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Q. एक लागत प्रभावी और सामाजिक रूप से लाभकारी रणनीति होने के बावजूद, पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (Ecosystem-based Adaptation-EbA) भारत की तटीय प्रबंधन नीतियों में हाशिए पर बना हुआ है। इसके पीछे के कारणों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और आगे की राह सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

June 5, 2026

GS Paper IIIEnvironment & Ecology

प्रश्न की मुख्य माँग

  • पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (Ecosystem-based Adaptation – EbA) के हाशियाकरण के कारणों का विश्लेषण कीजिए।
  • पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) की सीमाओं की विवेचना कीजिए।
  • भारत की तटीय प्रबंधन नीतियों में EbA को प्रभावी रूप से एकीकृत करने हेतु आगे की राह सुझाइए।

उत्तर

परिचय

भारत की 11,000 किमी लंबी तटरेखा लगभग 25 करोड़ लोगों को आजीविका एवं संसाधन प्रदान करती है तथा समुद्र-जलस्तर वृद्धि, चक्रवातों और लवणीय जल के प्रवेश जैसे बढ़ते जलवायु जोखिमों का सामना कर रही है। मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियों के लाभों के बावजूद, पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (Ecosystem-based Adaptation – EbA) अभी भी तटीय नीति में हाशिए पर बना हुआ है।

पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) के हाशियाकरण के कारण

  • अवसंरचना पक्षपात: तटीय अनुकूलन पर होने वाला व्यय अभी भी पारिस्थितिकी-आधारित उपायों की तुलना में दृश्यमान इंजीनियरिंग समाधानों को अधिक प्राथमिकता देता है।
    • उदाहरण: ओडिशा में चक्रवात दाना के दौरान मैंग्रोवों की सुरक्षात्मक भूमिका के बावजूद समुद्री दीवारें (Seawalls) और तटबंध प्रमुख विकल्प बने हुए हैं।
  • कम मान्यता: अनेक पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन गतिविधियों को औपचारिक रूप से पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) के रूप में मान्यता नहीं दी जाती, जिससे उनकी नीतिगत दृश्यता और वित्तीय सहायता सीमित हो जाती है।
    • उदाहरण: मैंग्रोव और प्रवाल भित्ति संरक्षण संबंधी हस्तक्षेपों को प्रायः EbA के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाता है।
  • संस्थागत विखंडन: तटीय शासन की जिम्मेदारियाँ पर्यावरण, मत्स्यपालन, आपदा प्रबंधन तथा तटीय विकास एजेंसियों के बीच विभाजित हैं।
    • उदाहरण: तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) के कार्यान्वयन में अनेक एजेंसियाँ शामिल होती हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन में समन्वय संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
  • अल्पकालिक दृष्टिकोण: नीति-निर्माता प्रायः ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हैं, जिनसे त्वरित परिणाम प्राप्त हों, जबकि पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है।
    • उदाहरण: मैंग्रोव पुनर्स्थापन को पूर्ण सुरक्षात्मक लाभ देने में कई वर्ष लग सकते हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) की सीमाएँ

  • स्थान संबंधी बाधाएँ: अत्यधिक शहरीकृत एवं घनी आबादी वाले तटीय क्षेत्रों में पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होती है।
    • उदाहरण: मुंबई की अत्यधिक विकसित तटरेखा बड़े पैमाने पर मैंग्रोव विस्तार की संभावनाओं को सीमित करती है।
  • पारिस्थितिक अनिश्चितता: पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) की प्रभावशीलता पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य, प्रजातीय संरचना तथा स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
    • उदाहरण: मन्नार की खाड़ी की क्षतिग्रस्त प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs) स्वस्थ प्रवाल भित्तियों की तुलना में कम तटीय सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं।
  • निगरानी संबंधी चुनौतियाँ: पारिस्थितिकी तंत्र से प्राप्त अनुकूलन लाभों का आकलन करना भौतिक अवसंरचना परियोजनाओं के मूल्यांकन की तुलना में अधिक जटिल होता है।
  • चरम आपदाएँ: केवल पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) पर निर्भर रहना अत्यधिक तीव्र जलवायु आपदाओं से पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता है।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देश आपदा-प्रवण क्षेत्रों में पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन को आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना (Resilient Infrastructure) के साथ संयोजित करने की आवश्यकता को स्वीकार करते हैं।

आगे की राह

  • नीतिगत एकीकरण: तटीय अनुकूलन, आपदा प्रबंधन तथा जलवायु कार्ययोजनाओं में पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए, ताकि यह ग्रीन क्लाइमेट फंड के अनुरूप हो।
  • समर्पित वित्तपोषण: पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन एवं प्रकृति-आधारित अनुकूलन के लिए लक्षित जलवायु-वित्त तंत्र विकसित किए जाएँ।
  • सामुदायिक सहभागिता: स्थानीय समुदायों को पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण एवं पुनर्स्थापन प्रयासों में सशक्त बनाया जाए।
    • उदाहरण: एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन (ICZM) परियोजनाओं ने समुदाय-आधारित तटीय संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा दिया है।
  • वैज्ञानिक मानचित्रण: GIS एवं पारिस्थितिकी आकलनों का उपयोग कर मैंग्रोव, प्रवाल भित्ति पुनर्स्थापन के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जाए।
    • उदाहरण: ISRO का तटीय संवेदनशीलता मानचित्रण (Coastal Vulnerability Mapping) साक्ष्य-आधारित अनुकूलन नियोजन का समर्थन करता है।
  • हाइब्रिड दृष्टिकोण: व्यापक तटीय लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों को इंजीनियर्ड अवसंरचना के साथ जोड़ा जाए।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का तटीय आपदा प्रबंधन ढाँचा पारिस्थितिकी बफर को सुरक्षात्मक अवसंरचना के साथ एकीकृत करने को प्रोत्साहित करता है।

निष्कर्ष

भारत की तटीय लचीलापन रणनीति को केवल अवसंरचना-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (Ecosystem-based Adaptation – EbA) को मुख्यधारा में लाना चाहिए। EbA को नीति, वित्त, सामुदायिक शासन एवं जलवायु नियोजन में एकीकृत करके बढ़ते तटीय जोखिमों के विरुद्ध लागत-प्रभावी, सतत् एवं सामाजिक रूप से समावेशी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

Despite being a cost-effective and socially beneficial strategy, Ecosystem-based Adaptation (EbA) remains peripheral to India’s coastal management policies. Critically analyze the reasons behind this and suggest a way forward. in hindi

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