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Q. भारत-चीन संबंधों में राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच तनाव का विश्लेषण कीजिये। (15 अंक, 250 शब्द)

September 24, 2024

GS Paper II
प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत-चीन संबंधों में राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा कीजिए।
  • भारत-चीन संबंधों में आर्थिक हितों का परीक्षण कीजिए।
  • भारत-चीन संबंधों में राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच तनाव का विश्लेषण कीजिए।
  • आगे की राह लिखिये।

 

उत्तर:

भारत-चीन संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं और आर्थिक हितों दोनों से प्रभावित होते हैं, जिससे सहयोग और प्रतिस्पर्धा के बीच एक जटिल गतिशीलता बनती है । जबकि भारत-चीन के व्यापार संबंधों में काफी विस्तार हुआ है, अनसुलझे सीमा विवाद, सैन्य निर्माण और रणनीतिक अविश्वास गंभीर चुनौतियां पेश करते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ आर्थिक जुड़ाव को संतुलित करना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है, क्योंकि दोनों देश आर्थिक अंतरनिर्भरता के साथ-साथ भू-राजनीतिक तनाव का भी सामना कर रहे हैं।

भारत-चीन संबंधों में राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएँ

  • सीमा विवाद और सैन्य तनाव: वर्तमान में चल रहे सीमा विवाद, विशेष रूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर, भारत के लिए प्राथमिक राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता का विषय बने हुए हैं। 
    • उदाहरण के लिए: वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प ने दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाया।
  • दक्षिण एशिया में चीन के रणनीतिक गठबंधन: पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में निवेश के जरिए दक्षिण एशिया में चीन का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय है। 
    • उदाहरण के लिए: विवादित क्षेत्रों से होकर तैयार हुआ चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC), भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाता है।
  • चीन का सैन्य आधुनिकीकरण: चीन का तीव्र सैन्य विस्तार और आधुनिकीकरण, विशेष रूप से हिंद महासागर में इसकी नौसैनिक उपस्थिति, भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। 
    • उदाहरण के लिए: हिंद महासागर में चीनी नौसैनिक जहाजों की मौजूदगी ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
  • साइबर सुरक्षा खतरे: बढ़ते साइबर हमलों और निगरानी के लिए इस्तेमाल की जा रही चीनी तकनीक के संबंध में आ रही चिंताओं ने भारत में चिंता बढ़ा दी है। 
    • उदाहरण के लिए: TikTok जैसे चीनी ऐप पर प्रतिबंध और Huawei के विस्तार पर प्रतिबंध, भारत की साइबर सुरक्षा चिंताओं को दर्शाते हैं।
  • इंडो-पैसिफिक में प्रभाव: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता भारत के रणनीतिक हितों को चुनौती देती है, खासकर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) जैसी पहलों के माध्यम से । 
    • उदाहरण के लिए: QUAD में भारत की भागीदारी क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने की उसकी रणनीति को दर्शाती है।

भारत-चीन संबंधों में आर्थिक हित

  • व्यापार निर्भरता: तनाव के बावजूद, चीन भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक बना हुआ है, जिसका व्यापार सालाना 100 बिलियन डॉलर से अधिक है। 
    • उदाहरण के लिए : वर्ष 2023 में, चीन से भारत के आयात में इलेक्ट्रॉनिक घटकों जैसे महत्वपूर्ण सामानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल था।
  • निवेश की संभावना: भारतीय स्टार्टअप और उद्योगों में चीनी निवेश ने भारत की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने में मदद की है, विशेष रूप से प्रौद्योगिकी और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में। 
    • उदाहरण के लिए: अलीबाबा और टेनसेंट जैसी कंपनियों ने Paytm और Zomato जैसी भारतीय तकनीकी फर्मों में निवेश किया है ।
  • आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण: भारत का विनिर्माण क्षेत्र चीनी आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ गहन रूप से एकीकृत है, जिससे चीन कच्चे माल और घटकों का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। 
    • उदाहरण के लिए: दवा उद्योग, चीन से आयातित सक्रिय दवा सामग्री (API) पर बहुत अधिक निर्भर करता है।
  • बुनियादी ढांचे का विकास : चीनी कंपनियों ने भारत में बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विशेष रूप से बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में। 
    • उदाहरण के लिए: चीन की शंघाई इलेक्ट्रिक, भारत के बिजली संयंत्रों के लिए उपकरणों की आपूर्ति में शामिल रही है।
  • उपभोक्ता बाजार: भारत चीनी वस्तुओं, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए एक बड़ा उपभोक्ता बाजार प्रदान करता है, जो द्विपक्षीय व्यापार का एक बड़ा हिस्सा है। 
    • उदाहरण के लिए : Xiaomi और Oppo जैसे चीनी स्मार्टफोन ब्रांड भारत के स्मार्टफोन बाजार पर हावी हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच तनाव

  • व्यापार असंतुलन और सुरक्षा जोखिम : चीन के साथ भारत का बढ़ता व्यापार घाटा आर्थिक निर्भरता के संबंध में चिंताएँ उत्पन्न करता है, जिसका इस्तेमाल रणनीतिक दबाव के लिए किया जा सकता है। 
    • उदाहरण के लिए : वर्ष 2024 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 85 बिलियन डॉलर है , जिससे आर्थिक समस्याओं उत्पन्न हो रही हैं।
  • FDI और सुरक्षा चिंताएँ: जबकि चीनी निवेश आर्थिक विकास को गति दे सकता है, डेटा सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे पर नियंत्रण की चिंताएँ चुनौतियाँ उत्पन्न करती हैं। 
    • उदाहरण के लिए : दूरसंचार और बिजली ग्रिड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में चीनी FDI पर प्रतिबंध लगाए गए थे।
  • तकनीकी निर्भरता बनाम साइबर खतरे: 5G और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में चीनी तकनीक पर भारत की निर्भरता, साइबर सुरक्षा चिंताओं के साथ संघर्ष करती है।
    • उदाहरण के लिए: भारत के 5G नेटवर्क विकास में Huawei पर प्रतिबंध ,संभावित जासूसी की चिंताओं को दर्शाता है।
  • सीमा पर तनाव से प्रभावित व्यापार: सीमा पर सैन्य तनाव के दौर ने आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान उत्पन्न किया है, जिसके कारण दोनों देशों ने प्रतिबंध लगाए हैं। 
    • उदाहरण के लिए: गलवान के बाद, भारत ने चीनी आयात और निवेश पर कड़ी निगरानी रखी ।
  • सामरिक स्वायत्तता बनाम आर्थिक एकीकरण: आत्मनिर्भर भारत के माध्यम से चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करने के भारत के प्रयास वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत रहने की इसकी आवश्यकता के साथ संघर्ष करते हैं, जिनमें से कईयों में चीन शामिल है। 
    • उदाहरण के लिए : इलेक्ट्रॉनिक्स में घरेलू उत्पादन के लिए भारत के प्रयासों को चीनी घटकों के विकल्पों की कमी के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

आगे की राह

  • घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना: भारत को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चीनी आयात पर निर्भरता कम करने के लिए अपनी
    विनिर्माण क्षमता के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ।

    •  उदाहरण के लिए : इलेक्ट्रॉनिक्स में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं जैसी पहलों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
  • व्यापार भागीदारों में विविधता लाना : भारत को आयात और निर्यात के लिए चीन पर निर्भरता कम करने के लिए अन्य देशों के साथ अपने व्यापार संबंधों में विविधता लानी चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: वियतनाम और जापान जैसे देशों के साथ व्यापार संबंधों को मजबूत करना एक महत्वपूर्ण रणनीति है।
  • साइबर सुरक्षा बढ़ाना: भारत को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चीनी प्रौद्योगिकी से होने वाले जोखिमों को कम करने के लिए अपने साइबर सुरक्षा बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना जारी रखना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: स्वदेशी 5G तकनीक के विकास से चीनी फर्मों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
  • बहुपक्षीय मंचों में भागीदारी: चीन के रणनीतिक प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत को क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों में भागीदारी जारी रखनी चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए क्वाड का इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है।
  • कूटनीतिक जुड़ाव और संघर्ष समाधान: भारत और चीन को सीमा मुद्दों को सुलझाने और शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कूटनीतिक प्रयास करने चाहिए । 
    • उदाहरण के लिए : सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधियों का उपयोग, संवाद के लिए लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाना एक संवेदनशील चुनौती है। जबकि आर्थिक सहयोग विकास के लिए महत्वपूर्ण है, परंतु यह भारत की सुरक्षा से समझौता करके नहीं किया जा सकता। आत्मनिर्भरता , व्यापार में विविधता लाने और कूटनीतिक प्रयासों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करके, भारत आर्थिक अंतरनिर्भरता और रणनीतिक चिंताओं के बीच तनाव का प्रबंधन कर सकता है , जिससे दीर्घकालिक स्थिरता और विकास सुनिश्चित हो सके।

 

Analyse the tension between national security and economic interests in India-China relations. in hindi

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