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Q. विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना मुक्त और निष्पक्ष व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए की गई थी। हालाँकि, बढ़ते आर्थिक राष्ट्रवाद और व्यापार युद्धों के कारण इसका प्रभाव लगातार कम होता जा रहा है। वैश्विक व्यापार प्रशासन में WTO की घटती भूमिका में योगदान देने वाले कारकों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इसकी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को बहाल करने के उपाय सुझाएँ। (15 अंक, 250 शब्द)

February 11, 2025

GS Paper II

प्रश्न की मुख्य माँग

  • इस बात पर प्रकाश डालिये कि किस प्रकार मुक्त और निष्पक्ष व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना की गई।
  • बढ़ते आर्थिक राष्ट्रवाद और व्यापार युद्धों के कारण विश्व व्यापार संगठन के लगातार घटते प्रभाव का परीक्षण कीजिए।
  • वैश्विक व्यापार प्रशासन में विश्व व्यापार संगठन की घटती भूमिका में योगदान देने वाले कारकों का विश्लेषण कीजिए।
  • इसकी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बहाल करने के उपाय सुझाइये।

उत्तर

वर्ष 1995 में स्थापित विश्व व्यापार संगठन (WTO), बहुपक्षीय व्यापार के संरक्षक के रूप में कार्य करता है, जो पूर्वानुमान को बढ़ावा देता है और बाधाओं को कम करता है। हालाँकि, संरक्षणवादी नीतियों से प्रेरित आर्थिक राष्ट्रवाद और अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद जैसे व्यापार युद्ध इसके अधिकार को चुनौती देते हैं। एक खंडित वैश्विक अर्थव्यवस्था में, नियम-आधारित व्यापार शासन को संरक्षित करने के लिए WTO की भूमिका को पुनर्जीवित करना महत्त्वपूर्ण है।

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विश्व व्यापार संगठन और मुक्त एवं निष्पक्ष व्यापार को सुविधाजनक बनाने में इसकी भूमिका

  • व्यापार बाधाओं में कमी: विश्व व्यापार संगठन की स्थापना टैरिफ को कम करने और व्यापार बाधाओं को खत्म करने के लिए की गई थी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि माल और सेवाएँ सीमाओं के पार स्वतंत्र रूप से चलती रहें। 
    • उदाहरण के लिए: उरुग्वे वार्ता (1986-1994) में निर्मित वस्तुओं पर औसत वैश्विक टैरिफ को 40% तक सफलतापूर्वक कम कर दिया था, जिससे वैश्विक व्यापार में सुगमता आई।
  • विवाद समाधान तंत्र: WTO के विवाद निपटान निकाय (DSB) ने यह सुनिश्चित किया कि सदस्य देश, व्यापार विवादों को पारदर्शी और कुशलतापूर्वक हल कर सकें। 
    • उदाहरण के लिए: 2002 में, WTO ने US-EU स्टील टैरिफ विवाद को सुलझाया, जिससे अमेरिका को आयातित स्टील पर अवैध टैरिफ वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
  • बहुपक्षीय समझौतों को बढ़ावा देना: विश्व व्यापार संगठन ने बहुपक्षीय समझौतों को व्यापार नीतियों में सामंजस्य स्थापित करने, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को सुविधाजनक बनाने और वैश्विक आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने में सक्षम बनाया। 
    • उदाहरण के लिए: बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार-संबंधित पहलू (TRIPS) समझौते ने दुनिया भर में IPR विनियमों को मानकीकृत किया।
  • विकास पर ध्यान: WTO ने विकासशील देशों के लिए बाजार पहुँच में सुधार के लिए दोहा विकास एजेंडा जैसे कार्यक्रम शुरू करके असमानताओं को कम करने का प्रयास किया। 
    • उदाहरण के लिए: WTO की “एड फॉर ट्रेड”(Aid for Trade) पहल के तहत, रवांडा जैसे देशों को कॉफी और चाय के लिए निर्यात क्षमता बनाने हेतु धन प्राप्त हुआ।
  • व्यापार नियमों में पूर्वानुमान सुनिश्चित करना: विश्व व्यापार संगठन ने पूर्वानुमान योग्य और पारदर्शी व्यापार नियमों का ढाँचा स्थापित किया, जिससे वैश्विक वाणिज्य में विश्वास और स्थिरता को बढ़ावा मिला। 
    • उदाहरण के लिए: सेवाओं में व्यापार पर सामान्य समझौता (GATS) ने अंतर्राष्ट्रीय सेवा प्रदाताओं के लिए कानूनी निश्चितता प्रदान की।

आर्थिक राष्ट्रवाद और व्यापार युद्धों के कारण विश्व व्यापार संगठन का प्रभाव घट रहा है

  • विवाद निपटान तंत्र की विफलता: अमेरिका ने विश्व व्यापार संगठन के अपीलीय निकाय में न्यायिक नियुक्तियों को अवरुद्ध कर दिया, जिससे 2019 से व्यापार विवादों को सुलझाने की इसकी क्षमता प्रभावित हुई।
  • व्यापार युद्धों का उदय: अमेरिका और चीन जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने एकतरफा टैरिफ का सहारा लिया, जिससे WTO के ढांचे को दरकिनार कर दिया गया और व्यापार तनाव बढ़ गया। 
    • उदाहरण के लिए: अमेरिका ने WTO तंत्र को दरकिनार करते हुए अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध में 360 बिलियन डॉलर के चीनी सामान पर टैरिफ लगाया।
  • क्षेत्रीय व्यापार समझौतों (RTA) की ओर झुकाव: RCEP जैसे RTA को प्राथमिकता देने से वैश्विक व्यापार उदारीकरण में WTO की भूमिका कम हो गई है। 
    • उदाहरण के लिए: 15 देशों को शामिल करने वाला RCEP, वैश्विक जीडीपी के 30% को कवर करता है, जो WTO के बहुपक्षीय दृष्टिकोण को कमजोर करता है।
  • IPR विनियमों में हेराफेरी: विकसित देशों ने TRIPS के तहत IPR नियमों का इस्तेमाल अपने उद्योगों को प्राथमिकता देने के लिए किया जिससे विकासशील देशों पर प्रभाव पड़ा। 
    • उदाहरण के लिए: COVID-19 महामारी के दौरान, TRIPS के तहत टीकों के लिए पेटेंट छूट में हुई देरी ने समान वैक्सीन वितरण में बाधा उत्पन्न की।
  • विकासशील देशों के बीच विश्वास का क्षरण: WTO कृषि सब्सिडी और गैर-टैरिफ बाधाओं को संबोधित करने में विफल रहा, जिससे विकासशील देशों के साथ असमानता पूर्ण व्यवहार हुआ। 
    • उदाहरण के लिए: यूरोपीय संघ की कृषि सब्सिडी, जो 2021 में 61 बिलियन डॉलर थी, ने भारत और ब्राजील जैसे विकासशील देशों के निर्यातकों को नुकसान पहुँचाया।

विश्व व्यापार संगठन के पतन में योगदान देने वाले कारक

  • ई-कॉमर्स में विफलता: WTO ने डिजिटल व्यापार के लिए व्यापक नियम विकसित नहीं किए हैं, जिससे वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था को विनियमित करने में गंभीर समस्या में आई हैं। 
    • उदाहरण के लिए: ई-कॉमर्स विवादों को विनियमित करने में WTO की अक्षमता के कारण भारत के डेटा स्थानीयकरण कानूनों को लेकर संघर्ष हुआ, जिसका असर Google और Amazon जैसी कंपनियों पर पड़ा।
  • विकसित-विकासशील विभाजन: सब्सिडी, श्रम और पर्यावरण मानकों पर विकसित और विकासशील देशों के बीच संघर्ष के कारण व्यापार वार्ता में गतिरोध उत्पन्न हो गया है। 
    • उदाहरण के लिए: दोहा दौर की वार्ता विफल हो गई क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच बाजार पहुँच और कृषि सब्सिडी पर असहमति थी।
  • सर्वसम्मति आधारित अकुशलता: 164 सदस्यों के बीच सर्वसम्मति से निर्णय लेने पर WTO की निर्भरता ने सुधारों की गति धीमी कर दी है और वार्ता में गतिरोध उत्पन्न किये हैं। 
    • उदाहरण के लिए: मत्स्य पालन सब्सिडी पर असहमति के कारण अत्यधिक मत्स्यन नियमों पर वैश्विक सर्वसम्मति प्राप्त करने में कई वर्ष लग गया।
  • कमजोर नियम प्रवर्तन: विश्व व्यापार संगठन में व्यापार नियमों का उल्लंघन करने वाले देशों के लिए दंडात्मक तंत्र का अभाव है, जिससे इसका अधिकार कमजोर हो रहा है।
  • घटते संसाधन: बजट की कमी ने उभरती व्यापार चुनौतियों से निपटने और परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने की WTO की क्षमता को कम कर दिया है। 
    • उदाहरण के लिए: 2022 में WTO के सीमित संसाधनों ने RCEP जैसे RTA की तुलना में वैश्विक व्यापार असंतुलन का समाधान करने में इसकी भागीदारी को कम कर दिया।

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विश्व व्यापार संगठन की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बहाल करने के उपाय

  • विवाद तंत्र में सुधार: अपीलीय निकाय को बहाल करने और न्यायाधीशों की नियुक्ति करने से व्यापार नियमों का प्रवर्तन सुनिश्चित होगा और सिस्टम में विश्वास बहाल होगा। 
    • उदाहरण के लिए: WTO एक कार्यशील विवाद तंत्र के साथ अमेरिका-चीन टैरिफ संघर्ष जैसे व्यापार विवादों का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान कर सकता है।
  • समावेशी बहुपक्षीय वार्ता: आर्थिक राष्ट्रवाद के उदय को संबोधित करते हुए, क्षेत्रीय समझौतों की तुलना में वैश्विक समझौतों को प्राथमिकता देने के लिए सदस्य देशों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: WTO एकतरफा उपायों को रोकने के लिए डिजिटल व्यापार कराधान पर अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच मध्यस्थता कर सकता है।
  • विकासशील देशों की चिंताओं को संबोधित करना: निष्पक्ष कृषि नीतियों को सुनिश्चित करने और व्यापार असमानताओं को कम करने के लिए दोहा विकास एजेंडा को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: विकासशील देशों के निर्यातकों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने हेतु विश्व व्यापार संगठन, यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों में कृषि सब्सिडी की सीमा तय कर सकता है।
  • वैश्विक संकटों के प्रति जवाबदेही: महामारी जैसी आपात स्थितियों के दौरान आवश्यक वस्तुओं तक समान पहुँच के लिए तीव्र कार्रवाई हेतु ट्रिप्स समझौतों में सुधार लागू किये जाने चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: COVID-19 के दौरान वैक्सीन पेटेंट छूट में तेजी लाने से भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में व्यापक वितरण संभव हो सकता था।
  • उभरते व्यापार मुद्दों पर सहयोग: जलवायु परिवर्तन, डिजिटल व्यापार और ई-कॉमर्स जैसी वैश्विक चुनौतियों को WTO के एजेंडे में शामिल करना चाहिए ताकि यह मंच प्रासंगिक बना रहे।
    • उदाहरण के लिए: WTO, सीमा पार ई-कॉमर्स को विनियमित करने के लिए रूपरेखा बना सकता है और भारत की डेटा स्थानीयकरण नीतियों व अमेरिकी टेक कंपनियों जैसे विवादों का समाधान कर सकता है।

विश्व व्यापार संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए वैश्विक सहयोग और पुराने ढाँचों में सुधार हेतु प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। असंतुलन को दूर करके, समावेशिता को बढ़ावा देकर और डिजिटल व्यापार मानदंडों को अपनाकर, WTO निष्पक्ष व्यापार और बहुपक्षवाद के प्रकाशस्तंभ के रूप में अपनी भूमिका को पुनर्स्थापित कर सकता है। राष्ट्रों को  “व्यापार के लिए एकजुट हों, एक साथ आगे बढ़ें”  के सिद्धांत के साथ न्यायसंगत वैश्विक वाणिज्य के भविष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए।

The World Trade Organization (WTO) was established to facilitate free and fair trade. However, its influence has been steadily declining due to rising economic nationalism and trade wars. Critically analyze the factors contributing to the WTO’s diminishing role in global trade governance. Suggest measures to restore its credibility and effectiveness. in hindi

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