीं, बल्कि साझा उपनिवेश-विरोधी संघर्षों और भावनात्मक बंधनों पर आधारित करता है।
    • उदाहरण: भारत ने वर्ष 1946 में ही संयुक्त राष्ट्र में SWAPO का समर्थन किया था, जिससे उसकी वैचारिक एकजुटता उजागर हुई।
  • अवसंरचना प्रभुत्व पर दक्षिण-दक्षिण सहयोग: भारत रणनीतिक निर्भरता के बजाय AfCFTA और G20 सहभागिता के माध्यम से न्यायसंगत व्यापार और विकास को बढ़ावा देता है।
    •  उदाहरण: भारत ने अपनी अध्यक्षता में G-20 में अफ्रीकी संघ की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया।
  • पारदर्शिता और बहुपक्षवाद: भारत चीन के BRI या FOCAC जैसी एकतरफा पहल के बजाय खुले मंच और समावेशी संवाद का उपयोग करता है।
    • उदाहरण: SAGAR और ITEC जैसी भारत की पहल बहुपक्षीय विश्वास और दीर्घकालिक सहयोग का निर्माण करती है।

भारत के लिए आगे की राह

  • खनिज और ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करना: संयुक्त उद्यमों और जिम्मेदार खनन के माध्यम से नमीबिया के महत्वपूर्ण खनिजों तक दीर्घकालिक पहुंच सुनिश्चित करना चाहिए।
  • विकास कूटनीति को मजबूत करना: अफ्रीकी आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा, डिजिटल नवाचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य में भारत के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का विस्तार करना चाहिए।
  • राजनयिक और संस्थागत उपस्थिति को बढ़ाना: नमीबिया में अधिक भारतीय सांस्कृतिक केंद्र और तकनीकी केंद्र खोलना ताकि जुड़ाव को बढ़ाया जा सके।
  • हरित प्रौद्योगिकी और जलवायु सहयोग को बढ़ावा देना: संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और पारिस्थितिकी पर्यटन सहित जलवायु कार्रवाई पहलों का सह-विकास करना।
    • उदाहरण: चीता पुन:प्रवेश की सफलता को आगे बढ़ाते हुए अधिक वन्यजीव और पर्यावरण साझेदारियां शुरू करना।
  • चीन के लिए एक रणनीतिक विकल्प के रूप में स्थिति: अफ्रीका में संधारणीय, पारदर्शी और समावेशी विकास मॉडल की पेशकश करने वाले एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की छवि को सुदृढ़ करना।

निष्कर्ष

नमीबिया के साथ भारत की विकसित होती साझेदारी, अफ्रीकी महाद्वीप के साथ उसके व्यापक, जन-केंद्रित जुड़ाव को दर्शाती है। पारस्परिक विकास, स्थानीय क्षमता और साझा इतिहास पर ध्यान केंद्रित करके, भारत साउथ-साउथ सहयोग का एक स्थायी मॉडल प्रस्तुत करता है। इस सहयोग को मज़बूत करना समावेशी वैश्विक विकास और रणनीतिक स्थिरता प्राप्त करने की कुंजी होगा।

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