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Q. नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि में महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ प्राप्त करने के बावजूद, भारत का विद्युत ग्रिड बाहरी संकटों और आंतरिक अक्षमताओं के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। भारत के विद्युत परिवर्तन में संरचनात्मक चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और एक विश्वसनीय, सतत संचालित स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को प्राप्त करने के उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

May 5, 2026

GS Paper IIIEnvironment & Ecology

प्रश्न की मुख्य माँग

  • बताइए कि नवीकरणीय ऊर्जा की वृद्धि के बावजूद विश्वसनीय बिजली आपूर्ति क्यों सुनिश्चित नहीं हो पाई।
  • भारत के ऊर्जा संक्रमण में मौजूद संरचनात्मक चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
  • 24×7 स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा प्रणाली के लिए आवश्यक उपाय सुझाइए।

उत्तर

भारत ने 250 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म स्थापित क्षमता हासिल कर ली है, फिर भी 24×7 विश्वसनीय स्वच्छ बिजली आपूर्ति एक चुनौती बनी हुई है। आज समस्या केवल क्षमता बढ़ाने की नहीं, बल्कि लचीलापन, स्थिरता और कुशल बिजली वितरण प्रणाली विकसित करने की है।

नवीकरणीय ऊर्जा वृद्धि के बावजूद विश्वसनीय बिजली आपूर्ति क्यों नहीं सुनिश्चित हो पाई

  • कम वास्तविक उत्पादन: स्थापित नवीकरणीय क्षमता अधिक होने का अर्थ यह नहीं कि उतनी ही बिजली उत्पन्न हो, क्योंकि सौर और पवन ऊर्जा अनियमित तथा मौसमी होती हैं।
    • उदाहरण: गैर-जीवाश्म स्रोत कुल स्थापित क्षमता का लगभग आधा हैं, लेकिन वास्तविक बिजली उत्पादन में उनका योगदान केवल लगभग एक-चौथाई है।
  • दिन के समय निर्भरता: सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन में चरम पर होता है, जबकि बिजली की माँग अक्सर शाम को बढ़ती है, जिससे आपूर्ति-माँग में असंतुलन पैदा होता है।
  • ग्रिड कटौती: ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमजोरी के कारण अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता और वह व्यर्थ चली जाती है।
  • भंडारण की कमी: पर्याप्त बैटरी और पंप्ड स्टोरेज के अभाव में नवीकरणीय ऊर्जा को आवश्यकतानुसार उपयोग नहीं किया जा सकता, जिससे तापीय ऊर्जा पर निर्भरता बनी रहती है।
    • उदाहरण: ₹2–3 प्रति यूनिट की सस्ती सौर ऊर्जा भी स्टोरेज के बिना 24×7 आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कर सकती है।
  • डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति: वित्तीय रूप से कमजोर डिस्कॉम, नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद, वितरण और एकीकरण को प्रभावी ढंग से नहीं कर पाते हैं।
    • उदाहरण: डिस्कॉम का कुल घाटा लगभग ₹1 लाख करोड़ बना हुआ है, जो आपूर्ति की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।

भारत के ऊर्जा संक्रमण में संरचनात्मक चुनौतियाँ 

  • कोयला-आधारित ग्रिड: भारत का बिजली ग्रिड मूल रूप से केंद्रीकृत कोयला संयंत्रों के लिए डिजाइन किया गया था, न कि विकेंद्रीकृत और परिवर्तनशील नवीकरणीय स्रोतों के लिए।
    • उदाहरण: छत्तीसगढ़ जैसे कोयला-आधारित राज्य, अन्य क्षेत्रों में नवीकरणीय विस्तार के बावजूद, बढ़ती माँग का सामना कर रहे हैं।
  • अंतर-राज्यीय बनाम अंतःराज्यीय अंतराल: अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन में सुधार हुआ है, लेकिन राज्य के भीतर सबस्टेशन और अंतिम मील नेटवर्क अभी भी नवीकरणीय ऊर्जा को समाहित करने के लिए कमजोर हैं।
  • बाजार संरचना: वर्तमान बिजली बाजार केवल ऊर्जा इकाइयों को महत्त्व देता है, जबकि नवीकरणीय स्थिरता के लिए आवश्यक क्षमता उपलब्धता और सिस्टम लचीलापन को पर्याप्त महत्त्व नहीं दिया जाता है।
    • उदाहरण: ब्रिटेन के कैपेसिटी मार्केट के विपरीत, भारत में बैकअप उपलब्धता और सहायक सेवाओं के लिए मजबूत मूल्य निर्धारण नहीं है।
  • लचीलेपन की कमी: स्टोरेज, लचीले उत्पादन और माँग प्रतिक्रिया के लिए पर्याप्त आर्थिक प्रोत्साहन नहीं हैं, जिससे संतुलन प्रणाली में निजी निवेश धीमा रहता है।
    • उदाहरण: स्पष्ट बाजार प्रोत्साहनों के अभाव में बैटरी स्टोरेज में निवेश अनिश्चित बना हुआ है।
  • वितरण संकट: क्रॉस-सब्सिडी और अक्षम टैरिफ संरचना डिस्कॉम को वित्तीय रूप से कमजोर बनाए रखती है और वास्तविक बिजली कीमतों को विकृत करती है।
    • उदाहरण: औद्योगिक उपभोक्ता लगभग लागत-आधारित दरें चुकाते हैं, जबकि कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं को भारी सब्सिडी मिलती है।

24×7 विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा के लिए उपाय

  • मजबूत ग्रिड: राज्य के भीतर सबस्टेशन, फीडर अपग्रेड और ट्रांसमिशन नेटवर्क को सुदृढ़ किया जाए, ताकि नवीकरणीय ऊर्जा का कुशल प्रवाह सुनिश्चित हो सके।
  • भंडारण पर जोर: बैटरी स्टोरेज, पंप हाइड्रो और हाइब्रिड नवीकरणीय परियोजनाओं का विस्तार किया जाए ताकि सौर समय के बाद भी निरंतर बिजली आपूर्ति बनी रहे।
    • उदाहरण: पीएम-कुसुम और पंप स्टोरेज परियोजनाएँ प्रषण योग्य नवीकरणीय ऊर्जा को समर्थन दे सकती हैं।
  • बाजार सुधार: ऊर्जा, क्षमता और लचीलेपन के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण किया जाए, ताकि विश्वसनीयता को प्रोत्साहन मिले और भंडारण में निवेश बढ़े।
    • उदाहरण: यू.के. और अमेरिका के पीजेएम मॉडल में उच्च स्तर की उपलब्धता और सहायक सेवाओं के लिए अलग से मूल्य तय किया जाता है।
  • डिस्कॉम सुधार: फीडर पृथक्करण, पारदर्शी सब्सिडी और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से घाटे कम किए जाएँ और वितरण दक्षता बढ़ाई जाए।
    • उदाहरण: महाराष्ट्र का फीडर पृथक्करण मॉडल संचालन दक्षता में सुधार लाया है।
  • कृषि सौरीकरण: कृषि फीडरों का सौरीकरण कर दिन के समय विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराई जाए और डिस्कॉम पर सब्सिडी का बोझ कम किया जाए।

निष्कर्ष

भारत का ऊर्जा संक्रमण केवल मेगावाट क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसे विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। जब उत्पादन, ग्रिड, बाजार संरचना और डिस्कॉम सुधार एक साथ काम करेंगे, तभी नवीकरणीय ऊर्जा वास्तव में सुदृढ़, सस्ती और भरोसेमंद बन सकेगी।

Despite achieving significant milestones in renewable energy capacity addition, India’s power grid remains vulnerable to external shocks and internal inefficiencies. Critically analyze the structural challenges in India’s power transition and suggest measures for achieving a reliable, round-the-clock clean energy ecosystem. in hindi

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