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Q. मेघालय में अवैध खनन पर्यावरण संरक्षण और आजीविका निर्भरता के बीच जटिल अंतर्संबंध को दर्शाता है। नियामक प्रतिबंधों के बावजूद अवैध खनन के निरंतर प्रचलन के लिए जिम्मेदार कारकों का विश्लेषण कीजिए। प्रभावित समुदायों की आर्थिक सुरक्षा के साथ पारिस्थितिक स्थिरता को संतुलित करने के उपाय सुझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)

February 7, 2026

GS Paper IIGovernance

प्रश्न की मुख्य माँग

  • निरंतर प्रसार और प्रचलन हेतु उत्तरदायी कारक
  • स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा को संतुलित करने के उपाय

उत्तर

भूमिका

मेघालय में रैट-होल माइनिंग ‘संसाधन–आजीविका’ संबंधों की जटिलता को रेखांकित करती है, जिसमें हाशिए पर स्थित समुदायों की जीविकोपार्जन आवश्यकताएँ राज्य की पारिस्थितिक अनिवार्यताओं के साथ निरंतर तनाव में रहती हैं।वर्ष 2014 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के प्रतिबंध के बावजूद, यह कार्य एक अनियमित शैडो इकोनॉमी के रूप में जारी है, जो अद्वितीय सामाजिक-कानूनी स्थितियों तथा हजारों आदिवासी परिवारों के लिए वैकल्पिक आय सुविधाओं की भारी कमी से प्रेरित है।

मुख्य भाग

निरंतर प्रसार और प्रचलन हेतु उत्तरदायी कारक

  • भू-गर्भीय आवश्यकता: मेघालय में कोयले की परतें अत्यंत पतली (2 मीटर से कम) हैं, जिससे बड़े पैमाने पर खुली खदान (ओपन-कास्ट) खनन प्रक्रिया अव्यवहार्य हो जाती है और छोटे मालिकों के लिए “रैट-होल” ही एकमात्र ‘लाभकारी’ तरीका रह जाता है।
  • अद्वितीय भूमि स्वामित्व: छठी अनुसूची के तहत, भूमि सामुदायिक या निजी स्वामित्व में है, जिससे मालिक केंद्रीय खनन नियमों और MMDR अधिनियम को दरकिनार करने के लिए “आदिवासी स्वायत्तता” का दावा करते हैं।
  • आर्थिक बाध्यता: कोयला खनन कृषि या मनरेगा कार्य की तुलना में लगभग 3 गुना अधिक दैनिक मजदूरी प्रदान करता है, जो गरीब प्रवासी और स्थानीय श्रम के लिए एक “पुल फैक्टर” (आकर्षण कारक) बनाता है।
    • उदाहरण: 5 फरवरी, 2026 को पूर्वी जयंतिया घाटी में हुआ विस्फोट, जिसमें 27 खनिक मारे गए, इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे अत्यधिक निर्धनता श्रमिकों को “डेथ ट्रैप” (मृत्यु जाल) सुरंगों में जाने को बाध्य करती है।
  • शासन और संरक्षण: एक निरंतर राजनीतिक-आपराधिक संबंधों के परिणामस्वरूप प्रायः कमजोर स्थानीय प्रवर्तन होता है, तथा अवैध कोयले को वैध आपूर्ति शृंखलाओं में शामिल कर लिया जाता है।
    • उदाहरण: जस्टिस कटाकी समिति (2025) ने एक ही जिले में 22,000 से अधिक अवैध खदानों को चिह्नित किया, जो प्रणालीगत विनियामक विफलताओं का संकेत देते हैं।

स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा को संतुलित करने के उपाय

  • वैज्ञानिक खनन को बढ़ावा देना: विनियमित, मशीनीकृत खनन की ओर परिवर्तन को तीव्र करना, जो कठोर सुरक्षा और पर्यावरणीय नियमों का पालन करती हो।
    • उदाहरण: कोयला मंत्रालय ने हाल ही में पश्चिम खासी पहाड़ियों में वैज्ञानिक खनन पट्टों के पायलट परीक्षण के लिए चार आवेदकों को मंजूरी दी है।
  • आजीविका विविधीकरण: मेघालय की ‘जैव-अर्थव्यवस्था’ में निवेश करना—विशेष रूप से उच्च-मूल्य वाली बागवानी (सिट्रोनेला, कोको) और सतत् पारिस्थितिकी-पर्यटन (इको-टूरिज़्म) में।
    • उदाहरण: विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित एक परियोजना ने सफलतापूर्वक 672 हेक्टेयर खनन-ग्रस्त भूमि को लैमनग्रास और सिट्रोनेला बागानों में पुनर्जीवित किया है।
  • तकनीकी निगरानी: ब्लड कोल (कोयला) की आवाजाही को रोकने के लिए रिमोट सेंसिंग (MSS), ड्रोन निगरानी और कोयला ट्रकों के लिए अनिवार्य GPS-ट्रैकिंग का उपयोग करना।
  • पारिस्थितिकी बहाली कोष: खनिकों के पुनः-कौशल विकास और कोपिली नदी जैसे अम्लीकृत जल निकायों की पारिस्थितिक बहाली के लिए ‘मेघालय पर्यावरण संरक्षण और बहाली कोष’ (MEPRF) को प्रभावी रूप से सक्रिय किया जाना आवश्यक है।

निष्कर्ष

स्पष्ट है, कि “न्यायालयी पर्यवेक्षण शासन का विकल्प नहीं हो सकता।”राज्य को पूर्ण निषेध की रणनीति से हटकर ‘सक्रिय औपचारीकरण’ की ओर बढ़ना चाहिए। अनौपचारिक खनन कार्यबल को एक विनियमित ढाँचे में एकीकृत करना और क्रेडिट-लिंक्ड वैकल्पिक आजीविका प्रदान करना, मेघालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी को लोगों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना संरक्षित करने हेतु आवश्यक है।

Rat-hole mining in Meghalaya reflects a complex interplay between environmental protection and livelihood dependence. Analyse the factors responsible for the continued prevalence of illegal mining despite regulatory prohibitions. Suggest measures to balance ecological sustainability with economic security of affected communities. in hindi

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