Q. एक मजबूत विमानन क्षेत्र और विनियामक ढाँचे के बावजूद, भारत को लगातार विमानन सुरक्षा संबंधी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय विमानन सुरक्षा में चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आवश्यक व्यापक सुधारों का सुझाव दीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • विमानन क्षेत्र की मजबूती और नियामक ढाँचे पर प्रकाश डालिये।
  • चर्चा कीजिए कि किस प्रकार भारत को विमानन सुरक्षा संबंधी घटनाओं की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आवश्यक व्यापक सुधारों का सुझाव दीजिए।

उत्तर

भारत का विमानन क्षेत्र, जो विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है, आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है । नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के तहत एक मजबूत नियामक ढाँचे के बावजूद , कोझिकोड (2020) में एयर इंडिया एक्सप्रेस दुर्घटना जैसी बार-बार होने वाली घटनाएं विमानन सुरक्षा में प्रणालीगत चुनौतियों को उजागर करती हैं। अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बिठाने और यात्रियों का भरोसा सुनिश्चित करने के लिए इन मुद्दों का समाधान करना महत्त्वपूर्ण है।

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भारतीय विमानन क्षेत्र की मजबूती और नियामक ढांचा

  • बढ़ता विमानन क्षेत्र: भारत का विमानन बाज़ार दुनिया भर में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले बाज़ारों में से एक है, जहाँ हवाई यात्रियों की संख्या बढ़ रही है और हवाई अड्डे के बुनियादी ढाँचे का विस्तार हो रहा है। 
    • उदाहरण के लिए: दिल्ली के टर्मिनल 3 और बैंगलोर के केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसे आधुनिक हवाई अड्डों का निर्माण, मज़बूत बुनियादी ढाँचे के विकास को दर्शाता है।
  • DGCA निरीक्षण: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, ऑपरेटरों और विमानों के लिए सुरक्षा अनुपालन और प्रमाणन सुनिश्चित करता है। 
    • उदाहरण के लिए: DGCA की वार्षिक सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट एयरलाइनों और हवाई अड्डों के परिचालन मानकों का मूल्यांकन करती है।
  • ICAO का अनुपालन: भारत ICAO अनुलग्नक 13 का हस्ताक्षरकर्ता है , जो दुर्घटनाओं की जाँच और वैश्विक सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुपालन को सुनिश्चित करता है। 
    • उदाहरण के लिए: कोझिकोड दुर्घटना (2020) के बाद , DGCA ने ICAO-अनुपालन सुरक्षा ऑडिट किया और सुधारात्मक दिशा-निर्देश जारी किए।
  • एयरलाइन विस्तार: प्रमुख भारतीय एयरलाइन्स ने अपने बेड़े का विस्तार किया है और सुरक्षा व दक्षता बढ़ाने के लिए उन्नत सुरक्षा सुविधाओं वाले आधुनिक विमानों को अपनाया है।
    •  उदाहरण के लिए: इंडिगो एयरलाइंस एयरबस A320neo का संचालन करती है , जो ईंधन दक्षता और सुरक्षा उन्नयन के लिए जानी जाती है।
  • नागरिक उड्डयन नीति: वर्ष 2016 की राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति विकास, क्षेत्रीय संपर्क और विमानन बुनियादी ढाँचे में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
    • उदाहरण के लिए: UDAN योजना ने सब्सिडी और प्रोत्साहन के माध्यम से क्षेत्रीय हवाई यात्रा को सुलभ बनाया।

बार-बार होने वाली विमानन सुरक्षा दुर्घटनाओं की चुनौतियाँ

  • रनवे कन्फ्यूजन : पायलटों को अक्सर टैक्सीवे और रनवे के बीच अंतर करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण वे गलत सतहों पर टेकऑफ़ या लैंडिंग कर जाते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: मोपा घटना (2024) और सुलूर एयर बेस घटना (1993) ,बार-बार रनवे कन्फ्यूजन की घटना को उजागर करती है।
  • थकान और ड्यूटी लिमिट्स : उड़ान और ड्यूटी टाइम विनियमों के अपर्याप्त कार्यान्वयन से चालक दल को थकान का सामना करना पड़ता है , जिससे निर्णय लेने और परिचालन सुरक्षा से समझौता होता है। 
    • उदाहरण के लिए: कोझिकोड दुर्घटना में यह पाया गया कि पायलट के ऊपर आगे की फ्लाइट संचालन हेतु अत्यधिक दबाव था।
  • असंगत प्रशिक्षण मानक : एयरलाइंस, रनवे मार्किंग और एप्रोच प्रोटोकॉल पर पर्याप्त पायलट प्रशिक्षण प्रदान करने में विफल रहती हैं, जिसके कारण बार-बार गलतियाँ होती हैं। 
    • उदाहरण के लिए: स्पाइसजेट विमान (2020) को रनवे एप्रोच तकनीकों के अनुचित ज्ञान के कारण हार्ड टचडाउन की समस्या का सामना करना पड़ा।
  • खराब सुरक्षा ऑडिट : DGCA ऑडिट अक्सर हवाई अड्डे के बुनियादी ढाँचे और संचालन में महत्त्वपूर्ण सुरक्षा खामियों की पहचान करने या उन्हें दूर करने में विफल रहते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: मुंबई (2019) और हुबली (2015) जैसे हवाई अड्डों पर होने वाले ओवररन, अपर्याप्त सुरक्षा उपायों के कारण हुये थे।
  • OTP प्रेशर: ऑनटाइम परफॉर्मेंस (OTP) पर अत्यधिक बल देने से पायलटों को सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी करते हुए जोखिम भरे फैसले लेने पड़ते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: मंगलुरु दुर्घटना (2010) प्रेस-ऑन-इट-इज के कारण हुई , जिसमें पायलट ने गो-अराउंड चेतावनियों को दरकिनार कर दिया था।

अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यापक सुधार

  • उन्नत पायलट प्रशिक्षण: एयरलाइनों को रनवे कन्फ्यूजन और स्थिर दृष्टिकोण जैसे परिदृश्यों के लिए सिम्युलेटर-आधारित प्रशिक्षण में सुधार करना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: सिंगापुर एयरलाइंस ने ताइवान दुर्घटना (2000) के बाद पायलट प्रशिक्षण को संशोधित किया , ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
  • कड़े नियम: चालक दल की ड्यूटी सीमा के लिए वैश्विक मानकों को लागू करना चाहिए और बिना किसी समझौते के अनुपालन को लागू करना चाहिए
    • उदाहरण के लिए: अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (FAA) फ्लाइट क्रू के लिए रेस्ट पीरीयड को अनिवार्य करता है , जिससे थकान से होने वाली त्रुटियों में कमी आती है।
  • स्वतंत्र दुर्घटना जाँच: दुर्घटना की जाँच में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र निकाय की स्थापना करनी चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: अमेरिका में राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) विमानन दुर्घटनाओं में निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करता है।
  • बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण : रनवे मार्किंग , नेविगेशन एड्स और प्रकाश व्यवस्था सहित हवाई अड्डे के बुनियादी ढाँचे को अपग्रेड करना चाहिए ताकि ICAO मानकों को पूरा किया जा सके।
    • उदाहरण के लिए: EMAS (इंजीनियर्ड मैटेरियल अरेस्टिंग सिस्टम) जैसी उन्नत प्रणालियों के साथ सिंगापुर और दुबई के आधुनिक हवाई अड्डे ,सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
  • सुरक्षा संस्कृति सुधार : पायलटों को दोष देने के बजाय न्यायपूर्ण संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए जिससे प्रतिशोध के डर के बिना गलती की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करना। 
    • उदाहरण के लिए: ICAO की वैश्विक विमानन सुरक्षा योजना (GASP) सुरक्षा संस्कृति को एक प्रमुख प्राथमिकता के रूप में महत्त्व देती है।

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विमानन सुरक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए, भारत को बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए,  विनियामक निरीक्षण को बढ़ाना चाहिए, उन्नत प्रौद्योगिकी में निवेश करना चाहिए और कौशल विकास को प्राथमिकता देना चाहिए। घटना रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत करना, सुरक्षा-प्रथम संस्कृति बनाना और अंतरराष्ट्रीय निकायों के साथ सहयोग करना इस क्षेत्र को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाएगा। यात्रियों का भरोसा, परिचालन उत्कृष्टता और वैश्विक विमानन सुरक्षा मानकों में भारत का नेतृत्व सुनिश्चित करेगा।

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