Q. नक्सलवाद की सैन्य हार भले ही आसन्न हो, लेकिन व्यवस्थागत अलगाव और शहरी असमानता की निरंतरता इस विद्रोह को नए रूपों में पुनर्जीवित करने का खतरा उत्पन्न करती है। वामपंथी उग्रवाद के मूल कारणों का विश्लेषण कीजिए और इसके पुनरुत्थान को रोकने के लिए सामाजिक-आर्थिक उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • वामपंथी उग्रवाद के मूल कारणों की चर्चा कीजिए।
  • उभरते जोखिम के नए स्वरूपों का उल्लेख कीजिए।
  • इसके पुनरुत्थान को रोकने हेतु सामाजिक-आर्थिक उपायों को सुझाइए।

उत्तर

वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध भारत की सफलता एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षा उपलब्धि है, किंतु इसकी जड़ें गहरी संरचनात्मक असमानताओं में निहित हैं। जब तक प्रणालीगत वंचना और शहरी संकट का समाधान नहीं किया जाता, तब तक उग्रवाद नए और अधिक जटिल रूपों में पुनः उभर सकता है।

मुख्य भाग

वामपंथी उग्रवाद के मूल कारण

  • राज्य की उपेक्षा: जनजातीय क्षेत्रों में ऐतिहासिक शासन शून्यता ने अलगाव और राज्य संस्थाओं के प्रति अविश्वास को जन्म दिया।
    • उदाहरण: बस्तर के आदिवासियों को प्रशासनिक उदासीनता के कारण अपनी ही भूमि पर बाहरी जैसा व्यवहार झेलना पड़ा।
  • भूमि से वंचित होना: उचित मुआवजे के बिना विस्थापन से कमजोर समुदायों में असंतोष बढ़ता है।
    • उदाहरण: हसदेव अरण्य कोयला खनन परियोजनाओं (2022–24) के खिलाफ आदिवासी विरोध, जिसमें वन भूमि हस्तांतरण का मुद्दा प्रमुख रहा।
  • गरीबी का दुष्चक्र: लगातार गरीबी और आजीविका के अवसरों की कमी असंतोष को बनाए रखती है।
    • उदाहरण: लातेहार और गुमला जैसे जिलों से फसल विफलता और मनरेगा कार्य दिवसों की कमी के कारण पलायन बढ़ा।
  • प्रशासनिक उदासीनता: भ्रष्टाचार और लालफीताशाही से कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बाधित होता है।
    • उदाहरण: “बाबू संस्कृति” के कारण योजनाएँ कागजों तक सीमित रह जाती हैं।
  • शोषण का तंत्र: स्थानीय प्रभावशाली वर्ग और उग्रवादी दोनों ही लोगों का शोषण करते रहे हैं।
    • उदाहरण: माओवादी वित्तपोषण की एनआईए जाँच (2022-23) में धनबाद में कोयला ट्रांसपोर्टरों से जबरन वसूली (“शुल्क”) का खुलासा हुआ।

नए स्वरूपों का जोखिम

  • शहरी उग्रकरण: शहरी क्षेत्रों में बढ़ती असमानता नए वैचारिक असंतोष को जन्म दे सकती है।
    • उदाहरण: महानगरों में बेरोजगार शिक्षित युवाओं के साथ झुग्गियों का विस्तार।
  • पहचान-आधारित उग्रवाद: असंतोष जाति, धर्म या भाषा के आधार पर संगठित आंदोलनों में परिवर्तित हो सकता है।
    • उदाहरण: अलगाव की भावना का जातीय या सांप्रदायिक तनाव के रूप में प्रकट होना।
  • डिजिटल लामबंदी: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शिकायतों को संगठित विरोध में बदल सकते हैं।
    • उदाहरण: सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं की लामबंदी और विरोध प्रदर्शन।
  • अपराध से जुड़ाव: विचारधारा आधारित आंदोलन संगठित अपराध में परिवर्तित हो सकते हैं।
    • उदाहरण: माओवादी गतिविधियों का वसूली रैकेट जैसे आपराधिक स्वरूप में बदलना।
  • नशे की ओर झुकाव: सामाजिक निराशा सशस्त्र विद्रोह के बजाय नशे की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकती है।

पुनरुत्थान रोकने हेतु सामाजिक-आर्थिक उपाय

  • भूमि न्याय:  भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
    • उदाहरण: जनजातीय क्षेत्रों में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना।
  • आजीविका संवर्द्धन: संवेदनशील क्षेत्रों में रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाए जाएँ।
    • उदाहरण: वामपंथी चरमपंथ से प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा और आकांक्षी जिलों कार्यक्रम का विस्तार।
  • शासन सुधार: पारदर्शिता और कल्याणकारी योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुँच सुनिश्चित की जाए।
    • उदाहरण: प्रत्यक्ष लाभ अंतररण (DBT) के माध्यम से सब्सिडी वितरण में भ्रष्टाचार में कमी।
  • शहरी समावेशन: शहरों में झुग्गी बस्तियों की स्थिति और युवाओं की बेरोजगारी का समाधान किया जाए।
    • उदाहरण: पीएम आवास योजना-शहरी और स्किल इंडिया योजनाएँ शहरी गरीबों को लक्षित करती हैं।
  • विश्वास निर्माण: दमनात्मक पुलिसिंग के बजाय समुदाय-केंद्रित शासन को अपनाया जाए।
    • उदाहरण: जिला रिजर्व गार्ड में स्थानीय आदिवासियों की भर्ती से सुरक्षा और विश्वास दोनों में वृद्धि।

निष्कर्ष

नक्सलवाद का केवल सैन्य रूप से उन्मूलन पर्याप्त नहीं है। स्थायी शांति के लिए न्याय, गरिमा और समावेशन आवश्यक हैं। असमानताओं को दूर कर और राज्य की वैधता को पुनर्स्थापित कर ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि उग्रवाद को न जंगलों में और न ही शहरों में कोई आधार मिले।

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