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Q. इस प्रस्ताव का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए कि भारत को उद्यम दर्शन को सामाजिक सेवा के साथ संयोजित करने के लिए एक 'भारतीय उद्यम चार्टर' की आवश्यकता है। भारत की सभ्यतागत विरासत, जैसे कि 'वसुधैव कुटुम्बकम' का उपनिषदिक दर्शन, वर्तमान आर्थिक मॉडल में गहरी जड़ें जमाए बैठी असमानताओं और शासन संबंधी चुनौतियों का समाधान करने में किस प्रकार सहायक हो सकता है? (15 अंक, 250 शब्द)

November 17, 2025

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारतीय उद्यम चार्टर की आवश्यकता के बारे में बताइए।
  • संबंधित चुनौतियाँ लिखिए।
  • सभ्यतागत विरासत का लाभ उठाना।

उत्तर

भारत की बढ़ती आर्थिक आकांक्षाएँ एक ऐसे ढाँचे की माँग करती हैं जो उद्यम विकास को व्यापक सामाजिक कल्याण से जोड़े। इस संदर्भ में ‘इंडियन एंटरप्राइज चार्टर’ का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि वाणिज्यिक महत्त्वाकाँक्षा को नैतिक आचरण, सामुदायिक प्रभाव और समावेशी विकास के साथ संरेखित किया जा सके, विशेषकर तब, जब वर्तमान आर्थिक मॉडल में असमानता और शासन-संबंधी अंतर बढ़ रहे हैं।

इंडियन एंटरप्राइज चार्टर की आवश्यकता

  • समावेशी विकास: चार्टर व्यापार विस्तार को सामुदायिक कल्याण से जोड़ सकता है, जिससे धन-संकेंद्रण कम होगा और समान अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।
  • नैतिक शासन: यह पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और अल्पकालिक लाभ अधिकतमकरण के बजाय दीर्घकालिक हितधारक मूल्य को प्रोत्साहित करता है।
  • सामाजिक उत्तरदायित्व: चार्टर कंपनियों को समाज-सेवा को केवल CSR तक सीमित न रखते हुए मुख्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं में शामिल करने के लिए प्रेरित करता है।
    • उदाहरण: CSR व्यय अत्यधिक रूप से कुछ चुनिंदा महानगर-प्रधान राज्यों में केंद्रित है, जिससे क्षेत्रीय असमानताएँ बढ़ती हैं।
  • सतत् एवं न्यायपूर्ण प्रथाएँ: चार्टर उद्यमों को सस्टेनेबल मॉडल, पर्यावरण-संवेदी कार्यशैली और न्यायपूर्ण श्रम नीतियाँ अपनाने की दिशा में प्रेरित कर सकता है।
    • उदाहरण: भारतीय स्टार्टअप और कंपनियों में ESG (पर्यावरण, सामाजिक, शासन) फोकस बढ़ रहा है।
  • संतुलित पूँजीवाद: यह भारत को ऐसा विकास मॉडल बनाने में मदद करता है जिसमें आर्थिक गतिशीलता के साथ सामाजिक न्याय और कल्याण भी केंद्रीय भूमिका निभाएँ।

संभावित चुनौतियाँ

  • विनियामक विखंडन: कई क्षेत्रों और राज्यों में अलग-अलग नियमों के कारण उद्यम शासन में निरंतरता की कमी दिखाई देती है।
  • कमजोर प्रवर्तन व्यवस्था: क्षमता सीमाओं और निगरानी की कमी के कारण कई नीतियाँ केवल कागजों पर रह जाती हैं।
  • कॉर्पोरेट प्रतिरोध: कंपनियाँ अतिरिक्त सामाजिक दायित्वों को लागत में वृद्धि समझकर विरोध कर सकती हैं।
  • अनौपचारिक क्षेत्र की बाधाएँ: भारत के अधिकांश उद्यम अनौपचारिक हैं, जिससे चार्टर का अनुपालन असमान और जटिल हो जाता है।
    • उदाहरण: 80% से अधिक श्रमिक अभी भी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं।
  • राजनीतिक–व्यावसायिक गठजोड़: राजनीतिक और व्यावसायिक हितों की नजदीकी जवाबदेही को कमजोर कर सकती है।
    • उदाहरण: सार्वजनिक खरीद में विशेष पहुँच संबंधी आरोप इसे उजागर करते हैं।
  • समाधान: सरल विनियमन, मजबूत निगरानी, प्रोत्साहन-आधारित नैतिक मॉडल, समुदाय-आधारित मानकों को एंटरप्राइज रेटिंग में शामिल करना, और जन-जागरूकता से चार्टर को प्रभावी व सार्थक बनाया जा सकता है।

भारतीय सभ्यतागत विरासत का उपयोग

  • नैतिक दर्शन: वसुधैव कुटुंबकम’ को व्यावसायिक उद्देश्य में सार्वजनिक हित के नैतिक आधार के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
    • उदाहरण: G20 में सरकार द्वारा इसी मूल्य को नीतिगत संचार में प्रयोग किया गया।
  • समुदाय आधारित मॉडल: स्थानीय समुदायों के पारंपरिक नेटवर्क को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) में अपनाकर अंतिम छोर तक सेवा-प्रदायन सुधारा जा सकता है।
  • संसाधन-पालकता: उपनिषदों का दीर्घकालिक संरक्षण-पहलू कंपनियों को स्थिरता और जिम्मेदार संसाधन उपयोग से जोड़ता है।
  • सामाजिक पूँजी: परिवार और समुदाय-आधारित विश्वास के नेटवर्क सांस्कृतिक रूप से अनुकूल पहलों को व्यापक स्वीकार्यता दिला सकते हैं।
    • उदाहरण: टाटा ट्रस्ट स्थानीय सामाजिक पूँजी को विकास पहलों के लिए प्रभावी ढंग से गतिशील करता है।
  • सॉफ्ट-पावर का विस्तार: मूल्य-आधारित उद्यम प्रथाएँ भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करती हैं और नैतिक, समान-उद्देश्यीय साझेदारियों को आकर्षित करती हैं।
    • उदाहरण: G20 के दौरान भारत की सभ्यतागत मूल्य-आधारित कूटनीति ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नैरेटिव को सुदृढ़ किया।

निष्कर्ष

एक इंडियन एंटरप्राइज चार्टर भारत की आर्थिक वृद्धि को सामाजिक कल्याण, नैतिक शासन, स्थिरता और समावेशी विकास के साथ जोड़ने का मजबूत साधन बन सकता है। सभ्यतागत मूल्यों से प्रेरित, यह मॉडल असमानताओं को कम करने और भारत की दीर्घकालिक आर्थिक एवं शासन संरचना को अधिक न्यायपूर्ण, सुदृढ़ और स्थायी बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Critically analyze the proposition that India needs an ‘Indian Enterprise Charter’ to blend enterprise philosophy with societal service. How can leveraging India’s civilizational heritage, such as the Upanishadic philosophy of ‘Vasudhaiva Kutumbakam’, help address the deep-rooted inequalities and governance challenges within its current economic model? in hindi

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