प्रश्न की मुख्य माँग
- आर्थिक व्यवहार्यता का परीक्षण कीजिए।
- इसके पर्यावरणीय दुष्प्रभावों एवं लागतों का विश्लेषण कीजिए।
- संतुलित एवं सतत् दृष्टिकोण हेतु आगे की राह सुझाइए।
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उत्तर
परिचय
ग्रेट निकोबार विकास परियोजना रणनीतिक विकास और पारिस्थितिकी संरक्षण के मध्य संतुलन की चुनौती को रेखांकित करती है। यह इस प्रश्न को सामने लाती है कि क्या इसके संभावित आर्थिक एवं सामरिक लाभ, इससे जुड़ी वित्तीय अनिश्चितताओं तथा अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय प्रभावों को न्यायोचित ठहरा सकते हैं।
आर्थिक व्यवहार्यता
- संदिग्ध प्रतिफल: प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह की वाणिज्यिक व्यवहार्यता अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
- बढ़ती लागत: परियोजना की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे राजकोषीय दबाव बढ़ रहा है।
- उदाहरण: एकीकृत परियोजना की लागत बढ़कर लगभग ₹91,000 करोड़ तक पहुँचने की सूचना है।
- वित्तपोषण संबंधी बाधाएँ: वित्तीय सहायता प्रदान करने में सीमित रुचि परियोजना की व्यवहार्यता को लेकर चिंताओं को दर्शाती है।
- उदाहरण: लोक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) ने ₹12,230 करोड़ की व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण (VGF) की माँग को अस्वीकार करते हुए मंत्रालय को आंतरिक संसाधन जुटाने का निर्देश दिया।
- रणनीतिक अस्पष्टता: परियोजना के औचित्य में बार-बार परिवर्तन निवेश संबंधी निर्णयों पर विश्वास को कमजोर करता है।
- सार्वजनिक वित्त पर बोझ: यदि परियोजना से अपेक्षित वाणिज्यिक प्रतिफल प्राप्त नहीं होते हैं, तो इसका वित्तीय भार अंततः करदाताओं को वहन करना पड़ेगा।
पर्यावरणीय लागतें
- प्राथमिक वनों की हानि: बड़े पैमाने पर वन भूमि के विचलन से अपूरणीय पारिस्थितिक तंत्रों को खतरा उत्पन्न होता है।
- उदाहरण: इस परियोजना के अंतर्गत ग्रेट निकोबार के विशाल प्राथमिक उष्णकटिबंधीय वर्षावनों (Primary Tropical Rainforests) की कटाई प्रस्तावित है।
- लेदरबैक टर्टल को खतरा: इनके महत्त्वपूर्ण प्रजनन एवं अंडे देने वाले आवास स्थायी रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
- उदाहरण: गलाथिया खाड़ी (Galathea Bay) स्थित लेदरबैक टर्टल के घोंसला-निर्माण से संबंधित तट गंभीर पारिस्थितिकी जोखिमों का सामना कर रहे हैं।
- स्थानिक प्रजातियों पर प्रभाव: आवासों का विखंडन द्वीप की विशिष्ट जैव विविधता को खतरे में डालता है।
- उदाहरण: निकोबार मेगापोड (Nicobar Megapode) जैसी स्थानिक प्रजाति अपने महत्त्वपूर्ण आवासों से वंचित हो सकती है।
- अपरिवर्तनीय क्षति: पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन पुराने विकसित वनों के मूल पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्रचना नहीं कर सकता।
- जनजातीय संबंधी चिंताएँ: विकास परियोजनाएँ स्वदेशी समुदायों के अधिकारों एवं आजीविका को प्रभावित कर सकती हैं।
- उदाहरण: जनजातीय परिषदों ने पर्याप्त जानकारी साझा न किए जाने पर आपत्ति जताई तथा पैतृक भूमि दावों और सुनामी के बाद पुनर्वास संबंधी आश्वासनों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया।
आगे की राह
- पारदर्शिता सुनिश्चित करना: परियोजना मूल्यांकन एवं निर्णय-निर्माण से संबंधित सभी निष्कर्षों और अभिलेखों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
- उदाहरण: उच्चाधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट को पूर्ण रूप से प्रकाशित किया जाए।
- स्वतंत्र समीक्षा: लागत एवं लाभों का पुनर्मूल्यांकन करने हेतु बहु-विषयक स्वतंत्र अध्ययन कराया जाए।
- पूर्व एवं स्वतंत्र सहमति: स्वदेशी समुदायों के साथ सार्थक एवं संस्थागत परामर्श प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
- परियोजना के पैमाने का पुनर्मूल्यांकन: द्वीप की वहन क्षमता के अनुरूप चरणबद्ध एवं पारिस्थितिकी-संवेदनशील विकास मॉडल अपनाया जाए तथा परियोजना के विभिन्न घटकों की पुनर्रचना की जाए।
- प्राकृतिक पूँजी लेखांकन: परियोजना मूल्यांकन में पर्यावरणीय लागतों को समाहित करते हुए जैव विविधता की हानि का आकलन पारंपरिक वित्तीय मानकों के साथ किया जाए।
निष्कर्ष
ग्रेट निकोबार का भविष्य विकास और संरक्षण के बीच किसी एक विकल्प के चयन पर आधारित नहीं हो सकता। रणनीतिक अवसंरचना परियोजनाओं को पारदर्शी आर्थिक आकलन, वैज्ञानिक प्रमाणों तथा लोकतांत्रिक सहमति के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय हितों की पूर्ति करते हुए पारिस्थितिकी एवं सामाजिक पूँजी से कोई अपरिवर्तनीय समझौता न हो।