Q. अरावली पर्वतमाला केवल एक भूवैज्ञानिक अवशेष नहीं है, बल्कि अत्यधिक आबादी वाले सिंधु-गंगा के मैदानों के लिए एक महत्त्वपूर्ण जलवायु अवरोध है। हाल के पर्यावरणीय क्षरण और मानसून पूर्व धूल भरी आंधियों की बढ़ती आवृत्ति के आलोक में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

June 2, 2026

GS Paper IIIEnvironment & Ecology

प्रश्न की मुख्य माँग

  • सिंधु-गंगा के मैदान के लिए अरावली पर्वतमाला की जलवायुवीय अवरोधक के रूप में भूमिका की व्याख्या कीजिए।
  • अरावली पर्वतमाला के पर्यावरणीय निम्नीकरण और बढ़ते मानसून पूर्व धूल भरी आँधियों के बीच संबंध का विश्लेषण कीजिए।
  • अरावली संरक्षण एवं धूल भरी आँधियों के प्रभाव को कम करने हेतु आगे की राह सुझाइए।

उत्तर

परिचय

लगभग 700 किमी. तक उत्तर-पश्चिमी भारत में फैली अरावली पर्वतमाला मरुस्थलीकरण तथा धूल के प्रसार के विरुद्ध एक प्राकृतिक पारिस्थितिकी अवरोधक के रूप में कार्य करती है। किंतु तीव्र पर्यावरणीय निम्नीकरण के कारण इसकी जलवायुवीय भूमिका कमजोर होती जा रही है, जिससे सिंधु-गंगा के मैदान की संवेदनशीलता बढ़ रही है।

जलवायुवीय अवरोधक के रूप में अरावली

  • धूल अवरोधक: अरावली पर्वतमाला थार मरुस्थल से आने वाली धूलयुक्त हवाओं को रोकती है, जिससे उत्तरी भारत की ओर धूल का प्रसार कम होता है।
    • उदाहरण: अरावली से टकराने पर हवाओं की गति कम हो जाती है और पश्चिमी ढालों पर रेत “अवरोधक बालू टीलों (Obstacle Dunes)” के रूप में जमा हो जाती है।
  • प्राकृतिक शोधक: पर्वतमाला पर मौजूद वनस्पतियाँ, धूल और रेत के कणों को अवरोधित करने का कार्य करती है, जिससे क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता में सुधार होता है।
    • उदाहरण: सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एरिड एंड डेजर्ट अफॉरेस्टेशन रिसर्च (CEDAR) के शोधकर्ताओं ने अरावली की ढालों पर वृक्षावरण द्वारा उत्पन्न “प्राकृतिक शोधक प्रभाव” को रेखांकित किया है।
  • मरुस्थलीकरण पर नियंत्रण: यह पर्वतमाला मरुस्थलीय परिस्थितियों के पूर्व की ओर विस्तार को रोकती है और उपजाऊ कृषि क्षेत्रों की रक्षा करती है।
    • उदाहरण: अरावली पर्वतमाला थार मरुस्थल और घनी आबादी वाले सिंधु-गंगा के मैदानों के बीच एक प्राकृतिक अवरोध के रूप में स्थित है।
  • जलवायु नियामक: धूल को रोकने की इसकी क्षमता सूर्य के प्रकाश के प्रवेश तथा सतही तापमान को प्रभावित करती है, जिससे स्थानीय जलवायु परिस्थितियों में परिवर्तन आता है।
  • जनसंख्या की सुरक्षा: धूल के प्रसार को कम करके यह पर्वतमाला बड़े जनसंख्या केंद्रों को पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों से बचाती है।
    • उदाहरण: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के जलवायु जोखिम एटलस (Climate Hazards Atlas) में दिल्ली और आस-पास के जिलों को उच्च धूल और आँधी के जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है।

निम्नीकरण एवं धूल भरी आँधियाँ

  • खनन का दबाव: व्यापक खनन गतिविधियों ने पर्वतीय संरचनाओं को कमजोर कर दिया है तथा अरावली की प्राकृतिक अवरोधक क्षमता को घटाया है।
    • उदाहरण: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)  के अरावली पुनर्स्थापन ढाँचे (Aravalli Restoration Framework) में ग्रेनाइट, लाल सिलिका तथा अन्य खनिजों के खनन को प्रमुख कारणों में बताया गया है।
  • वनों की हानि: घटते वनावरण के कारण धूल को रोकने की क्षमता कम हो रही है।
  • पहाड़ियों का लुप्त होना: पहाड़ियों के भौतिक रूप से नष्ट होने से धूल के आवागमन के लिए नए मार्ग सृजित हुए हैं।
    • उदाहरण: भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI), 2018 के अनुसार, राजस्थान में अरावली की 128 पहाड़ियों में से 31 पहाड़ियाँ लुप्त हो चुकी हैं।
  • अंतरालों का विस्तार: पर्वतमाला में बढ़ते अंतराल धूलभरी आँधियों को उत्तरी भारत के भीतर तक पहुँचने की अनुमति देते हैं।
    • उदाहरण: भारतीय वन्यजीव संस्थान (2009) ने अरावली में 12 प्रमुख अंतरालों की पहचान की थी, जो निम्नीकरण के कारण और अधिक विस्तृत हो गए हैं।
  • धूल का बढ़ता प्रवेश: अब मध्यम गति की हवाएँ भी धूल को अधिक बार उत्तरी मैदानों तक पहुँचा रही हैं।
    • उदाहरण: स्काइमेट वेदर के अनुसार, अब 35–40 किमी./घंटा की हवा की गति पर भी धूल दिल्ली तक पहुँच जाती है, जबकि पहले केवल तीव्र आंधियाँ ही इसके लिए उत्तरदायी थीं।

आगे की राह

  • वनों का पुनर्स्थापन: धूल को प्राकृतिक रूप से छानने वाली प्रणाली को पुनर्निर्मित करने के लिए बड़े पैमाने पर देशज प्रजातियों का वनीकरण किया जाए।
    • उदाहरण: वर्ष 2024 में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अरावली ग्रीन वॉल परियोजना प्रारंभ की, जिसका उद्देश्य गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में 1,400 किमी लंबा ग्रीन बफर (Green Buffer) विकसित करना है।
  • खनन का विनियमन: खनन संबंधी प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा क्षतिग्रस्त खदान क्षेत्रों का पुनर्वास किया जाए।
    • उदाहरण: एम. सी. मेहता बनाम भारत संघ (2002) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने पारिस्थितिकी निम्नीकरण को रोकने के लिए अरावली पर्वतमाला के कुछ हिस्सों में खनन गतिविधियों को बंद करने का निर्देश दिया था।
  • अंतरालों को पाटना: चिह्नित क्षतिग्रस्त गलियारों और पर्वतीय अंतरालों में पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • निगरानी को सुदृढ़ करना: अतिक्रमण तथा पर्यावरणीय निम्नीकरण की समय पर पहचान के लिए रिमोट सेंसिंग और जीआईएस (GIS) आधारित निगरानी प्रणालियों का उपयोग किया जाए।
    • उदाहरण: भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI), भारत वन स्थिति रिपोर्ट (India State of Forest Report) के माध्यम से उपग्रह-आधारित निगरानी का उपयोग कर अरावली क्षेत्र में वनावरण और क्षरण की स्थिति का आकलन करता है।
  • क्षेत्रीय नियोजन: उत्तरी राज्यों की वायु गुणवत्ता सुधार तथा जलवायु अनुकूलन रणनीतियों में अरावली संरक्षण को समाहित किया जाए।

निष्कर्ष

अरावली पर्वतमाला केवल एक प्राचीन पर्वत शृंखला नहीं है, बल्कि यह उत्तरी भारत के लिए एक महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय सुरक्षा कवच है। इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण और पुनर्स्थापन जलवायु लचीलापन (Climate Resilience), वायु गुणवत्ता में सुधार तथा सतत् विकास सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

The Aravalli range is not merely a geological relic, but a vital climatological shield for the highly populated Indo-Gangetic plains. Examine this statement in light of recent environmental degradation and the increasing frequency of pre-monsoon dust storms. in hindi

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.