UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

Q. 'प्रतिक्रियात्मक संयम' से 'प्रबल प्रभुत्व' की ओर संक्रमण भारत के रणनीतिक सैन्य सिद्धांत में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ है। हाल ही में सीमा पार आतंकवाद विरोधी अभियानों के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। इस नए सामान्य को बनाए रखने में 'समग्र राष्ट्र' दृष्टिकोण कितना महत्त्वपूर्ण है? (15 अंक, 250 शब्द)

May 9, 2026

GS Paper IIIInternal security

प्रश्न की मुख्य माँग

  • प्रतिक्रियात्मक संयम से प्रबल प्रभुत्व की ओर परिवर्तन की चर्चा कीजिए।
  • बताइए कि यह एक ऐतिहासिक मोड़ क्यों है।
  • समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण का महत्त्व समझाइए।

उत्तर

सीमा-पार आतंकवाद के प्रति भारत की प्रतिक्रिया समय के साथ सावधानीपूर्ण संयम से आगे बढ़कर सक्रिय प्रतिरोधक क्षमता की दिशा में विकसित हुई है। ऑपरेशन सिंदूर इस रणनीतिक परिवर्तन का प्रतीक बना, जिसने प्रबल प्रभुत्व तथा निरंतर रणनीतिक संकल्प के माध्यम से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा को पुनर्परिभाषित किया।

प्रतिक्रियात्मक संयम से प्रबल प्रभुत्व की ओर परिवर्तन

  • दस्तावेज से कार्रवाई तक: पूर्व में भारत आतंकवादी हमलों के बाद प्रत्यक्ष सैन्य जवाबी कार्रवाई के बजाय मुख्यतः कूटनीतिक विरोध और दस्तावेज प्रस्तुत करने की नीति अपनाता था।
    • उदाहरण: 26/11 मुंबई हमलों के बाद भारत ने मुख्यतः अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव का सहारा लिया।
  • शून्य सहिष्णुता की नीति: अब सीमा-पार आतंकवाद को युद्ध-समान कृत्य माना जाता है, जिसके लिए प्रत्यक्ष दंडात्मक प्रतिक्रिया आवश्यक समझी जाती है।
    • उदाहरण: ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “शून्य सहिष्णुता” की नीति को पुनः दृढ़ता से रेखांकित किया।
  • सटीक सैन्य प्रहार: भारत अब लंबे युद्ध में उलझने के बजाय आतंकवादी ढाँचे पर संतुलित एवं उच्च-तीव्रता वाले सटीक हमले करता है।
    • उदाहरण: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 7 मई, 2025 को कुछ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
  • आक्रामक नियंत्रण: भारत का उद्देश्य संघर्ष के स्तर पर प्रभुत्व बनाए रखना है, साथ ही इसे अनियंत्रित पूर्ण युद्ध में परिवर्तित होने से रोकना भी है।
    • उदाहरण: सीमित और लक्षित सैन्य कार्रवाई, परमाणु-संपन्न प्रतिद्वंद्वी के विरुद्ध भी जोखिम को नियंत्रित करने में सहायक होती है।
  • विश्वसनीय निवारण: जवाबी सैन्य कार्रवाई, राज्य-प्रायोजित आतंकवाद पर आघात करती है और भारत की प्रतिरोधक क्षमता की विश्वसनीयता को सुदृढ़ बनाती है।
    • उदाहरण: बालाकोट एयर स्ट्राइक में भी इसी प्रकार की दंडात्मक जवाबी कार्रवाई की नीति का संकेत दिया गया था।

यह एक ऐतिहासिक मोड़ क्यों है

  • रणनीतिक सिद्धांत में परिवर्तन: यह रणनीतिक धैर्य की नीति से आगे बढ़कर सक्रिय रक्षा तथा अग्रिम प्रतिरोध की दिशा में परिवर्तन को दर्शाता है।
  • राजनीतिक संकल्प: राष्ट्रीय नेतृत्व अब आतंकवादी हमलों को प्रत्यक्ष सैन्य परिणामों से जोड़कर देखता है, जिससे भारत की रणनीतिक संकेत प्रणाली में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आया है।
    • उदाहरण: सीमा-पार आतंकवाद को ‘युद्ध-समान कृत्य’ घोषित करने से भारत की नीतिगत स्थिति में परिवर्तन आया।
  • परमाणु प्रतिरोधक मिथक का विखंडन: भारत ने इस धारणा को चुनौती दी कि परमाणु प्रतिरोधक क्षमता पारंपरिक सैन्य प्रतिकार को पूरी तरह प्रतिबंधित कर सकती है।
  • वैश्विक संदेश: इसने प्रतिद्वंद्वी देशों तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह स्पष्ट संकेत दिया कि भारत अपनी प्रतिक्रिया की सीमाएँ स्वयं निर्धारित करेगा।
  • रणनीतिक आत्मविश्वास: यह भारत की सैन्य क्षमता, खुफिया तंत्र तथा समन्वित निर्णय-प्रक्रिया में बढ़ते आत्मविश्वास को प्रतिबिंबित करता है।

समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण का महत्त्व

  • राजनीतिक एकता: सतत् रणनीतिक सिद्धांत के लिए द्विदलीय राजनीतिक समर्थन तथा राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं पर राष्ट्रीय सहमति आवश्यक है।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय एकता, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद-विरोधी प्रतिक्रियाओं की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करती है।
  • आर्थिक शक्ति: सैन्य तैयारी, सुदृढ़ आर्थिक क्षमता तथा रक्षा-औद्योगिक आत्मनिर्भरता पर निर्भर करती है।
    • उदाहरण: आत्मनिर्भर भारत पहल स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित करती है।
  • कूटनीतिक समर्थन: वैश्विक कूटनीतिक सहभागिता अंतरराष्ट्रीय अलगाव को रोकती है तथा आतंकवाद-रोधी कार्रवाइयों को वैधता प्रदान करती है।
    • उदाहरण: भारत निरंतर संयुक्त राष्ट्र मंचों पर आतंकवाद से संबंधित चिंताओं को उठाता रहा है।
  • सामाजिक लचीलापन: जन-जागरूकता तथा भ्रामक सूचनाओं के प्रति प्रतिरोध, संकट के समय आंतरिक कमजोरियों को कम करता है।

निष्कर्ष

भारत का रणनीतिक सिद्धांत अब निष्क्रिय संयम के स्थान पर सक्रिय प्रतिरोधक क्षमता पर आधारित हो गया है। इस नई रणनीतिक व्यवस्था को स्थायी बनाए रखने के लिए केवल सैन्य शक्ति ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण भी आवश्यक है, जिसमें राजनीतिक संकल्प, आर्थिक लचीलापन, कूटनीतिक क्षमता तथा सामाजिक तैयारी का समन्वित योगदान शामिल हो।

The transition from ‘Reactive Restraint’ to ‘Escalation Dominance’ marks a watershed moment in India’s strategic military doctrine. Analyse this statement in the context of recent cross-border anti-terror operations. How vital is the ‘Whole-of-Nation’ approach in sustaining this new normal? in hindi

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.