Q. जलवायु कार्रवाई के प्रति उत्साही प्रतिबद्धताओं के बावजूद, भारत की निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था (Low-Carbon Economy) की ओर संक्रमण प्रक्रिया गंभीर संरचनात्मक और आर्थिक बाधाओं से बाधित है। भारत के अद्यतन NDCs के आलोक में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

April 9, 2026

GS Paper IIIEnvironment & Ecology

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत की अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान प्रतिबद्धताओं की चर्चा कीजिए।
  • प्रमुख बाधाओं की चर्चा कीजिए। 
  • आगे की राह सुझाइए।

उत्तर

भारत के अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) जलवायु परिवर्तन के प्रति मजबूत महत्त्वाकांक्षा का संकेत देते हैं, फिर भी संरचनात्मक कठोरताएँ, वित्तपोषण की कमी और विकासात्मक प्राथमिकताएँ परिवर्तन की गति को बाधित करती हैं, जिससे प्रतिबद्धताओं और जमीनी स्तर पर निम्न-कार्बन परिवर्तन के परिणामों के बीच अंतर पैदा होता है।

मुख्य भाग

भारत की अद्यतन NDC प्रतिबद्धताएँ

  • उत्सर्जन तीव्रता में कमी: वर्ष 2030 तक 2005 के स्तर की तुलना में GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी करना।
    • उदाहरण: भारत ने पहले ही लगभग 33–35% की कमी हासिल कर ली है (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, 2023)।
  • गैर-जीवाश्म क्षमता: वर्ष 2030 तक कुल स्थापित विद्युत क्षमता का लगभग 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करना।
    • उदाहरण: वर्ष 2024 तक 180 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आँकड़े)।
  • कार्बन सिंक लक्ष्य: 2.5 से 3 अरब टन CO₂ समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक विकसित करना।
    • उदाहरण: ग्रीन इंडिया मिशन के अंतर्गत वनीकरण पहलें।
  • नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार: सौर, पवन और हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देना।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (₹19,700 करोड़ का प्रावधान)।
  • जीवनशैली में परिवर्तन: सतत् उपभोग के पैटर्न को प्रोत्साहित करना।
    • उदाहरण: ‘पर्यावरण के लिए जीवनशैली’ (LiFE) पहल, जिसे वैश्विक स्तर पर प्रारंभ किया गया।

मुख्य बाधाएँ 

  • कोयले पर निर्भरता: ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयले पर अत्यधिक निर्भरता बनी हुई है।
    • उदाहरण: लगभग 70% विद्युत उत्पादन कोयले से होता है (केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आँकड़े)।
  • वित्तीय अंतराल: बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता है, जबकि हरित वित्त तक पहुँच सीमित है।
    • उदाहरण: भारतीय रिजर्व बैंक ने शून्य-उत्सर्जन मार्ग के लिए भारी वित्तीय आवश्यकताओं को रेखांकित किया है।
  • प्रौद्योगिकी सीमाएँ: उन्नत तकनीकों में घरेलू क्षमता अपर्याप्त है।
    • उदाहरण: सौर मॉड्यूल और बैटरी भंडारण के लिए आयात पर निर्भरता।
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की चुनौतियाँ: छोटे उद्यमों के पास हरित परिवर्तन के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
    • उदाहरण: ऊर्जा-कुशल तकनीकों को अपनाने में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को उच्च लागत का सामना करना पड़ता है।
  • अवसंरचना की कमी: कमजोर ग्रिड और भंडारण अवसंरचना नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को सीमित करती है।

आगे की राह 

  • हरित वित्त: सुलभ जलवायु वित्त और मिश्रित वित्तपोषण मॉडल का विस्तार किया जाए।
    • उदाहरण: भारत सरकार द्वारा जारी संप्रभु हरित बॉण्ड।
  • प्रौद्योगिकी विकास: घरेलू विनिर्माण और नवाचार को बढ़ावा दिया जाए।
    • उदाहरण: सौर पीवी मॉड्यूल के लिए पीएलआई योजना।
  • ऊर्जा विविधीकरण: स्वच्छ विकल्पों के माध्यम से कोयले पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया जाए।
    • उदाहरण: परमाणु ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन क्षेत्रों का विस्तार।
  • अवसंरचना सुदृढ़ीकरण: ग्रिड, भंडारण और ट्रांसमिशन प्रणालियों का उन्नयन किया जाए।
    • उदाहरण: ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर्स परियोजना।
  • व्यावहारिक परिवर्तन: सतत् उपभोग के पैटर्न को प्रोत्साहित किया जाए।
    • उदाहरण: LiFE पहल के माध्यम से व्यक्तिगत जलवायु जिम्मेदारी को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष

भारत की जलवायु रणनीति समानता के सिद्धांत पर आधारित महत्त्वाकांक्षा को दर्शाती है। किंतु संरचनात्मक बाधाएँ यह आवश्यक बनाती हैं कि वैश्विक जलवायु वित्त, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संस्थागत सुधार को सुदृढ़ किया जाए तथा साझा लेकिन भिन्न उत्तरदायित्व (CBDR) के सिद्धांत का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि न्यायसंगत, व्यवहार्य और त्वरित निम्न-कार्बन परिवर्तन संभव हो सके, जो UNFCCC प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हो।

Despite enthusiastic commitments to climate action, India’s transition to a low-carbon economy is hindered by profound structural and economic constraints. Analyze this statement in the light of India’s updated NDCs. in hindi

Explore UPSC Foundation Course

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.