प्रश्न की मुख्य माँग
- घरेलू विकास के मुख्य कारकों को सुदृढ़ बनाना।
- वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार करना।
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उत्तर
केंद्रीय बजट 2026-27 एक ऐसे महत्त्वपूर्ण मोड़ पर आया है, जहाँ भारत को ‘आर्थिक सुधार-आधारित विकास” से “प्रतिस्पर्द्धा-आधारित विस्तार” की ओर अग्रसर होना होगा। वैश्विक चुनौतियों और घरेलू उपभोग में असमानताओं से निपटने के लिए, बजट में उच्च गुणक वाले पूँजीगत व्यय को प्राथमिकता देनी होगी, साथ ही संरचनात्मक सुधारों तथा राजकोषीय विवेक के माध्यम से अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना होगा।
घरेलू विकास के इंजनों को मजबूत बनाना
- निजी निवेश का पुनरुद्धार: बजट में लक्षित कर प्रोत्साहन और “स्थिरता गारंटी” प्रदान की जानी चाहिए ताकि भारतीय कंपनियों को अपने रिकॉर्ड नकदी भंडार को नई परियोजनाओं में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
- उदाहरण: CII जैसे उद्योग संगठनों ने सरकार से अनुरोध किया है कि पूँजीगत लाभ कर की प्रक्रिया सरल बनाई जाए और नई विनिर्माण इकाइयों के लिए कॉरपोरेट कर दर 15% निर्धारित की जाए।
- ग्रामीण माँग का समर्थन: बड़े पैमाने पर उपभोग को बढ़ावा देने के लिए MGNREGA आवंटन बढ़ाकर और पीएम-किसान योजना के दायरे का विस्तार करके ग्रामीण आय बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना।
- उदाहरण: अर्थशास्त्रियों का सुझाव है कि वर्तमान ‘K-आकार’ उपभोग सुधार का मुकाबला करने के लिए ग्रामीण प्रयोज्य आय को बढ़ाना आवश्यक है।
- अवसंरचना विकास (पूँजीगत व्यय): लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने और बड़े पैमाने पर ब्लू-कॉलर रोजगार सृजित करने के लिए ₹11.11 लाख करोड़ के अवसंरचना प्रोत्साहन को बनाए रखना महत्त्वपूर्ण है।
- उदाहरण: गति शक्ति और राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन पर बजटीय फोकस ने पहले ही भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के लगभग 8-9% तक कम करने में मदद की है।
- एमएसएमई ऋण पहुँच: क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) को बढ़ाने से उन छोटे व्यवसायों को सुरक्षा कवच प्रदान करेगा, विशेषकर उन इकाइयों के लिए जो ब्याज दरों में बढोतरी के कारण उच्च ऋण लागत झेल रही हैं।
- उदाहरण: पीएम विश्वकर्मा योजना और OCEN के तहत डिजिटल ऋण को अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण ‘ग्रोथ इंजन” के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार
- निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता (RODTEP): RODTEP और RoSCTL योजनाओं को मजबूत करना ताकि भारतीय निर्यातकों को संरक्षणवादी वैश्विक बाजार में “निर्यात कर” न देना पड़े।
- उदाहरण: निर्यातक वियतनाम और बांग्लादेश जैसे आक्रामक विनिर्माण केंद्रों के मुकाबले प्रतिस्पर्द्धा में बने रहने के लिए उच्च छूट दरों की माँग कर रहे हैं।
- हरित ऊर्जा नेतृत्व: हरित हाइड्रोजन और अपतटीय पवन ऊर्जा के लिए एक समर्पित “हरित सब्सिडी” ढाँचा प्रदान करने से भारत, सतत ऊर्जा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
- उदाहरण: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है, जिसके लिए निरंतर बजटीय समर्थन की आवश्यकता है।
- महत्त्वपूर्ण खनिज सुरक्षा: इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति शृंखला को जोखिममुक्त करने के लिए KABIL को लीथियम और कोबाल्ट की विदेशी खदानें हासिल करने में मदद करने के लिए एक “रणनीतिक अधिग्रहण कोष” आवंटित करना।
- उदाहरण: खनिज सुरक्षा साझेदारी (MSP) में भारत के प्रवेश के लिए विदेशी संसाधन कूटनीति के लिए घरेलू राजकोषीय समर्थन की आवश्यकता है।
- वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC): उच्च स्तरीय अनुसंधान एवं विकास केंद्रों को आकर्षित करने के लिए नीतिगत प्रोत्साहन से भारत एक “बैक-ऑफिस” से विश्व स्तर की “वैश्विक प्रयोगशाला” में परिवर्तित हो जाएगा।
- उदाहरण: भारत वर्तमान में 1,600 से अधिक GCC की मेजबानी करता है, जो सेवा निर्यात और उच्च-कुशल रोजगार में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।
निष्कर्ष
बजट 2026-27 को राजकोषीय सुदृढ़ीकरण और आक्रामक विकास-उन्मुख व्यय के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए। “मेक इन इंडिया 2.0” पहल को सुदृढ़ करके और यह सुनिश्चित करके कि विकास के लाभ समाज के सबसे निचले तबके तक पहुँचें, सरकार वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत को एक मजबूत तथा विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित कर सकती है, जिससे दीर्घकालिक साझा समृद्धि सुनिश्चित हो सकेगी।
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