प्रश्न की मुख्य माँग
- भारतीय वैज्ञानिक सेवा (ISS) की आवश्यकता – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के संदर्भ में
- भारतीय वैज्ञानिक सेवा (ISS) की आवश्यकता – पर्यावरण के संदर्भ में
- आगे की राह।
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उत्तर
भारत का प्रशासनिक ढाँचा स्वतंत्रता के बाद एकता और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सामान्य सिविल सेवकों के इर्द-गिर्द बनाया गया था। हालाँकि, आज शासन तेजी से जटिल वैज्ञानिक, तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियों से आकार ले रहा है। यह परिवर्तन साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को गहरा करने के लिए एक भारतीय वैज्ञानिक सेवा (ISS) के माध्यम से संस्थागत वैज्ञानिक विशेषज्ञता को आवश्यक बनाता है।
भारतीय वैज्ञानिक सेवा (ISS) की आवश्यकता – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के संदर्भ में
- नीति एवं विज्ञान के बीच के अंतराल को पाटना: सामान्य प्रशासकों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जैव प्रौद्योगिकी या क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में विषयगत गहराई की कमी हो सकती है।
- उदाहरण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नियमन के लिए एल्गोरिथम पक्षपात, डेटा सुरक्षा और नैतिक सुरक्षा उपायों के तकनीकी मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।
- प्रौद्योगिकी शासन को सुदृढ़ करना: समर्पित वैज्ञानिक कैडर अत्याधुनिक क्षेत्रों के लिए मानक, नियामक ढाँचे और जोखिम मूल्यांकन तैयार कर सकते हैं।
- उदाहरण: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के कार्यान्वयन के लिए साइबर सुरक्षा और एन्क्रिप्शन विशेषज्ञता की माँग होती है।
- साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने का संस्थागतकरण: ISS यह सुनिश्चित कर सकता है कि नीति निर्माण सहकर्मी-समीक्षित (Peer-reviewed) अनुसंधान और डेटा मॉडलिंग पर आधारित हो।
- उदाहरण: महामारी प्रतिक्रिया रणनीतियों के लिए महामारी विज्ञान मॉडलिंग और जीनोमिक निगरानी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
- उभरते क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीतिक योजना: वैज्ञानिक चुनौतियों के लिए प्रतिक्रियात्मक नियमन के बजाय अग्रिम शासन की आवश्यकता होती है।
- उदाहरण: भारत के सेमीकंडक्टर मिशन और अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों के लिए निरंतर वैज्ञानिक निरीक्षण की माँग है।
- शासन में वैज्ञानिकों के लिए पेशेवर कॅरियर पथ: स्पष्ट प्रगति, प्रशिक्षण और सुरक्षा उपायों वाला एक संरचित कैडर उच्च गुणवत्ता वाले शोधकर्ताओं को नीति निर्माण की ओर आकर्षित करेगा।
भारतीय वैज्ञानिक सेवा (ISS) की आवश्यकता – पर्यावरण के संदर्भ में
- जलवायु नीति निर्धारण और कार्यान्वयन: जलवायु परिवर्तन नीति के लिए कार्बन बजट और न्यूनीकरण मार्गों के वैज्ञानिक मॉडलिंग की आवश्यकता होती है।
- उदाहरण: नेट-जीरो प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने के लिए एकीकृत मूल्यांकन मॉडल और क्षेत्रीय विकार्बनीकरण रणनीतियों की आवश्यकता है।
- आपदा जोखिम न्यूनीकरण और पूर्व चेतावनी प्रणाली: पर्यावरण शासन में चरम मौसम की घटनाओं और जोखिम मानचित्रण की भूमिका बढ़ती जा रही है।
- उदाहरण: बाढ़ के पूर्वानुमान और चक्रवात की भविष्यवाणी के लिए मौसम संबंधी और जल विज्ञान विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
- जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन: विकास एवं संरक्षण के बीच संतुलन बनाने में वैज्ञानिक मूल्यांकन अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- उदाहरण: मेगा बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी हेतु पारिस्थितिकी प्रभाव आकलन की आवश्यकता होती है।
- सतत् संसाधन शासन: जल, मृदा और वन प्रबंधन के लिए प्रशासनिक समन्वय से परे तकनीकी ज्ञान की माँग होती है।
- उदाहरण: भूजल की कमी के प्रबंधन के लिए जल-भूवैज्ञानिक मानचित्रण और जलभृत मॉडलिंग की आवश्यकता होती है।
- पर्यावरण विज्ञान को आर्थिक नीति में शामिल करना: हरित संक्रमण के लिए बजट और औद्योगिक योजना में वैज्ञानिक इनपुट की माँग होती है।
आगे की राह
- ISS को अखिल भारतीय सेवा के रूप में स्थापित करना: मौजूदा सेवाओं के समानांतर एक संवैधानिक रूप से समर्थित वैज्ञानिक कैडर बनाना।
- उदाहरण: विशिष्ट परीक्षाओं के माध्यम से भर्ती और विषय विशेषज्ञों का पार्श्व प्रवेश ।
- संरचित प्रशिक्षण और भूमिका संरेखण: वैज्ञानिकों के लिए शासन-उन्मुख प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करना।
- मंत्रालयों में अंतःविषय नीति प्रकोष्ठ: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पर्यावरण से संबंधित मंत्रालयों में ISS अधिकारियों को शामिल करना।
- स्पष्ट अधिकार और व्यावसायिक सुरक्षा उपाय: निर्णय लेने की शक्तियों को परिभाषित करना और साक्ष्य-आधारित सलाह के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- उदाहरण: स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा बोर्डों को संस्थागत बनाना।
- मौजूदा सिविल सेवाओं के साथ समन्वय: पदानुक्रमित संघर्ष के बजाय सहयोगात्मक कामकाज को बढ़ावा देना।
- उदाहरण: प्रौद्योगिकी और जलवायु मिशनों के लिए IAS और ISS अधिकारियों के संयुक्त कार्य बल।
निष्कर्ष
चूँकि शासन अब विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरणीय वास्तविकताओं से अविभाज्य होता जा रहा है, इसलिए केवल सामान्य प्रशासन पर निर्भर रहने से नीतिगत अंतराल का जोखिम बना रहता है। एक भारतीय वैज्ञानिक सेवा (ISS) विषयगत विशेषज्ञता को संस्थागत बनाएगी, शासन कला के अंतर्गत वैज्ञानिक तर्क को शामिल करेगी और एक जटिल भविष्य के लिए लचीली और साक्ष्य-संचालित नीतियाँ बनाने की भारत की क्षमता को मजबूत करेगी।
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