प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत के NDCs में नीति–व्यवहार अंतर (अनुकूलन बनाम शमन पूर्वाग्रह) का उल्लेख कीजिए।
- अनुकूलन में संरचनात्मक और संस्थागत बाधाओं को रेखांकित कीजिए।
- स्थानीय नेतृत्व वाले अनुकूलन (LLA) का विस्तार: आगे की राह सुझाइए।
|
उत्तर
भारत के अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) विकास योजना में जलवायु अनुकूलन के एकीकरण पर बल देते हैं। हालाँकि, वित्त और संस्थागत ढाँचे में शमन की ओर झुकाव जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणामों को सीमित करता है, जिससे स्थानीय रूप से संचालित और पर्याप्त रूप से वित्तपोषित अनुकूलन ढाँचे की ओर परिवर्तन आवश्यक हो जाता है।
मुख्य भाग
भारत के NDCs में नीति-व्यवहार अंतर (अनुकूलन बनाम शमन पूर्वाग्रह)
- शमन पूर्वाग्रह: जलवायु वित्त और नीतिगत प्राथमिकताएँ अब भी अनुकूलन की तुलना में शमन की ओर अधिक झुकी हुई हैं।
- उदाहरण: भारत के NDCs (2031–35) अनुकूलन पर बल देते हैं, फिर भी वैश्विक प्रतिबद्धताएँ “वर्ष 2035 तक अनुकूलन वित्त को तीन गुना करने” की बात करती हैं, जो वर्तमान में अपर्याप्त वित्तपोषण को दर्शाती हैं।
- परिणाम केंद्रित: नीतियाँ लचीलापन के परिणामों के बजाय लक्ष्यों (नवीकरणीय ऊर्जा, उत्सर्जन) पर अधिक केंद्रित हैं।
- उदाहरण: ऊष्मा शमन और तटीय लचीलापन जैसे क्षेत्रों में मापनीय परिणाम संकेतकों का अभाव है।
- कमजोर मापदंड: अनुकूलन के लाभों को मापने के लिए स्पष्ट ढाँचे की कमी जवाबदेही को सीमित करती है।
- उदाहरण: जहाँ कार्बन इन्वेंटरी के माध्यम से उत्सर्जन में कमी को ट्रैक किया जाता है, वहीं जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय अनुकूलन कोष (NAFCC) में विभिन्न परियोजनाओं के लिए एकसमान संकेतकों का अभाव है।
- केंद्रीकृत योजना: टॉप-डाउन नीति निर्माण स्थानीय स्तर पर संदर्भानुकूल अनुकूलन को सीमित करता है।
- उदाहरण: NDC रणनीतियों में जिला-स्तरीय अनुकूलन ढाँचे का अभाव है।
- कार्यान्वयन अंतर: मुख्यधारा में लाने का प्रयास क्षेत्रीय क्रियान्वयन में पूरी तरह परिलक्षित नहीं होता है।
- उदाहरण: NDCs में आपदा तैयारी शामिल होने के बावजूद, बार-बार होने वाली चरम घटनाएँ (वर्ष 1995–2024 के बीच 430 घटनाएँ) स्थानीय लचीलेपन में कमी को दर्शाती हैं।
अनुकूलन में संरचनात्मक और संस्थागत बाधाएँ
- वित्तीय कमी: अनुकूलन पहलों के लिए अपर्याप्त और अनिश्चित वित्तपोषण उपलब्ध है।
- संस्थागत विखंडन: कई एजेंसियाँ बिना प्रभावी समन्वय के कार्य करती हैं।
- उदाहरण: जैव विविधता, अवसंरचना और आजीविका जैसे अनुकूलन क्षेत्रों को अलग-अलग मंत्रालय सँभालते हैं, जिनमें सीमित अभिसरण होता है।
- क्षमता अंतराल: स्थानीय निकायों में जलवायु अनुकूलन योजना के लिए तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव है।
- उदाहरण: पंचायतों के पास अक्सर जलवायु डेटा और योजना उपकरणों की कमी होती है।
- डेटा सीमाएँ: स्थानीय स्तर पर जलवायु जोखिम डेटा की कमी लक्षित हस्तक्षेपों में बाधा डालती है।
- उदाहरण: भारत की राष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशीलता (विश्व में 9वाँ स्थान) पहचानी गई है, लेकिन सूक्ष्म-स्तरीय जोखिम मानचित्रण कमजोर है।
- निगरानी संबंधी समस्याएँ: कमजोर मूल्यांकन तंत्र नीति की प्रभावशीलता को कम करता है।
स्थानीय नेतृत्व वाले अनुकूलन (LLA) का विस्तार: आगे की राह
- विकेंद्रीकृत योजना: स्थानीय संस्थाओं को सशक्त बनाकर संदर्भ-विशिष्ट अनुकूलन रणनीतियाँ विकसित की जाएँ।
- उदाहरण: पंचायती राज मंत्रालय के तहत ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs) में अनुकूलन को शामिल करना।
- समर्पित वित्तपोषण: अनुकूलन के लिए पूर्वानुमेय और लक्षित वित्तीय प्रवाह सुनिश्चित किया जाए।
- उदाहरण: जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय अनुकूलन कोष (NAFCC) का विस्तार और बजट आवंटन बढ़ाना।
- सामुदायिक भागीदारी: योजना और क्रियान्वयन में जमीनी स्तर की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए।
- उदाहरण: दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह द्वारा सूखा-रोधी खेती जैसी जलवायु-लचीली आजीविकाओं को अपनाना।
- डेटा प्रणाली: स्थानीय स्तर पर जलवायु डेटा और पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ विकसित की जाएँ।
- उदाहरण: मौसम विभाग की जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, जो हीट एक्शन और आपदा तैयारी में सहायक है।
- परिणाम संकेतक: जवाबदेही के लिए मापनीय अनुकूलन संकेतकों को संस्थागत रूप दिया जाए।
- उदाहरण: लचीलेपन के परिणामों पर नजर रखने के लिए बेलेम अनुकूलन संकेतक ढाँचे को अपनाना।
निष्कर्ष
भारत में अनुकूलन अंतर को पाटने के लिए वित्त और संस्थागत ढाँचे को लचीलापन की ओर पुनर्संतुलित करना, स्थानीय क्षमताओं को सशक्त बनाना और मापनीय परिणामों को संस्थागत रूप देना आवश्यक है। इससे जलवायु कार्रवाई केवल नीतिगत इरादों तक सीमित न रहकर वास्तविक जमीनी परिवर्तन में परिवर्तित हो सकेगी, जो वास्तव में स्थानीय स्तर पर संचालित अनुकूलन पर आधारित हो।