प्रश्न की मुख्य माँग
- चर्चा कीजिए कि भारत का परीक्षा-केंद्रित शिक्षा मॉडल, उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक कौशल को कैसे बाधित करता है।
- उन तरीकों पर चर्चा कीजिए, जिनसे अनुभवात्मक शिक्षा इन अंतरालों को संबोधित करती है।
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उत्तर
भारत की परीक्षा-केंद्रित शिक्षा रटने, आलोचनात्मक सोच को सीमित करने और उच्च-स्तरीय शिक्षण पर जोर देती है। यह मॉडल रचनात्मकता और व्यावहारिक ज्ञान पर कम ध्यान केंद्रित करता है। अनुभवात्मक शिक्षा, विश्लेषणात्मक और रियलटाइम दुनिया की दक्षताओं को बढ़ावा देकर समाधान प्रदान करती है ।
भारत का परीक्षा-केंद्रित शिक्षा मॉडल, उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक कौशल को कैसे बाधित करता है:
- रटने पर अत्यधिक जोर: उच्च दाँव वाली परीक्षाएँ समझने की बजाय याद करने को प्रोत्साहित करती हैं।
- उदाहरण: इस आयु वर्ग (14-18 वर्ष) के लगभग 25% बच्चे अभी भी अपनी क्षेत्रीय भाषा में कक्षा II स्तर का पाठ धाराप्रवाह ढंग से नहीं पढ़ सकते हैं।
- संकीर्ण मूल्यांकन: परीक्षा में स्मरण शक्ति और बुनियादी समझ का मूल्यांकन किया जाता है, जबकि विश्लेषण करने तथा सृजन करने की क्षमता को दरकिनार किया जाता है।
- एक ही तरीका सभी के लिए उपयुक्त: एक समान परीक्षण विभिन्न शिक्षण शैलियों और बुद्धिमत्ताओं की उपेक्षा करते हैं तथा रचनात्मक एवं व्यावहारिक प्रतिभाओं को दबा देते हैं।
- उदाहरण: दृश्य-स्थानिक या गतिज शिक्षार्थी अक्सर पाठ आधारित बोर्ड परीक्षाओं में अन्यत्र अपनी क्षमता के बावजूद खराब प्रदर्शन करते हैं।
- परीक्षा के लिए शिक्षण: कक्षा का समय खुली जाँच के बजाय परीक्षा तकनीकों और प्रश्न अभ्यास पर व्यतीत किया जाता है।
- उदाहरण: NEP 2020 के अनुसार, “अत्यधिक पाठ्यक्रम भार और परीक्षा दबाव” आलोचनात्मक सोच अभ्यास के लिए बहुत कम जगह छोड़ते हैं।
- सीमित रियल–वर्ल्ड अनुप्रयोग: छात्र शायद ही कभी परियोजनाओं या समस्या समाधान में संलग्न होते हैं, इसलिए वे ज्ञान का उपयोग नए संदर्भों में नहीं कर पाते हैं।
अनुभवात्मक अधिगम द्वारा इन अंतरालों को दूर करने के तरीके
- आलोचनात्मक चिंतन और समस्या समाधान को बढ़ावा देता है: व्यावहारिक कार्यों के लिए छात्रों को विश्लेषण, मूल्यांकन और सृजन की आवश्यकता होती है।
- उदाहरण: अनुभवात्मक मॉड्यूल वाले कक्षाओं में उच्च-क्रम चिंतन परीक्षण स्कोर में वृद्धि देखी गई।
- विविध बुद्धिमत्ता की आवश्यकता: कला, प्रयोगशाला और सिमुलेशन के माध्यम से सीखने से दृश्य, गतिज और पारस्परिक शिक्षार्थियों को शामिल किया जाता है।
- चिंतनशील अभ्यास को प्रोत्साहित करता है: अनुभव, चिंतन, संकल्पना, प्रयोग का चक्र मेटाकॉग्निटिव कौशल का निर्माण करता है।
- उदाहरण: कोल्ब चक्र का उपयोग करने वाले स्कूलों में अधिक संख्या में विद्यार्थियों ने चिंतनशील पत्रिकाओं में शिक्षण रणनीतियों को स्पष्ट किया।
- सहयोग और संचार को बढ़ावा देता है: ग्रुप प्रोजेक्ट और रोल-प्ले टीमवर्क, वार्ता और नेतृत्व क्षमताओं का विकास करते हैं।
- सैद्धांतिक और वास्तविक दुनिया के बीच सेतु: क्षेत्रीय दौरे, प्रयोगशालाएँ और सिमुलेशन छात्रों को ठोस स्थितियों में अमूर्त अवधारणाओं को लागू करने में मदद करते हैं।
- उदाहरण: दिल्ली शिक्षा निदेशालय इस वर्ष 257 सरकारी स्कूलों में कक्षा 9 और 11 के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करेगा, जिसमें IT, खुदरा, स्वास्थ्य सेवा और सौंदर्य एवं कल्याण को शामिल किया जाएगा।
अनुभवात्मक शिक्षा, आलोचनात्मक सोच और व्यावहारिक कौशल को बढ़ावा देकर पारंपरिक शिक्षा में अंतर को कम कर देती है। व्यावहारिक दृष्टिकोण और रियलटाइम की समस्या-समाधान छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार करते हैं। इस बदलाव को अपनाने से एक अधिक समग्र और अनुकूलनीय शिक्षा प्रणाली सुनिश्चित होती है।