प्रश्न की मुख्य माँग
- आंतरिक सुरक्षा में राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (NATGRID) की उपयोगिता
- राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड से जुड़ी चिंताएँ
- आवश्यक कानूनी सुरक्षा उपाय
- आवश्यक संस्थागत सुरक्षा उपाय
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उत्तर
राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (NATGRID) की स्थापना 26/11 हमलें के बाद खुफिया जानकारी साझाकरण में सुधार के लिए की गई थी, लेकिन व्यापक पैमाने पर निगरानी को प्रोत्साहित करने के लिए अक्सर इसकी आलोचना की जाती है। यद्यपि यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए 21 डेटाबेस का एक प्रणाली में विलय करता है, लेकिन साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत निजता के बीच संतुलन के बारे में गंभीर चिंताएँ भी उत्पन्न करता है।
आंतरिक सुरक्षा में राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (NATGRID) की उपयोगिता
- वास्तविक समय अंतरसंचालनीयता: यह 11 केंद्रीय एजेंसियों को कर, यात्रा और बैंक संबंधी रिकॉर्ड जैसे अलग-अलग डेटा तक त्वरित पहुँच प्रदान करने के लिए एक सहज मंच उपलब्ध कराता है।
- उदाहरण: हाल ही में गृह मंत्रालय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आतंकी वित्तपोषण मामलों में ‘मनी ट्रेल’ पर नजर रखने के लिए NATGRID का डेटा-लिंकिंग महत्वपूर्ण है।
- खुफिया जानकारी साइलो (सूचनाओं का अलग थलग रहना) को रोकना: यह अंतर-विभागीय डेटा अनुरोधों की नियमावली बाधाओं को समाप्त करता है, साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि किसी हमले से पहले ही खुफिया जानकारी एकत्रित कर ली गई हैं।
- उदाहरण: 26/11 के हमलों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे वीजा प्रविष्टियों और संदिग्ध वित्तीय हस्तांतरणों पर खंडित जानकारी सुरक्षा और खुफिया तंत्र को सक्रिय कर हमलों को रोकने के लिए आवश्यक कार्यवाही करवाने में विफल रही।
- पूर्वानुमानित पुलिस कार्यवाही क्षमता: बिग डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके, NATGRID व्यवहार के संदिग्ध पैटर्न की पहचान कर सकता है जो कट्टरपंथ या आतंकी घटनाओं के लिए संपूर्ण जानकारी का संकेत देता है।
- उदाहरण: ‘साइबर सुरक्षित भारत’ पहल के तहत, NATGRID साइबर धोखाधड़ी और आतंकवादी भर्ती के क्षेत्रीय समूहों की पहचान करने में मदद करता है।
- प्रभावी सीमा प्रबंधन: आप्रवासन, वीजा और विदेशी पंजीकरण और ट्रैकिंग (IVFRT) प्रणाली के साथ एकीकरण उच्च जोखिम वाले संदिग्ध यात्रियों की बेहतर निगरानी करने में सक्षम बनाता है।
राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (NATGRID) से जुड़ी चिंताएँ
- निजता उल्लंघन के जोखिम: ‘संभावित कारण’ वारंट के बिना व्यापक पैमाने पर निगरानी राज्य को एक अनावश्यक रूप से नागरिकों के निजी जीवन में घुसपैठ करने वाली सत्ता में बदल देती है, जो संभावित रूप से सर्वोच्च न्यायालय के पुट्टास्वामी निर्णय का उल्लंघन करती है।
- डेटा सुरक्षा संवेदनशीलता: संवेदनशील डेटा को केंद्रीकृत करने से ‘विफलता का एकल बिंदु’ बनता है जो राज्य प्रायोजित साइबर हमलों द्वारा लक्षित होने पर विनाशकारी हो सकता है।
- उदाहरण: एम्स पर रैनसमवेयर हमले विदेशी हैकरों के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय डिजिटल अवसंरचना की भेद्यता को उजागर करते हैं।
- दुरुपयोग की संभावना: कड़ी निगरानी के बिना, इस मंच को राजनीतिक निगरानी या नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं और असंतुष्टों को लक्षित करने के लिए पुनरुद्देशित किया जा सकता है।
- क्षेत्रीय पुलिस का बहिष्कार: NATGRID मुख्य रूप से केंद्रीय एजेंसियों को सेवा प्रदान करता है, जिससे राज्य पुलिस तत्काल खुफिया दायरे से बाहर हो जाती है।
आवश्यक कानूनी सुरक्षा उपाय
- समर्पित विधायी अधिनियम: NATGRID को एक कार्यकारी अधिसूचना से परिभाषित शक्तियों, कार्यों और सीमाओं के साथ एक वैधानिक निकाय में परिवर्तित करना।
- न्यायिक निरीक्षण तंत्र: संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा समूहों तक पहुँचने से पहले न्यायिक वारंट या उच्च-स्तरीय स्वतंत्र समिति की मंजूरी की आवश्यकता होनी चाहिए।
- उदाहरण: नागरिकों को अनधिकृत डेटा प्रोफाइलिंग से बचाने के लिए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम 2023 को NATGRID के साथ मजबूती से संरेखित करने की आवश्यकता है।
- ‘सनसेट क्लाज’: समय-समय पर समीक्षा का प्रावधान करना ताकि डेटा प्रतिधारण की आवश्यकता का मूल्यांकन किया जा सकें और अनावश्यक संवेदनशील जानकारी को हटाया जाए।
- उदाहरण: यूरोपीय जीडीपीआर मानक ‘उद्देश्य सीमा’ के लिए एक फ्रेमवर्क प्रदान करते हैं जिसका वर्तमान में NATGRID में अभाव है।
आवश्यक संस्थागत सुरक्षा उपाय
- बाह्य लेखापरीक्षा प्रणाली: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) या एक तकनीकी विशेषज्ञ समिति द्वारा अनिवार्य वार्षिक लेखापरीक्षा आयोजित करना।
- सख्त पहुँच नियंत्रण: अंदरूनी लोगों द्वारा दुरुपयोग को रोकने के लिए बहु-स्तरीय बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और प्रत्येक खोजे गए प्रश्न की विस्तृत लॉगिंग को नियोजित करना।
- उदाहरण: NATGRID ने यह सुनिश्चित करने के लिए भूमिका-आधारित एक्सेस कंट्रोल (RBAC) पेश किया है कि अधिकारी केवल प्रासंगिक डेटा खंड तक पहुँच सकें।
- शिकायत निवारण निकाय: एक स्वतंत्र लोकपाल बनाना जहाँ नागरिक “डिजिटल प्रोफाइलिंग” या गलत डेटा प्रविष्टियों के लिए रिपोर्ट कर सकें और समाधान प्राप्त कर सकें।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (NATGRID) एक शक्तिशाली उपकरण है जो भारत के आतंकवाद-रोधी ग्रिड को आधुनिक बना सकता है, लेकिन इसे ‘डिजिटल सत्तावाद का खोज इंजन” बनने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। भविष्य “डिज़ाइन द्वारा निजता” को इस मंच के मूल स्थापत्य में समाहित करने में निहित है। एक मजबूत वैधानिक ढाँचा बनाकर और अपने संचालन को न्यायिक और संसदीय निगरानी के अधीन करके, भारत यह सुनिश्चित कर सकता है कि NATGRID अपने नागरिकों की संवैधानिक आत्मा से समझौता किए बिना देश की सुरक्षा करता है।
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