प्रश्न की मुख्य माँग
- आंतरिकीकृत निर्भरता के रूप में रणनीतिक स्वायत्तता की व्याख्या करना।
- रणनीतिक स्वायत्तता की निरंतरता का विश्लेषण करना।
- आगे की राह।
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उत्तर
परिचय
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का पारंपरिक अर्थ प्रमुख शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए स्वतंत्र निर्णय-निर्माण को सुरक्षित रखना रहा है। तथापि, हाल के भू-राजनैतिक संकटों, प्रौद्योगिकीय निर्भरता एवं आर्थिक कमजोरियों ने यह चिंता उत्पन्न की है कि भारत की स्वायत्तता अब अमेरिकी रणनीतिक एवं आर्थिक शक्ति पर बढ़ती निर्भरता से अधिक प्रभावित हो रही है।
आंतरिकीकृत निर्भरता के रूप में रणनीतिक स्वायत्तता
- नीतिगत संरेखण: रूस–यूक्रेन युद्ध पर भारत की अपेक्षाकृत नरम प्रतिक्रिया तथा ईरान संकट के दौरान अमेरिका एवं इजरायल के साथ बढ़ती निकटता अमेरिकी रणनीतिक हितों के साथ क्रमिक संरेखण को दर्शाती है।
- उदाहरण: भारत द्वारा यूक्रेन से संबंधित कई संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों पर मतदान से दूरी बनाए रखी गई, जबकि समानांतर रूप से क्वाड (QUAD) एवं इंडो-पैसिफिक सहयोग को और बढ़ावा दिया गया।
- सुरक्षा निर्भरता: भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के संतुलन हेतु अमेरिका-नेतृत्व वाले सुरक्षा ढाँचों पर बढ़ती निर्भरता प्रदर्शित कर रहा है।
- उदाहरण: COMCASA, BECA एवं LEMOA जैसे समझौतों ने भारतीय एवं अमेरिकी सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता को सुदृढ़ किया है।
- प्रौद्योगिकीय निर्भरता: सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं रक्षा प्रौद्योगिकी जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र अमेरिकी साझेदारियों पर काफी सीमा तक निर्भर हैं।
- उदाहरण: भारत–अमेरिका क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पहल (iCET) सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग एवं रक्षा नवाचार पर केंद्रित है।
- आर्थिक संवेदनशीलता: विविधीकरण के प्रयासों के बावजूद भारत अमेरिकी व्यापार एवं शुल्क (Tariff) संबंधी निर्णयों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।
रणनीतिक स्वायत्तता की निरंतरता
- रूसी तेल की खरीद: पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल (Crude Oil) की खरीद जारी रखी, जो उसके स्वतंत्र आर्थिक निर्णयों को दर्शाता है।
- उदाहरण: भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 के बाद रूस भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया।
- बहु-संरेखण: भारत एक साथ प्रतिस्पर्द्धी वैश्विक शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखता है।
- उदाहरण: भारत अमेरिका के साथ क्वाड (QUAD) में भागीदारी करता है, जबकि ब्रिक्स (BRICS) एवं शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भी सक्रिय बना हुआ है।
- रणनीतिक विविधीकरण: भारत फ्राँस, जापान एवं पश्चिम एशियाई देशों के साथ व्यापक साझेदारियों के माध्यम से अत्यधिक निर्भरता को कम करने का प्रयास कर रहा है।
- स्वतंत्र रुख: भारत बहुपक्षीय मंचों पर प्रायः गुटीय राजनीति (Bloc Politics) से दूरी बनाए रखता है।
- उदाहरण: भारत G20 एवं संयुक्त राष्ट्र (UN) की चर्चाओं में निरंतर “रणनीतिक स्वायत्तता” एवं “बहुध्रुवीयता” (Multipolarity) की वकालत करता है।
- घरेलू क्षमता निर्माण: भारत स्वदेशी आर्थिक एवं रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रहा है।
- उदाहरण: आत्मनिर्भर भारत एवं उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (Production Linked Incentive-PLI) जैसी सरकारी पहलें बाहरी निर्भरता को कम करने का लक्ष्य रखती हैं।
आगे की राह
- आर्थिक लचीलापन: बाहरी दबावों एवं निर्भरता से उत्पन्न संवेदनशीलता को कम करने हेतु विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा एवं आपूर्ति शृंखला विविधीकरण को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
- प्रौद्योगिकीय क्षमता: विदेशी प्रौद्योगिकियों पर अत्यधिक निर्भरता के बजाय राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) जैसी पहलों के माध्यम से घरेलू अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश बढ़ाया जाना चाहिए।
- मुद्दा-आधारित कूटनीति: किसी एक शक्ति-गुट के साथ वैचारिक संरेखण के बजाय लचीली एवं हित-आधारित साझेदारियाँ अपनाई जानी चाहिए।
- उदाहरण: पश्चिमी देशों तथा ग्लोबल साउथ दोनों मंचों के साथ समानांतर रूप से सक्रिय सहभागिता जारी रखी जानी चाहिए।
- क्षेत्रीय स्थिरता: पड़ोसी क्षेत्रों से संबंधित चुनौतियों का समाधान बाहरी शक्तियों पर अत्यधिक निर्भर हुए बिना स्वतंत्र रूप से किया जाना चाहिए।
- उदाहरण: बिम्सटेक (BIMSTEC) एवं हिंद महासागर क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना।
- वैश्विक नेतृत्व: भारत को अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता एवं न्यायसंगत बहुध्रुवीयता के समर्थक के रूप में अपनी पारंपरिक भूमिका को पुनर्जीवित करना चाहिए।
- उदाहरण: वर्ष 2023 के G20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता के दौरान भारत द्वारा “वसुधैव कुटुंबकम्” पर दिया गया विशेष बल।
निष्कर्ष
संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत की साझेदारी रणनीतिक एवं प्रौद्योगिकीय लाभ प्रदान करती है, किंतु अत्यधिक निर्भरता वास्तविक रणनीतिक स्वायत्तता को कमजोर कर सकती है। भारत का दीर्घकालिक उत्थान आत्मनिर्भरता, विविधीकृत कूटनीति तथा राष्ट्रीय एवं वैश्विक हितों पर आधारित स्वतंत्र दृष्टिकोण के साथ संतुलित साझेदारियों को बनाए रखने पर निर्भर करेगा।