प्रश्न की मुख्य माँग
- उच्च रक्षा संगठन में ऐतिहासिक सुधार के रूप में CDS की चर्चा कीजिए।
- CDS नियुक्ति प्रक्रिया में बार-बार उत्पन्न होने वाली विसंगतियों को रेखांकित कीजिए।
- थिएटर कमांड के कार्यान्वयन में विलंब एवं उसके प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
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उत्तर
कारगिल समीक्षा समिति एवं नरेश चंद्र टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद वर्ष 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद सृजित किया गया। इसका उद्देश्य भारत के उच्च रक्षा प्रबंधन में संयुक्तता, एकीकृत योजना निर्माण तथा नागरिक–सैन्य समन्वय को सुदृढ़ करना था।
उच्च रक्षा संगठन में ऐतिहासिक सुधार के रूप में CDS
- संयुक्तता को बढ़ावा: CDS सेना, नौसेना और वायुसेना की योजना निर्माण प्रक्रिया को एकीकृत करता है, जिससे एकीकृत सैन्य रणनीति को बढ़ावा मिलता है।
- उदाहरण: त्रि-सेवा समन्वय के लिए वर्ष 2020 में CDS के अधीन सैन्य कार्य विभाग का गठन किया गया।
- एकीकृत सैन्य सलाह: CDS राजनीतिक नेतृत्व को एकल सैन्य सलाह प्रदान करता है, जबकि पूर्व में अलग-अलग सेवा प्रमुख खंडित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते थे।
- संसाधनों का अनुकूलन: यह रक्षा खरीद में दोहराव को कम करने तथा प्राथमिकता आधारित अधिग्रहण के माध्यम से रक्षा व्यय की दक्षता बढ़ाने में सहायता करता है।
- उदाहरण: CDS के अंतर्गत साझा लॉजिस्टिक्स एवं संयुक्त खरीद अनावश्यक पूँजीगत व्यय को कम करते हैं।
- थिएटर कमांड: CDS विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत युद्ध संचालन हेतु थिएटर कमांड की स्थापना को गति प्रदान करता है।
- उदाहरण: जनरल बिपिन रावत के नेतृत्व में समुद्री थिएटर कमांड एवं एयर डिफेंस कमांड के प्रस्ताव प्रारंभ किए गए।
- नागरिक–सैन्य समन्वय: यह रणनीतिक निर्णय-निर्माण में सैन्य नेतृत्व एवं नागरिक नौकरशाही के बीच संस्थागत समन्वय को सुदृढ़ करता है।
- उदाहरण: CDS रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करता है।
CDS नियुक्ति प्रक्रिया में बार-बार उत्पन्न होने वाली विसंगतियाँ
- निश्चित मानदंडों का अभाव: स्पष्ट संस्थागत मानकों की कमी के कारण CDS की नियुक्ति एवं उत्तराधिकार प्रक्रिया में अस्पष्टता बनी रहती है।
- उदाहरण: वर्ष 2022 में सेवा नियमों में संशोधन कर 62 वर्ष से कम आयु के सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी पात्र बनाया गया।
- पद रिक्त रहने की स्थिति: जनरल बिपिन रावत की मृत्यु के बाद लंबे समय तक पद रिक्त रहने से सुधारों की गति एवं रणनीतिक निरंतरता प्रभावित हुई।
- नियमों में बार-बार परिवर्तन: कार्यपालिका द्वारा नियमों में लगातार संशोधन किए जाने से संस्थागत स्थिरता के बजाय तदर्थवाद की आशंका उत्पन्न होती है।
- उदाहरण: जनरल अनिल चौहान की नियुक्ति से पूर्व सेवा नियमों में संशोधन किया गया।
- धारणा संबंधी समस्याएँ: अपारदर्शी चयन प्रक्रिया पक्षपात की धारणा उत्पन्न कर सकती है तथा सेनाओं के मनोबल को प्रभावित कर सकती है।
- उदाहरण: पारदर्शी वरिष्ठता-आधारित परंपराओं के अभाव में विभिन्न सेनाओं के बीच अटकलें उत्पन्न हुईं।
- सुधारों में व्यवधान: नेतृत्व संबंधी अनिश्चितता दीर्घकालिक संरचनात्मक रक्षा सुधारों की गति को धीमा कर देती है, जिनके लिए निरंतर संस्थागत प्रयास आवश्यक होते हैं।
थिएटर कमांड के कार्यान्वयन में विलंब एवं उसके प्रभाव
- अंतर-सेवा मतभेद: कमान संरचना एवं परिचालन नियंत्रण को लेकर विभिन्न सेनाओं के मध्य मतभेद सहमति निर्माण में विलंब उत्पन्न करते हैं।
- उदाहरण: भारतीय वायुसेना ने सीमित वायु संसाधनों के विभाजन को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
- संरचनात्मक प्रतिरोध: पारंपरिक सेवा-विशिष्ट कमान संस्कृति एकीकृत थिएटर संचालन की ओर संक्रमण का विरोध करती है।
- समय-सीमा का अभाव: कार्यान्वयन के लिए औपचारिक रोडमैप की अनुपस्थिति सुधारों के क्रियान्वयन में देरी का कारण बनती है।
- उदाहरण: वर्ष 2020 से लगातार घोषणाओं के बावजूद अब तक कोई अंतिम अधिसूचित समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
- रणनीतिक लागत: एकीकरण में देरी दो-मोर्चीय सुरक्षा चुनौतियों के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को कमजोर करती है।
- उदाहरण: चीन सीमा तनाव एवं हिंद महासागर सुरक्षा चुनौतियाँ निर्बाध संयुक्त सैन्य संचालन की माँग करती हैं।
- वैश्विक तुलना: प्रमुख शक्तियाँ पहले से ही थिएटर कमांड प्रणाली संचालित कर रही हैं, जिससे सैन्य आधुनिकीकरण में भारत की पिछड़ापन स्पष्ट होता है।
- उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका एवं चीन ने एकीकृत थिएटर कमांड स्थापित कर रखे हैं।
निष्कर्ष
CDS सुधार को केवल प्रतीकात्मकता तक सीमित न रहकर संस्थागत निश्चितता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। पारदर्शी नियुक्तियाँ एवं समयबद्ध थिएटर कमांड कार्यान्वयन भारत के उच्च रक्षा संगठन को आधुनिक एवं एकीकृत राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना में परिवर्तित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।