प्रश्न की मुख्य माँग
- बताइए कि तकनीकी बदलाव किस प्रकार भारत की आपदा सहनशीलता को मजबूत करता है और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है।
- एसएमएस से सेल ब्रॉडकास्टिंग आधारित चेतावनी प्रणाली में परिवर्तन की चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
- भारत में सेल ब्रॉडकास्ट आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ करने के उपाय सुझाइए।
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उत्तर
आपदा प्रबंधन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि चेतावनी सही समय पर सही लोगों तक पहुँचे। भारत की सचेत (SACHET) प्रणाली, जिसे सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक से सुदृढ़ किया गया है, राहत-आधारित प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर सक्रिय, प्रौद्योगिकी-आधारित आपदा सहनशीलता और तैयारी की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाती है।
सेल ब्रॉडकास्टिंग तथा आपदा सहनशीलता/वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ
- तत्काल पहुँच: सेल ब्रॉडकास्ट किसी क्षेत्र विशेष के सभी मोबाइल उपकरणों तक एक साथ संदेश भेजता है, जिससे एसएमएस की तुलना में लगभग वास्तविक समय में चेतावनी पहुँचती है।
- उदाहरण: मई 2026 के राष्ट्रीय परीक्षण के दौरान पूरे भारत में नागरिकों को तुरंत सायरन अलर्ट भेजे गए।
- इंटरनेट की आवश्यकता नहीं: यह तकनीक मोबाइल टॉवरों के माध्यम से काम करती है और इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर नहीं होती, जिससे चक्रवात, बाढ़ या भूकंप जैसी परिस्थितियों में भी चेतावनी संभव रहती है।
- उदाहरण: SACHET प्रणाली केवल नेटवर्क कनेक्टिविटी पर निर्भर करती है, मोबाइल डेटा पर नहीं।
- समावेशी चेतावनी: बहुभाषी संदेश समावेशिता बढ़ाते हैं और “लोग-केंद्रित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली” के सिद्धांत (Sendai Framework) के अनुरूप हैं।
- उदाहरण: सचेत अब तक 19 भारतीय भाषाओं में 134 अरब से अधिक एसएमएस अलर्ट भेज चुका है।
- वैश्विक मानक: कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) का उपयोग भारत को जापान और अमेरिका जैसे देशों की आपात संचार प्रणालियों के अनुरूप बनाता है।
- उदाहरण: CAP-आधारित प्रणालियाँ संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR) द्वारा वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं।
परिवर्तन की चुनौतियाँ
- उपकरण सीमाएँ: पुराने मोबाइल फोन और कुछ हैंडसेट सेटिंग्स सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट को प्रभावी रूप से सपोर्ट नहीं करते, जिससे सार्वभौमिक कवरेज प्रभावित होता है।
- उदाहरण: नागरिकों को टेस्ट अलर्ट प्राप्त करने के लिए फोन में “वायरलेस इमरजेंसी अलर्ट” को मैन्युअल रूप से सक्षम करना पड़ता है।
- कम जागरूकता: कई लोग सचेत सेटिंग्स, ऐप के उपयोग या अलर्ट के अर्थ से परिचित नहीं हैं, जिससे आपात स्थिति में समय पर प्रतिक्रिया कमजोर हो जाती है।
- उदाहरण: सरकार को सेटिंग्स → सेफ्टी और इमरजेंसी के माध्यम से अलर्ट सक्षम करने के निर्देश जारी करने पड़े।
- नेटवर्क की कमी: दूरदराज जनजातीय, पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में कमजोर टेलीकॉम कवरेज के कारण चेतावनी पहुँचने में देरी हो सकती है।
- उदाहरण: हिमालयी आपदा-प्रवण क्षेत्रों में भूस्खलन के दौरान मोबाइल कनेक्टिविटी अक्सर कमजोर रहती है।
- अनावश्यक घबराहट: बार-बार टेस्ट अलर्ट या अस्पष्ट चेतावनियाँ लोगों में घबराहट पैदा कर सकती हैं या अलर्ट के प्रति उदासीनता बढ़ा सकती हैं।
- समन्वय की कमी: प्रभावी चेतावनी के लिए दूरसंचार विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य और स्थानीय प्रशासन के बीच सुचारु समन्वय आवश्यक है।
- उदाहरण: जिला स्तर पर सत्यापन में देरी होने से फ्लैश फ्लड जैसी स्थितियों में चेतावनी की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
आगे की राह
- सार्वभौमिक पहुँच: सभी प्रकार के मोबाइल उपकरणों में सेल ब्रॉडकास्ट की संगतता सुनिश्चित की जाए और संवेदनशील दूरस्थ क्षेत्रों में दूरसंचार अवसंरचना को मजबूत किया जाए।
- उदाहरण: तटीय ओडिशा और पूर्वोत्तर के आपदा-प्रवण जिलों में प्राथमिकता के आधार पर विस्तार।
- जन जागरूकता: नियमित जागरूकता अभियान और मॉक ड्रिल आयोजित किए जाएँ ताकि नागरिक अलर्ट को समझें और बिना घबराहट के उचित प्रतिक्रिया दे सकें।
- स्थानीय एकीकरण: सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट को जिला आपदा योजनाओं, पुलिस प्रणाली और स्थानीय निकासी प्रोटोकॉल के साथ जोड़ा जाए, ताकि जमीनी स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके।
- बहुभाषीय विस्तार: क्षेत्रीय भाषाओं के समर्थन को और मजबूत किया जाए तथा बुजुर्गों, दिव्यांग और डिजिटल रूप से वंचित लोगों के लिए वॉइस-आधारित अलर्ट विकसित किए जाएँ।
- उदाहरण: वॉइस अलर्ट दृष्टिबाधित नागरिकों के लिए आपात स्थिति में विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं।
- वैश्विक अनुभव से सीख: जापान के भूकंप चेतावनी मॉडल और अमेरिका के FEMA अलर्ट सिस्टम से सीख लेकर प्रणाली की विश्वसनीयता और जन-विश्वास को बढ़ाया जाए।
- उदाहरण: जापान में भूकंप चेतावनियाँ कुछ ही सेकंड में नागरिकों तक पहुँच जाती हैं, क्योंकि वहाँ राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत प्रसारण प्रणाली है।
निष्कर्ष
प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ आपदा के बाद राहत कार्यों की तुलना में कहीं अधिक जीवन बचाती हैं। विश्वसनीय सेल ब्रॉकास्टिंग के साथ सचेत (SACHET) को सुदृढ़ बनाकर भारत एक लोग-केंद्रित आपदा प्रबंधन मॉडल विकसित कर सकता है, जो सेंडाई फ्रेमवर्क की प्राथमिकताओं और सुदृढ़ विकास की दृष्टि दोनों के अनुरूप है।