Q. अनुच्छेद 23 के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों और बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के लागू होने के बावजूद, भारत में बंधुआ मजदूरी अभी भी कायम है। इसके निरंतर अस्तित्व के कारणों पर चर्चा कीजिए और इस मुद्दे के समाधान के लिए संस्थागत सुधारों का सुझाव दीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

February 11, 2026

GS Paper IIGovernance

प्रश्न की मुख्य माँग

  • बंधुआ मजदूरी के निरंतर अस्तित्व में रहने के कारणों का उल्लेख कीजिए।
  • इसके लिए संस्थागत सुधार का सुझाव दीजिए।

उत्तर

अनुच्छेद 23 जबरन श्रम को प्रतिबंधित करता है और बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 ने कानूनी रूप से ऋण बंधन को समाप्त कर दिया। लेकिन पाँच दशक बाद भी, निर्माण, ईंट भट्टों और कृषि जैसे क्षेत्रों में बंधुआ श्रम कायम है, जो भारत के श्रम शासन ढाँचे में संवैधानिक मंशा और जमीनी स्तर पर प्रवर्तन के बीच के अंतराल को उजागर करता है।

निरंतर अस्तित्व के कारण

  • जीवन निर्वाह मजदूरी का भुगतान न होना: मजदूरी में लगातार कटौती और अग्रिम भुगतान श्रमिकों को कर्ज के चक्र में फँसा देते हैं।
  • प्रवासी श्रमिकों की संवेदनशीलता: सामाजिक नेटवर्क से दूर विस्थापित श्रमिकों को उप-ठेका (subcontracting) शृंखलाओं के माध्यम से आसानी से मजबूर किया जाता है।
  • जाति-आधारित पदानुक्रम: गहरी सामाजिक भेदभाव के कारण ‘बेगार’ जैसी पारंपरिक प्रथाएँ छद्म रूपों में जारी हैं।
    • उदा: ‘बिट्टी चाकरी’ की प्रथा दलित परिवारों को अवैतनिक वंशानुगत श्रम करने के लिए मजबूर करती है।
  • कमजोर प्रवर्तन और पक्षपात: प्रशासनिक उदासीनता और न्यायिक संदेह इस अधिनियम के कार्यान्वयन को कमजोर करते हैं।
  • तकनीकी और प्रणालीगत अपवर्जन: आधार-संबद्ध मजदूरी की विफलता और मजदूरी निगरानी तंत्र की अनुपस्थिति श्रमिकों को असुरक्षित छोड़ देती है।

संस्थागत सुधार

  • न्यूनतम मजदूरी का सीधा भुगतान सुनिश्चित करना: श्रमिकों के बैंक खातों में न्यूनतम मजदूरी का अनिवार्य डिजिटल हस्तांतरण सुनिश्चित करना।
  • पारदर्शी आपूर्ति-शृंखला निगरानी: ठेकेदार द्वारा अंतिम श्रमिक तक किए गए भुगतान का पता लगाने के लिए ब्लॉकचेन-आधारित प्रणालियों का उपयोग करना।
  • श्रम निरीक्षण को सुदृढ़ करना: श्रम सुविधा प्रदाताओं को श्रमिक संरक्षण और जवाबदेही की ओर पुनर्गठित करना।
  • सशक्त पहचान और पुनर्वास: सक्रिय बचाव अभियान, पर्याप्त मुआवज़ा तथा सामाजिक पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
  • सामाजिक समावेश के उपाय: लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से जातिगत भेदभाव और प्रवासी श्रमिकों की संवेदनशीलताओं का समाधान करना।
    • उदा: प्रवासी श्रमिकों के लिए ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ के तहत कल्याणकारी लाभों की लक्षित पोर्टेबिलिटी।

निष्कर्ष

बंधुआ मजदूरी न केवल कानूनी विफलता को दर्शाती है, बल्कि मजदूरी सुरक्षा और सामाजिक न्याय में शासन की कमियों को भी उजागर करती है। प्रवर्तन के अंतरालों को पाटकर, भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करके और नीति निर्माण के केंद्र में कमजोर वर्ग के श्रमिकों को शामिल करके ही संवैधानिक गारंटियों को जमीनी हकीकत में बदला जा सकता है और भारत के लोकतांत्रिक वादों में विश्वास बहाल किया जा सकता है।

Despite constitutional safeguards under Article 23 and the enactment of the Bonded Labour System (Abolition) Act, 1976, bonded labour continues to persist in India. Discuss the reasons for its continued existence and suggest institutional reforms to address the issue. in hindi

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