प्रश्न की मुख्य माँग
- कोयला गैसीकरण की अवधारणा की व्याख्या कीजिए।
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला गैसीकरण के संभावित लाभों का विश्लेषण कीजिए।
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला गैसीकरण से संबंधित चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
- भारत में कोयला गैसीकरण योजना को अपनाने को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
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उत्तर
कोयला गैसीकरण ऑक्सीजन और भाप के साथ अभिक्रिया के माध्यम से कोयले को सिनगैस (हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड) में परिवर्तित करता है। यह तकनीक कोयले का विकल्प प्रदान करती है, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करती है और ऊर्जा दक्षता को बढ़ाती है। दुनिया के चौथे सबसे बड़े कोयला भंडार वाले भारत में कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा की कुंजी के रूप में देखा जाता है। कोयला गैसीकरण योजना का उद्देश्य इस तकनीक को बढ़ावा देना है, जिससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम हो।
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कोयला गैसीकरण की अवधारणा
- कोयला गैसीकरण प्रक्रिया: कोयला गैसीकरण एक रासायनिक प्रक्रिया है जो उच्च तापमान पर ऑक्सीजन और भाप के साथ अभिक्रिया करके कोयले को सिनगैस ( हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड का मिश्रण ) में परिवर्तित करती है।
- उदाहरण के लिए: ओडिशा में तालचेर उर्वरक संयंत्र जैसी भारत की प्रमुख कोल-टू-गैस परियोजनाएँ सिंथेटिक प्राकृतिक गैस का उत्पादन करने के लिए इस प्रक्रिया का उपयोग करती हैं।
- सिंथेटिक गैस उत्पादन: कोयला गैसीकरण का प्राथमिक उत्पाद सिंथेटिक गैस है, जिसका उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए और उर्वरकों व पेट्रोकेमिकल्स जैसे उद्योगों के लिए रासायनिक फीडस्टॉक के रूप में किया जा सकता है।
- उदाहरण के लिए: फरीदाबाद में कोयला गैसीकरण आधारित संयंत्र, सिंथेटिक गैस को उर्वरक निर्माण के लिए अमोनिया में परिवर्तित करता है, जिससे आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम हो जाती है।
- स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: कोयला गैसीकरण हाइड्रोजन और सिंथेटिक प्राकृतिक गैस जैसे स्वच्छ ईंधन का उत्पादन करके पारंपरिक कोयला दहन के पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने में मदद करता है।
- उदाहरण के लिए: भारत सरकार ने वर्ष 2030 के लिए अपने स्वच्छ ऊर्जा रोडमैप के हिस्से के रूप में कोयला गैसीकरण के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए हैं।
- कार्बन कैप्चर क्षमता: कोयला गैसीकरण की एक प्रमुख विशेषता कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (CCS) तकनीक के साथ इसकी अनुकूलता है, जो कोयला आधारित विद्युत उत्पादन से जुड़े कार्बन उत्सर्जन को कम करती है।
- उदाहरण के लिए: झारखंड में झरिया कोयला गैसीकरण परियोजना कोयला गैसीकरण से कम कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित करने के लिए CCS का प्रयोग किया जाता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला गैसीकरण के संभावित लाभ
- घरेलू संसाधन उपयोग: कोयला गैसीकरण भारत को अपने विशाल घरेलू कोयला भंडार का पूरा लाभ उठाने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे आयात पर अत्यधिक निर्भरता के बिना ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- उदाहरण के लिए: भारत के पास दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा कोयला भंडार है, और गैसीकरण ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके तेल और प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता को कम करने में मदद कर सकता है।
- आयात पर निर्भरता में कमी: कोयला गैसीकरण सिंथेटिक गैस जैसे स्वच्छ ईंधन के उत्पादन के लिए घरेलू विकल्प उपलब्ध कराकर आयातित प्राकृतिक गैस और तेल पर भारत की निर्भरता को कम करता है।
- ऊर्जा विविधीकरण: कोयला गैसीकरण को अपनाने से भारत के ऊर्जा मिश्रण में विविधता आएगी, जिसमें पारंपरिक और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का मिश्रण शामिल होगा, जो आपूर्ति में व्यवधानों के प्रति प्रत्यास्थता बढ़ाएगा।
- उदाहरण के लिए: कोयला गैसीकरण योजना की शुरूआत से भारत को सिंथेटिक प्राकृतिक गैस का उत्पादन करने में मदद मिलेगी, जो सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के लिए एक पूरक ऊर्जा स्रोत हो सकता है।
- प्रौद्योकीय उन्नति: कोयला गैसीकरण, हाइड्रोजन उत्पादन और कार्बन कैप्चर सहित अन्य हाई-टेक उद्योगों के विकास को बढ़ावा देता है, जो ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करता है।
- उदाहरण के लिए: राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष के तहत कोल-टू-हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय फर्मों के साथ भारत का चल रहा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा को आगे बढ़ाने में इसकी भूमिका को दर्शाता है।
- पर्यावरणीय लाभ: कोयला अभी भी एक प्रमुख ऊर्जा स्रोत बना हुआ है, परंतु गैसीकरण कार्बन कैप्चर को सक्षम करके इसके पर्यावरणीय प्रभाव को कम करता है, जिससे उत्सर्जन कम होता है और भारत के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है।
- उदाहरण के लिए: NTPC के तालचेर संयंत्र की गैसीकरण प्रक्रिया से CO2 को कैप्चर करने और संग्रहीत करने की पहल से कार्बन उत्सर्जन में अनुमानित 30% की कमी आई है, जिससे भारत को अपनी COP26 प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद मिली है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला गैसीकरण से जुड़ी चुनौतियाँ
- उच्च आरंभिक निवेश: कोयला गैसीकरण के लिए संयंत्र की स्थापना और बुनियादी ढाँचे हेतु पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता होती है, जिससे यह एक महंगा उपक्रम बन जाता है, विशेष रूप से भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था में।
- तकनीकी जटिलता: कोयला गैसीकरण में परिष्कृत तकनीक और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जो भारत में सुगमता से उपलब्ध नहीं हो सकती है, जिससे परिचालन अक्षमता उत्पन्न होती है और विदेशी तकनीक पर निर्भरता बढ़ जाती है।
उदाहरण के लिए: घरेलू तकनीकी क्षमताओं की कमी के कारण, तमिलनाडु में भारत का पहला कोयला गैसीकरण संयंत्र विदेशी कंपनियों के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है।
- पर्यावरण संबंधी चिंताएँ: हालाँकि कोयला गैसीकरण से कुछ उत्सर्जन कम हो जाता है, फिर भी इससे ग्रीनहाउस गैसों (GHG) का उत्सर्जन होता है, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों को दरकिनार करता है।
- उदाहरण के लिए: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीन एनर्जी (NICE) द्वारा किए गए अध्ययनों से पता चलता है, कि कोयला गैसीकरण से काफी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित हो सकती है, जो पेरिस समझौते के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के संदर्भ में चिंता का विषय है।
- संसाधन उपलब्धता: गैसीकरण के लिए प्राथमिक फीडस्टॉक कोयले की उपलब्धता में कमी के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर कोयला गैसीकरण की व्यवहार्यता प्रभावित होती है।
- उदाहरण के लिए: कोयला नियंत्रक संगठन के अनुसार, भारत के निम्न-श्रेणी के कोयले के भंडार कम होते जा रहे हैं, जिससे गैसीकरण संयंत्रों के लिए निरंतर कोयला प्राप्त करना मुश्किल हो रहा है।
- आर्थिक व्यवहार्यता: सौर और पवन जैसे वैकल्पिक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की तुलना में कोयला गैसीकरण एक महंगी प्रौद्योगिकी बनी हुई है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा के लिए इसे अपनाना, अधिक तर्कसंगत नहीं रह जाता है।
- उदाहरण के लिए: इसकी तुलना में, भारत की सौर ऊर्जा उत्पादन लागत घटकर ₹2.5 प्रति यूनिट रह गई है, जिससे कोयला गैसीकरण आर्थिक रूप से कम आकर्षक हो गया है।
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भारत में कोयला गैसीकरण योजना को अपनाने में इसकी भूमिका
- वित्तीय प्रोत्साहन: कोयला गैसीकरण योजना इस प्रौद्योगिकी को अपनाने वाली कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिससे यह आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो जाती है और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा मिलता है।
- उदाहरण के लिए: सरकार ने कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और ऊर्जा क्षेत्र में इसके विस्तार के लिए इस योजना के तहत ₹50,000 करोड़ आवंटित किए हैं।
- सरकार-उद्योग सहयोग: यह योजना सरकार और निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच सहयोग को सुगम बनाती है, जिससे कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी में बुनियादी ढाँचे और अनुसंधान के विकास को बढ़ावा मिलता है।
- उदाहरण के लिए: तालचेर उर्वरक संयंत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, कोयला गैसीकरण योजना का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिससे दक्षता में सुधार होता है और लागत में कमी आती है।
- नीतिगत समर्थन: इस योजना के तहत सरकार का नीतिगत ढांचा, कोयला गैसीकरण के पैमाने को बढ़ाने में मदद करता है, जिसमें कर छूट, बुनियादी ढाँचे का विकास और विनियामक सुधार शामिल हैं।
- उदाहरण के लिए: इस योजना के तहत राष्ट्रीय गैस ग्रिड नीति और कोयला गैसीकरण-विशिष्ट सब्सिडी की शुरूआत से 2030 तक बड़े पैमाने पर इसे अपनाने की उम्मीद है।
- अनुसंधान एवं विकास के लिए संसाधन आवंटन: यह योजना उन्नत कोयला प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देती है, जिससे अगली पीढ़ी के गैसीकरण संयंत्रों के विकास में तेजी आती है।
- उदाहरण के लिए: कोयला मंत्रालय के अंतर्गत कोयला प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान केंद्र कोयला गैसीकरण दक्षता में सुधार के लिए कार्य कर रहा है, जिसे योजना के अनुसंधान अनुदानों से सहायता मिल रही है।
- पर्यावरण अनुपालन और स्थिरता: यह योजना कार्बन कैप्चर और स्वच्छ ईंधन का उपयोग करके पर्यावरणीय लक्ष्यों को एकीकृत करती है, जिससे संधारणीय ऊर्जा प्रथाओं को बढ़ावा मिलता है।
- उदाहरण के लिए: कोयला गैसीकरण योजना में सख्त कार्बन उत्सर्जन दिशा-निर्देश शामिल हैं, जो कार्बन कैप्चर प्रौद्योगिकियों को अपनाने को प्रोत्साहित करते हैं, जैसा कि झरिया कोयला गैसीकरण परियोजना में देखा गया है ।
कोयला गैसीकरण स्वच्छ कोयला उपयोग को सक्षम करके, उत्सर्जन को कम करके और हाइड्रोजन जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों का उत्पादन करके भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाता है। कोयला गैसीकरण योजना, गैसीकरण संयंत्रों के विकास को प्रोत्साहित करने पर अपने फोकस के साथ, इस प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।हालांकि, उच्च निवेश लागत और तकनीकी जटिलताओं जैसी चुनौतियों को दूर किया जाना आवश्यक है। रणनीतिक सहायता के साथ, कोयला गैसीकरण भारत के ऊर्जा मिश्रण को बढ़ा सकता है और कोयला आधारित विद्युत उत्पादन के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए दीर्घकालिक संधारणीयता सुनिश्चित कर सकता है।
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