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Q. रिटर्निंग अधिकारियों (निर्वाचन अधिकारियों) द्वारा चुनावी कानूनों का मनमाना अनुप्रयोग भारत के निर्वाचन आयोग के संवैधानिक जनादेश को कमजोर करता है। उम्मीदवार के हलफनामों से जुड़े हालिया विवादों के आलोक में इस कथन का मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

June 12, 2026

GS Paper IIIndian Polity

प्रश्न की मुख्य माँग

  • कथन के पक्ष में तर्क
  • कथन के विपक्ष में तर्क
  • आगे की राह।

उत्तर

परिचय

उम्मीदवारों के हलफनामों (Affidavits) तथा नामांकन पत्रों की अस्वीकृति से जुड़े हालिया विवादों, जिनमें आपराधिक मामलों के प्रकटीकरण से संबंधित विवाद भी शामिल हैं, ने निर्वाचन प्रक्रिया में मौजूद चुनौतियों को उजागर किया है। इससे रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा निर्वाचन कानूनों को मनमाने ढंग से लागू करने तथा उनके निर्वाचन की निष्पक्षता पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।

कथन के पक्ष में तर्क

  • हलफनामों की जाँच में असंगति: रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा हलफनामों की जाँच के दौरान प्रकटीकरण संबंधी मानदंडों का असमान रूप से प्रयोग किया गया है, जिससे नामांकन पत्रों की चयनात्मक स्वीकृति या अस्वीकृति देखने को मिलती है।
    • उदाहरण: मीनाक्षी नटराजन वाद (2026) में FIR या आरोप तय न होने के बावजूद एक निजी शिकायत का उल्लेख न करने पर नामांकन निरस्त कर दिया गया।
  • असमान व्यवहार: एक ही निर्वाचन प्रक्रिया में समान प्रकार की प्रक्रियागत त्रुटियों के प्रति अलग-अलग उम्मीदवारों के साथ भिन्न व्यवहार किया गया है।
  • विस्तृत व्याख्या: कुछ मामलों में रिटर्निंग अधिकारियों ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में निर्धारित प्रावधानों से आगे बढ़कर प्रकटीकरण संबंधी आवश्यकताओं की व्याख्या की है।
    • उदाहरण: आरोप-पत्र या आरोप तय न होने वाली निजी शिकायत को भी धारा-33A की सीमाओं से परे जाकर “लंबित आपराधिक मामला” माना गया।
  • व्यक्तिपरक विवेकाधिकार: स्पष्ट परिचालन दिशा-निर्देशों के अभाव में यह तय करना कि कौन-सी जानकारी “महत्त्वपूर्ण प्रकटीकरण (Material Disclosure)” है, काफी हद तक व्यक्तिपरक बन जाता है।
  • निर्वाचन परिणामों पर प्रभाव: नामांकन पत्रों की असंगत जाँच चुनावी परिणामों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकती है, यहाँ तक कि निर्विरोध जीत जैसी स्थितियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।

कथन के विपक्ष में तर्क

  • संस्थागत सुरक्षा उपाय एवं निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश: निर्वाचन आयोग निष्पक्षता एवं तटस्थता सुनिश्चित करने के लिए आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) जारी करता है।
    • उदाहरण: रिटर्निंग अधिकारियों के लिए निर्वाचन आयोग की हैंडबुक नामांकन पत्रों की जाँच के दौरान समान व्यवहार का प्रावधान करती है।
  • मानकीकृत हलफनामा: फॉर्म-26 हलफनामा आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रकटीकरण को मानकीकृत करता है, जिससे अस्पष्टता कम होती है और समान अनुपालन सुनिश्चित होता है।
    • उदाहरण: ADR बनाम भारत संघ  मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि के पूर्ण प्रकटीकरण को अनिवार्य किया।
  • निर्वाचन आयोग का पर्यवेक्षण: रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा निर्वाचन कानूनों एवं प्रक्रियाओं के पालन को सुनिश्चित करने हेतु निर्वाचन आयोग के पास पर्यवेक्षणीय अधिकार हैं।
    • उदाहरण: नामांकन जाँच में प्रक्रियागत त्रुटियों की स्थिति में निर्वाचन आयोग पुनर्विचार या सुधार के निर्देश दे सकता है।
  • न्यायिक निगरानी: नामांकन पत्रों की मनमानी अस्वीकृति के विरुद्ध न्यायपालिका एक महत्त्वपूर्ण संवैधानिक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है।
  • प्रशिक्षण व्यवस्था: रिटर्निंग अधिकारियों को निर्वाचन आयोग की नियम-पुस्तिकाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि निर्वाचन कानूनों की व्याख्या और अनुप्रयोग में एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।

आगे की राह

  • कानूनी स्पष्टता: “लंबित आपराधिक मामला (Pending Criminal Case)” तथा प्रकटीकरण संबंधी आवश्यकताओं की स्पष्ट वैधानिक परिभाषा निर्धारित की जाए, ताकि व्यक्तिपरक व्याख्या की गुंजाइश कम हो।
  • एकरूप प्रक्रियाएँ: सभी निर्वाचन क्षेत्रों में नामांकन पत्रों की जाँच हेतु मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) लागू की जाएँ, जिससे एकरूपता सुनिश्चित हो सके।
  • क्षमता निर्माण: रिटर्निंग अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ, ताकि व्याख्यात्मक त्रुटियों को कम किया जा सके।
    • उदाहरण: निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित रिफ्रेशर कोर्स।
  • डिजिटल निगरानी: नामांकन दाखिल करने एवं सत्यापन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार किया जाए, जिससे मानवीय विवेकाधिकार कम हो तथा पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
  • सुदृढ़ समीक्षा तंत्र: चुनावों के दौरान नामांकन संबंधी विवादों के त्वरित निपटारे हेतु एक फास्ट-ट्रैक आंतरिक समीक्षा तंत्र स्थापित किया जाए।

निष्कर्ष

निर्वाचन कानूनों के निष्पक्ष एवं एकरूप अनुप्रयोग हेतु स्पष्ट कानूनी मानकों, निर्वाचन आयोग की प्रभावी निगरानी तथा पारदर्शी जाँच तंत्र को सुदृढ़ करना आवश्यक है। इससे रिटर्निंग अधिकारियों के विवेकाधिकार के मनमाने प्रयोग पर अंकुश लगेगा, निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं अखंडता सुनिश्चित होगी तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनविश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

The arbitrary application of electoral laws by Returning Officers undermines the constitutional mandate of the Election Commission of India. Evaluate this statement in light of recent controversies regarding candidate affidavits. in hindi

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