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Q. विश्लेषण कीजिए कि भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान उपलब्धियाँ, विशेष रूप से चंद्रयान-3 और मंगलयान जैसे मिशनों के माध्यम से, वैज्ञानिक प्रगति में मिशन-मोड दृष्टिकोण के महत्त्व को कैसे दर्शाती हैं। इस दृष्टिकोण को अन्य क्षेत्रों में कैसे बढ़ाया जा सकता है? (15 अंक, 250 शब्द)

April 17, 2025

GS Paper IIIScience & Tech

प्रश्न की मुख्य माँग

  • चंद्रयान-3 और मंगलयान वैज्ञानिक प्रगति में मिशन-मोड दृष्टिकोण के महत्त्व को कैसे दर्शाते हैं।
  • इस दृष्टिकोण को अन्य क्षेत्रों तक विस्तारित करने की राह सुझाइए।

उत्तर

चंद्रयान-3 और मंगलयान जैसे भारत के अंतरिक्ष मिशन स्पष्ट लक्ष्यों और कुशल निष्पादन के साथ मिशन-मोड दृष्टिकोण की सफलता को उजागर करते हैं। इस मॉडल ने अंतरिक्ष अनुसंधान में महत्त्वपूर्ण प्रगति को प्रेरित किया है। इसे नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य सेवा, नवीकरणीय ऊर्जा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।

चंद्रयान-3 और मंगलयान वैज्ञानिक प्रगति में मिशन-मोड दृष्टिकोण के महत्त्व को कैसे दर्शाते हैं

  • स्पष्ट लक्ष्य और परिभाषित उद्देश्य: इन मिशनों के स्पष्ट, मापनीय परिणाम थे, जिससे केंद्रित योजना और कार्यान्वयन संभव हो सका।
    • मंगलयान (मंगल परिक्रमा मिशन) का एक केंद्रित लक्ष्य था: पहले प्रयास में ही मंगल तक पहुँचने की भारत की क्षमता का प्रदर्शन करना।
    • चंद्रयान-3 का लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सटीक लैंडिंग करना था, जो वैज्ञानिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण लेकिन चुनौतीपूर्ण स्थान है।
  • किफायती नवाचार और लागत दक्षता: मंगलयान (~ 450 करोड़ रुपये) और चंद्रयान-3 अत्यधिक लागत प्रभावी थे, जिससे यह सिद्ध हुआ कि संसाधन की कमी के बावजूद स्पष्ट लक्ष्यों के साथ नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है।
  • बहुविषयक सहयोग: इंजीनियरिंग, भौतिकी, कंप्यूटर विज्ञान, पदार्थ विज्ञान और अंतरिक्ष चिकित्सा विशेषज्ञों का एकीकरण अंतर-विषयक टीमों की शक्ति को दर्शाता है।
  • मजबूत संस्थागत समन्वय: भारत को कूटनीतिक रूप से चीन से जुड़कर, रक्षा को मजबूत करके और एक स्वतंत्र विदेश नीति को बनाए रखते हुए अमेरिका तथा चीन के साथ संबंधों को संतुलित करना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: ISRO , नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) और डीप स्पेस नेटवर्क जैसी एजेंसियों ने विभागों में निर्बाध निष्पादन सुनिश्चित किया।
  • दीर्घकालिक वैज्ञानिक मूल्य: मंगलयान ने मंगल ग्रह के वायुमंडल का अध्ययन किया, जबकि चंद्रयान-3 ने चंद्र सतह की विशेषताओं को उजागर किया, जिससे मिशन-मोड परियोजनाओं के प्रारंभिक प्रभाव से परे स्थायी वैज्ञानिक मूल्य का पता चला।
  • वैश्विक मान्यता और सॉफ्ट पॉवर: इन मिशनों ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाया तथा राष्ट्र की प्रतिष्ठा बढ़ाने और STEM प्रतिभा को प्रेरित करने में विज्ञान की भूमिका को प्रदर्शित किया।
  • प्रेरणादायक और सार्वजनिक रूप से मनाया गया: इन मिशनों ने राष्ट्रव्यापी रुचि और गौरव के साथ जनता की कल्पना को आकार दिया तथा यह दर्शाया कि वैज्ञानिक प्रगति में आख्यान कितने महत्त्वपूर्ण हैं।

इस दृष्टिकोण को अन्य क्षेत्रों तक विस्तारित करने के तरीके

  • स्पष्ट और महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य: केंद्रित, परिणाम-संचालित मिशनों (जैसे- भारत के मृदा माइक्रोबायोम का मानचित्रण, स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करना) पर ध्यान देना चाहिए। विशिष्ट लक्ष्य अनुसंधान, वित्तपोषण और संस्थागत प्रयासों को प्रभावी ढंग से संरेखित करने में मदद करते हैं। 
    • उदाहरण: राष्ट्रीय सौर मिशन में वर्ष 2022 तक 100 गीगावाट सौर ऊर्जा प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है – जिससे भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भारी वृद्धि हुई है।
  • बहुविषयक सहयोग: जीव विज्ञान, इंजीनियरिंग, डेटा विज्ञान, पर्यावरण अध्ययन आदि जैसे विविध विषयों में टीमवर्क को प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि जटिल समस्याओं के लिए विशेषज्ञता के कई क्षेत्रों से एकीकृत समाधान की आवश्यकता होती है।
    • उदाहरण के लिए: COVID-19 के दौरान CoWIN प्लेटफॉर्म ने बड़े पैमाने पर वैक्सीन वितरण का प्रबंधन करने के लिए सॉफ्टवेयर इंजीनियरों, स्वास्थ्य अधिकारियों और डेटा वैज्ञानिकों को एकीकृत किया।
  • वैज्ञानिक अवसंरचना का संरक्षण: माइक्रोबियल कल्चर संग्रह, आनुवंशिक बैंक और जलवायु डेटा अभिलेखागार जैसी प्रमुख संपत्तियों को बनाए रखना और उनका उपयोग करना चाहिए। 
    • उदाहरण: भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वायरस और वैक्सीन बैंक, COVID-19 महामारी के दौरान अनुसंधान और विकास के लिए महत्त्वपूर्ण थे।
  • धैर्य और दीर्घकालिक दृष्टि: यह स्वीकार करना चाहिए कि सभी शोध त्वरित परिणाम नहीं देते हैं, सफलता पाने में अक्सर वर्षों या दशकों का समय लगता है। गहरी, सार्थक प्रगति के लिए दूरदर्शी योजना बनाना आवश्यक है।
  • वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग: साझा वैश्विक मिशनों (जैसे- जलवायु कार्रवाई) में भारत को अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करना चाहिए। मिशन-मोड की सोच सीमा-पार चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद कर सकती है।
  • मिशन क्षेत्रों के लिए विशेष संस्थान: स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि आदि में लक्षित लक्ष्यों के लिए केंद्रित एजेंसियाँ या टास्क फोर्स बनाई जानी चाहिए। उन्हें दक्षता और उद्देश्य के साथ काम करने के लिए स्वायत्तता और स्पष्ट जनादेश प्रदान‌ करना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC), वर्ष 2022 तक 500 मिलियन लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए मिशन मोड में काम करता है, जिसका लक्ष्य लोगों को नौकरी के लिए तैयार करना है।

भारत के अंतरिक्ष मिशन, स्पष्ट लक्ष्यों और कुशल निष्पादन के साथ मिशन-मोड दृष्टिकोण की सफलता को उजागर करते हैं। इस मॉडल को स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में लागू करने से नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है। यह भारत को विविध क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार करता है।

Analyze how India’s space research achievements, particularly through missions like Chandrayaan-3 and Mangalyaan, reflect the importance of a mission-mode approach in scientific progress. How can this approach be extended to other sectors? in hindi

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