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Q. संपत्ति कर को अक्सर बढ़ती असमानता के समाधान के रूप में प्रस्तावित किया जाता है, परन्तु इसके कार्यान्वयन में कई चुनौतियाँ हैं। इसके ऐतिहासिक अनुभव, वैश्विक रुझानों और आर्थिक विकास और सामाजिक समानता पर संभावित प्रभाव पर विचार करते हुए, भारत में संपत्ति कर की व्यवहार्यता का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।(15 अंक, 250 शब्द)

December 24, 2024

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • इस बात पर प्रकाश डालिये कि कैसे संपत्ति कर बढ़ती असमानता का समाधान है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में अनेक चुनौतियाँ हैं।
  • ऐतिहासिक अनुभव और वैश्विक रुझानों पर विचार करते हुए भारत में संपत्ति कर की व्यवहार्यता में चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
  • आर्थिक विकास और सामाजिक समानता पर संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए भारत में संपत्ति कर की व्यवहार्यता का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर

संपत्ति कर एक व्यक्ति की नेट संपत्ति पर लगाया जाने वाला प्रत्यक्ष कर है, जिसका उद्देश्य बढ़ती असमानता को दूर करना है। प्रशासनिक अक्षमताओं के कारण वर्ष 2016 में समाप्त किए गए संपत्ति कर के संबंध में भारत का अनुभव, इसकी जटिलताओं को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर, फ्राँस जैसे देशों ने आर्थिक विकास संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए संपत्ति करों में सुधार किया है या उन्हें बदल दिया है। इससे भारत के सामाजिक-आर्थिक संदर्भ में इसकी व्यवहार्यता पर सवाल उठते हैं ।

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संपत्ति कर: बढ़ती असमानता का समाधान

  • असमानता कम करना: संपत्ति कर से संपत्ति का संकेन्द्रण कम हो सकता है और आय के अंतर को कम किया जा सकता है, जिससे अधिक समतापूर्ण समाज को बढ़ावा मिलता है।
    • उदाहरण के लिए: थॉमस पिकेटी ने असमानताओं को कम करने के लिए 2% वार्षिक संपत्ति कर का प्रस्ताव रखा क्योंकि शीर्ष 1% भारतीयों के पास भारत की 40% संपत्ति का स्वामित्व है।
  • सामाजिक योजनाओं का वित्तपोषण: संपत्ति कर से प्राप्त राजस्व से सामाजिक सुरक्षा जाल का वित्तपोषण किया जा सकता है, जिससे हाशिए पर स्थित समुदायों को सहायता मिल सकती है। 
    • उदाहरण के लिए: ग्रामीण भारत में दैनिक वेतन भोगियों के उत्थान के लिए, PMKVY (पीएम कौशल विकास योजना) जैसी योजनाओं के लिए राजस्व आवंटित किया जा सकता है।
  • प्रगतिशील कर प्रणाली: संपत्ति कर प्रगतिशीलता को बढ़ाता है और यह सुनिश्चित करता है कि धनी लोग  राष्ट्रीय राजस्व में आनुपातिक रूप से अधिक योगदान दें।
    • उदाहरण के लिए: नॉर्वे जैसे OECD देश प्रगतिशील राजकोषीय नीतियों के माध्यम से उच्च आय असमानताओं को संतुलित करने के लिए संपत्ति कर लगाते हैं।

कार्यान्वयन में चुनौतियाँ

  • प्रशासनिक चुनौतियाँ: संपत्ति कर के लिए अचल संपत्ति और सोने जैसी संपत्तियों का जटिल मूल्यांकन करना पड़ता है, जिससे मुकदमेबाजी और उच्च प्रशासनिक लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है । 
  • उदाहरण के लिए: वर्ष 1985 में, उत्तराधिकार कर संग्रह की लागत इसके राजस्व से अधिक हो गई, जिसके कारण वी.पी. सिंह ने इसे समाप्त कर दिया।
  • कर चोरी: उच्च नेटवर्थ वाले व्यक्ति अक्सर करों से बचने के लिए कानूनों में कमियाँ ढूँढ़ते हैं या संपत्ति के मूल्यों को कम करके बताते हैं, जिससे इसका उद्देश्य विफल हो जाता है। 
    • उदाहरण के लिए: वर्ष 2020 में, रिपोर्टों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे जेफ बेजोस जैसे अरबपतियों ने अवास्तविक लाभ और रणनीतिक परिसंपत्ति मूल्यांकन का लाभ उठाकर कानूनी रूप से संपत्ति कर दायित्वों से अपना बचाव किया।
  • वैश्विक स्तर पर धन की गतिशीलता: कर के कारण पूंजी पलायन हो सकता है, जैसा कि कर वृद्धि के बाद नॉर्वे के धनी लोगों के विदेश जाने से देखा गया है। 
    • उदाहरण के लिए: हेनले एंड पार्टनर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय कारणों से वर्ष 2023 में लगभग 5,100 भारतीय करोड़पति स्थानांतरित हुए।

ऐतिहासिक अनुभव और वैश्विक रुझानों को ध्यान में रखते हुए भारत में संपत्ति कर लागू करने की व्यवहार्यता में चुनौतियाँ

  • अकुशलता के कारण उन्मूलन: कम प्राप्ति और उच्च लागत के कारण वर्ष 2015 में भारत के संपत्ति कर को समाप्त कर दिया गया था । 
    • उदाहरण के लिए: अरुण जेटली ने अपने वर्ष 2015 के बजट भाषण के दौरान कहा था कि कुल राजस्व में संपत्ति कर का योगदान नगण्य है।
  • वैश्विक रुझान: वैश्विक स्तर पर संपत्ति करों में कमी आई है, वर्ष 2017 तक केवल चार OECD देशों ने ही उन्हें लागू किया। 
    • उदाहरण के लिए: स्वीडन और नीदरलैंड जैसे देशों ने कार्यान्वयन और राजस्व में चुनौतियों के कारण संपत्ति कर को समाप्त कर दिया।
  • ऐतिहासिक कर चोरी के पैटर्न: संपत्ति कर अक्सर कर चोरी की नई-नई तरकीबों को जन्म देता है, जैसा कि सदियों से देखा जा रहा है। 
    • उदाहरण के लिए: प्राचीन मिस्र में 7वीं शताब्दी ईसा पूर्व में संपत्ति के कम मूल्यांकन के माध्यम से कर चोरी का प्रमाण मिलता है ।
  • राजस्व में कमी: भारत सहित विभिन्न देशों में संपत्ति कर, कम संग्रह के कारण पुनर्वितरण उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहा । 
    • उदाहरण के लिए: 1985 में, वीपी सिंह ने कहा कि विरासत कर से ₹20 करोड़ की आय हुई , जो विकास के वित्तपोषण के लिए अपर्याप्त है।
  • प्रशासनिक लागत: उच्च प्रशासनिक लागत अक्सर लाभ से अधिक हो जाती है, जिससे देश संपत्ति कर व्यवस्था को जारी रखने से असहमति व्यक्त करते  हैं। 
    • उदाहरण के लिए: स्विट्जरलैंड के बेसल कैंटन में वर्ष 1840 के बाद से संपत्ति कर अनुपालन के प्रबंधन में अक्षमता का अनुभव किया जा रहा है।

आर्थिक विकास और सामाजिक समानता को ध्यान में रखते हुए भारत में संपत्ति कर की व्यवहार्यता में आने वाली चुनौतियाँ

  • आर्थिक वृद्धि जोखिम: उच्च संपत्ति कर निवेश को रोक सकते हैं और आर्थिक विकास को धीमा कर सकते हैं, जिससे उद्यमशीलता की गतिविधियाँ हतोत्साहित हो सकती हैं। 
    • उदाहरण के लिए: नॉर्वे के कर वृद्धि के कारण धनी व्यक्तियों को वहाँ  से स्थानांतरित होना पड़ा , जिससे देश के आर्थिक आधार पर असर पड़ा।
  • पूंजी पलायन: संपत्ति कर के जोखिम के कारण धनी व्यक्ति विदेश चले जाते हैं, जिससे घरेलू पूंजी और नवाचार में कमी आती है। 
    • उदाहरण के लिए: कर संबंधी चिंताओं और विदेशों में बेहतर अवसरों के कारण वर्ष 2023 में भारत से 4,300 करोड़पतियों का पलायन हुआ।
  • सामाजिक समानता में सुधार: राजस्व से राज्य की योजनाओं को बढ़ावा मिल सकता है, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास में असमानताओं को दूर किया जा सकता है। 
    • उदाहरण के लिए: संपत्ति कर से मिलने वाले राजस्व से आयुष्मान भारत को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे वंचित वर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवा में सुधार हो सकता है।
  • सीमित पुनर्वितरण: संपत्ति को लक्षित करते हुए यह कर, आय वितरण और अवसरों में
    संरचनात्मक असमानताओं को दूर करने में विफल रहता है। 

    • उदाहरण के लिए: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुफ्त खाद्यान्न पुनर्वितरण, करों के पुनर्वितरण की तुलना में गरीब परिवारों को अधिक लाभ पहुंचाता है।

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भारत में संपत्ति कर लागू करने की आगे की राह

  • प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना: बेहतर परिसंपत्ति मूल्यांकन, अनुपालन ट्रैकिंग और मुकदमेबाजी लागत को कम करने के लिए AI और ब्लॉकचेन जैसी प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाया जाना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: कुशल कर प्रशासन, अनुपालन में सुधार और कर चोरी को कम करने के लिए एस्टोनिया, ई-गवर्नेंस सिस्टम का उपयोग करता है।
  • स्तरीकृत कर संरचना: उच्च सीमा के साथ एक क्रमिक संपत्ति कर लागू करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह केवल अति-धनी लोगों को लक्षित करे, जिससे पूंजी पलायन जोखिम कम हो। 
    • उदाहरण के लिए: फ्रांस ने धन पर एक सॉलिडैरिटी  टैक्स लागू किया, जिसमें मध्यम आय वाले परिवारों को छूट दी गई और अति-धनी व्यक्तियों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • वैश्विक सहयोग को मजबूत करना: कर रिपोर्टिंग और पारदर्शिता पर अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के माध्यम से पूंजी पलायन को संबोधित करने के लिए अन्य देशों के साथ सहयोग करना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: OECD का कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (CRS) सीमा पार कर चोरी को रोकने के लिए वैश्विक सूचना विनिमय की सुविधा प्रदान करता है।
  • संपत्ति विविधीकरण पर विचार: शुरू में सोने और अचल संपत्ति जैसी अचल संपत्तियों को  कर के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए और व्यावहारिकता के लिए आसानी से आकलन योग्य वित्तीय संपत्ति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ।
    • उदाहरण के लिए: स्विट्जरलैंड मुख्य रूप से बैंक जमा और शेयरों पर संपत्ति कर लगाता है, जिससे अचल संपत्ति के मूल्यांकन की जटिलताओं से बचा जा सकता है।
  • स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना: सामाजिक क्षेत्रों में निवेश के लिए कर छूट जैसे प्रोत्साहनों की शुरुआत करनी चाहिए ताकि धनी लोगों को स्वेच्छा से संपत्ति कर का भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। 
    • उदाहरण के लिए: धर्मार्थ दान के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की कर कटौती उच्च नेट वर्थ वाले व्यक्तियों को सार्वजनिक कल्याण में योगदान करने के लिए प्रेरित करती है।

भारत कर चोरी को रोकने के लिए AI-संचालित धन ट्रैकिंग और ब्लॉकचेन-आधारित पारदर्शिता जैसे प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों को एकीकृत कर सकता है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसी योजनाओं का लाभ उठाकर, राजस्व को लक्षित गरीबी उन्मूलन के‌ लक्ष्य और सामाजिक बुनियादी ढांचे में निवेश करने से पुनर्वितरण न्याय सुनिश्चित हो सकता है। धन कराधान पर वैश्विक सहयोग को सशक्त करने से सीमा पार से संबंधित चुनौतियों का समाधान हो सकता है और समानता बढ़ सकती है।

While wealth tax is often proposed as a solution to rising inequality, its implementation faces numerous challenges. Critically analyze the feasibility of wealth tax in India, considering its historical experience, global trends and potential impact on economic growth and social equity in hindi

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