Q. 'मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी' (MTP) पर जारी बहस में, एक महिला की प्रजनन संबंधी स्वायत्तता (Reproductive Autonomy) और ‘एडवांस्ड जेस्टेशनल एज’ (Advanced Gestational Age) से जुड़े चिकित्सकीय जोखिमों के बीच एक सतर्क संतुलन बनाना अनिवार्य है। नाबालिग बलात्कार पीड़ितों के संदर्भ में हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों के आलोक में, इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

May 4, 2026

GS Paper IIGovernance

प्रश्न की मुख्य माँग

  • प्रजनन संबंधी स्वायत्तता का अर्थ और महत्त्व समझाइए।
  • ‘एडवांस्ड जेस्टेशनल एज’ से जुड़े चिकित्सीय जोखिमों का वर्णन कीजिए।
  • प्रजनन संबंधी स्वायत्तता और चिकित्सीय सुरक्षा के बीच संतुलित ढाँचे की आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

गर्भ का चिकित्सीय समापन का प्रश्न केवल चिकित्सीय नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा है। जहाँ प्रजनन स्वायत्तता महिला के अपने शरीर पर उसके निर्णय के अधिकार की रक्षा करती है, वहीं उन्नत गर्भावधि गंभीर चिकित्सीय जोखिम उत्पन्न करती है। इसलिए अधिकारों और चिकित्सा सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक हो जाता है।

प्रजनन स्वायत्तता का अर्थ और महत्त्व

  • शारीरिक स्वायत्तता: महिला को यह अधिकार है कि वह गर्भावस्था को जारी रखे या समाप्त करे—यह उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा का हिस्सा है।
    • उदाहरण: सर्वोच्च न्यायालय ने X बनाम प्रधान सचिव, स्वास्थ्य (2022) में प्रजनन विकल्प को अनुच्छेद-21 से जोड़ा।
  • गरिमा की रक्षा: अवांछित गर्भावस्था को जबरन जारी रखना, विशेषकर दुष्कर्म, नाबालिगों और कमजोर वर्ग की महिलाओं के मामलों में, उनकी गरिमा का उल्लंघन करता है।
    • उदाहरण: सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में एक 15 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को उसकी स्पष्ट अनिच्छा का सम्मान करते हुए गर्भसमापन की अनुमति दी।
  • मानसिक स्वास्थ्य: अवांछित गर्भावस्था गंभीर मानसिक आघात, चिंता और सामाजिक कलंक उत्पन्न करती है, विशेषकर नाबालिग दुष्कर्म पीड़िताओं के लिए।
    • उदाहरण: MTP अधिनियम गर्भनिरोधक विफलता और दुष्कर्म से उत्पन्न गर्भावस्था को गंभीर मानसिक आघात के रूप में मान्यता देता है।
  • असुरक्षित गर्भसमापन: कानूनी पहुँच सीमित होने पर महिलाएँ झोलाछाप चिकित्सकों के पास जाने को मजबूर हो सकती हैं जिससे जीवन और स्वास्थ्य को खतरा होता है।
  • लैंगिक न्याय: प्रजनन स्वायत्तता महिलाओं को अपने जीवन और भविष्य से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार देकर वास्तविक समानता को मजबूत करती है।
    • उदाहरण: MTP संशोधन अधिनियम, 2021 ने दुष्कर्म पीड़िताओं सहित विशेष श्रेणियों के लिए 24 सप्ताह तक गर्भसमापन की अनुमति देकर पहुँच का विस्तार किया।

‘एडवांस्ड जेस्टेशनल एज’ के चिकित्सीय जोखिम 

  • मातृ जोखिम: उन्नत गर्भावधि में गर्भसमापन से माँ के लिए रक्तस्राव, संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा अधिक होता है।
    • उदाहरण: एम्स ने 30 सप्ताह पर गर्भसमापन का विरोध किया, यह कहते हुए कि इससे किशोरी माँ के स्वास्थ्य को गंभीर जोखिम हो सकता है।
  • भ्रूण की जीवित रहने की क्षमता: 24 सप्ताह के बाद भ्रूण की जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे गर्भसमापन चिकित्सीय और नैतिक रूप से अधिक जटिल हो जाता है।
    • उदाहरण: इसी कारण अधिकांश देशों में 24 सप्ताह के आस-पास गर्भसमापन पर कानूनी प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
  • शल्य जटिलता: गर्भावस्था के अंतिम चरण में गर्भसमापन के लिए जटिल चिकित्सीय प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है, जिनमें संस्थागत देखभाल और विशेषज्ञ निगरानी जरूरी होती है।
  • मनोवैज्ञानिक प्रभाव: उचित चिकित्सीय परामर्श के अभाव में देर से किए गए गर्भसमापन से नाबालिग और उसके परिवार पर भावनात्मक दबाव पड़ सकता है।
  • स्वास्थ्य संबंधी अनिश्चितता: उचित चिकित्सीय मूल्यांकन के बिना लिए गए निर्णय, दीर्घकालिक प्रजनन स्वास्थ्य और जीवन के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकते हैं।
    • उदाहरण: केवल व्यक्तिगत इच्छा के आधार पर लिए गए निर्णय, चिकित्सीय समीक्षा का स्थान नहीं ले सकते।

संतुलित ढाँचे की आवश्यकता 

  • चिकित्सीय बोर्ड: विशेष परिस्थितियों में उन्नत गर्भावस्था के मामलों में भ्रूण की जीवितता, मातृ सुरक्षा और मानसिक स्थिति का आकलन करने के लिए स्वतंत्र चिकित्सा बोर्ड होने चाहिए।
    • उदाहरण: न्यायालय अक्सर देर से गर्भसमापन की अनुमति देने से पहले एम्स और अस्पतालों के विशेषज्ञ बोर्ड की राय लेते हैं।
  • मामले की संवेदनशीलता: कानून को दुष्कर्म पीड़िताओं, नाबालिगों और गंभीर भ्रूण असामान्यताओं के मामलों में कठोर सीमाओं के बजाय अपवादों की अनुमति देनी चाहिए।
  • प्रारंभिक पहचान: समय पर रिपोर्टिंग, जाँच और परामर्श से निर्धारित गर्भावधि सीमा के भीतर सुरक्षित गर्भसमापन सुनिश्चित किया जा सकता है।
  • अभिभावकीय समर्थन: नाबालिगों के मामलों में माता-पिता और अभिभावकों को सूचित निर्णय सुनिश्चित करना चाहिए, साथ ही बच्चे के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करनी चाहिए।
  • कानूनी स्पष्टता: स्पष्ट वैधानिक प्रावधान बार-बार न्यायालयी हस्तक्षेप को कम कर सकते हैं और चिकित्सीय सुरक्षा के साथ पूर्वानुमेय पहुँच सुनिश्चित कर सकते हैं।
    • उदाहरण: सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से नाबालिग दुष्कर्म पीड़ितों के लिए समय-सीमा पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

निष्कर्ष

न तो पूर्ण स्वायत्तता और न ही कठोर चिकित्सीय पितृसत्तात्मकता पर्याप्त है। एक मानवीय ढाँचा ऐसा होना चाहिए, जो प्रजनन अधिकारों की रक्षा करते हुए वैज्ञानिक चिकित्सीय निर्णय को भी सुनिश्चित करे। समय पर पहुँच, सशक्त चिकित्सा बोर्ड, प्रारंभिक परामर्श और स्पष्ट कानूनी प्रावधान—इन सबके माध्यम से महिलाओं, विशेषकर नाबालिगों के लिए गरिमा, सुरक्षा और न्याय को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।

In the debate over medical termination of pregnancy, a careful balance must be struck between a woman’s reproductive autonomy and the clinical risks associated with advanced gestational age. Critically analyze this statement in light of recent Supreme Court observations regarding minor rape victims. in hindi

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