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Q. NEET जैसी राष्ट्रव्यापी प्रवेश परीक्षाओं के संचालन में बार-बार होने वाली प्रशासनिक और नैतिक विफलताओं ने संस्थागत निकायों में जनता के विश्वास को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के भीतर मौजूद प्रणालीगत खामियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और विश्वसनीयता बहाल करने के लिए के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

May 14, 2026

GS Paper IISocial Justice

प्रश्न की मुख्य माँग

  • राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के भीतर मौजूद प्रशासनिक एवं नैतिक संरचनात्मक कमियों की चर्चा कीजिए।
  • विश्वसनीयता और जन-विश्वास बहाल करने हेतु के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का उल्लेख कीजिए।
  • आगे की राह सुझाइए।

उत्तर

राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली केवल प्रौद्योगिकी पर नहीं, बल्कि विश्वास पर आधारित होती है। नीट में बार-बार सामने आए पेपर लीक, अनियमितताओं और नैतिक चूकों ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता को कमजोर किया है तथा विद्यार्थियों के विश्वास को गहराई से प्रभावित किया है।

NTA के भीतर प्रशासनिक एवं नैतिक संरचनात्मक कमियाँ

  • पेपर लीक: प्रश्न-पत्रों के बार-बार लीक होने की घटनाएँ गोपनीयता, सुरक्षित लॉजिस्टिक्स तथा परीक्षा प्रबंधन में गंभीर विफलताओं को उजागर करती हैं।
    • उदाहरण: नीट-यूजी 2026 को उस समय रद्द करना पड़ा, जब एक ‘गेस पेपर’ के अनेक रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान प्रश्न वास्तविक प्रश्न-पत्र से मेल खाते पाए गए।
  • कमजोर निगरानी व्यवस्था: राज्य प्राधिकरणों के साथ कमजोर समन्वय तथा स्थानीय स्तर पर अपर्याप्त निगरानी संगठित धोखाधड़ी और कदाचार को बढ़ावा देती है।
  • प्रॉक्सी धोखाधड़ी: पहचान सत्यापन में कमियाँ प्रतिरूपण को संभव बनाती हैं, जिससे उच्च-स्तरीय परीक्षाओं की निष्पक्षता और योग्यता-आधारित चयन प्रभावित होता है।
    • उदाहरण: वर्ष 2019 के तमिलनाडु नीट घोटाले में छात्रों ने परीक्षा देने के लिए प्रॉक्सी व्यक्तियों का उपयोग किया था।
  • नैतिक असंवेदनशीलता: प्रशासनिक प्रक्रियाएँ कई बार गरिमा और निष्पक्षता की उपेक्षा करती हैं, जिससे विशेष रूप से संवेदनशील वर्गों के अभ्यर्थियों में अविश्वास उत्पन्न होता है।
    • उदाहरण: वर्ष 2022 में केरल में छात्राओं की तलाशी (Frisking) से जुड़ा विवाद लैंगिक संवेदनशीलता और प्रक्रियात्मक नैतिकता पर गंभीर प्रश्न उठाता है।
  • अस्पष्ट प्रतिक्रियाएँ: पारदर्शिता में देरी और संस्थागत स्तर पर रक्षात्मक प्रतिक्रियाएँ विश्वास बहाल करने के बजाय संदेह को और गहरा करती हैं।

के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें

  • एनटीए का पुनर्गठन: जवाबदेही, पेशेवर दक्षता तथा उत्तरदायित्व की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत पुनर्गठन आवश्यक है।
  • मजबूत संस्थागत समन्वय: राज्य और जिला स्तर के प्राधिकरणों के साथ सुदृढ़ समन्वय एक सुरक्षित तथा त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली परीक्षा प्रशासन प्रणाली विकसित कर सकता है।
  • बहु-स्तरीय परीक्षाएँ: परीक्षा के अनेक चरण एकल-विफलता के जोखिम को कम करते हैं तथा मूल्यांकन की निष्पक्षता को बेहतर बनाते हैं।
  • हाइब्रिड प्रणाली: पेपर-आधारित और कंप्यूटर-आधारित प्रणालियों के संयोजन से कमजोरियों को कम किया जा सकता है तथा संचालन में अधिक लचीलापन सुनिश्चित किया जा सकता है।
  • कदाचार-रोधी उपाय: प्रौद्योगिकी-समर्थित निगरानी तथा अधिक सुदृढ़ निवारक प्रोटोकॉल उल्लंघनों को होने से पहले रोकने के लिए आवश्यक हैं।

आगे की दिशा

  • स्वतंत्र ऑडिट: प्रश्न-पत्र निर्माण, लॉजिस्टिक्स, साइबर सुरक्षा तथा जवाबदेही तंत्र की नियमित तृतीय-पक्षीय समीक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • डिजिटल सुरक्षा: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड प्रश्न-पत्र प्रेषण तथा AI-आधारित असामान्यता पहचान प्रणाली पेपर लीक की संभावनाओं को कम कर सकती है।
    • उदाहरण: सुरक्षित डिजिटल प्रश्न-पत्र वितरण मॉडल कई भर्ती परीक्षाओं में पहले से सफलतापूर्वक उपयोग किए जा रहे हैं।
  • विद्यार्थी शिकायत निवारण: अभ्यर्थियों का विश्वास पुनः स्थापित करने के लिए पारदर्शी और समयबद्ध शिकायत निवारण तंत्र आवश्यक है।
    • उदाहरण: शिकायतों और उनके समाधान हेतु सार्वजनिक डैशबोर्ड परीक्षा विवादों के बाद उत्पन्न अनिश्चितता को कम कर सकते हैं।
  • नैतिक प्रशिक्षण: अधिकारियों और पर्यवेक्षकों (Invigilators) को निष्पक्षता, लैंगिक संवेदनशीलता और परीक्षा नैतिकता संबंधी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
  • संसदीय निगरानी: उच्च-स्तरीय राष्ट्रीय परीक्षाओं में अधिक सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु समय-समय पर विधायी समीक्षा आवश्यक है।
    • उदाहरण: परीक्षा सुधारों पर संसदीय समीक्षा एनटीए जैसी संस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

निष्कर्ष

परीक्षा की निष्पक्षता सामाजिक न्याय और योग्यता-आधारित व्यवस्था की आधारशिला है। जब तक एनटीए केवल संकट-प्रबंधन से आगे बढ़कर गहन संस्थागत सुधारों की दिशा में कार्य नहीं करता, तब तक जन-विश्वास बहाल नहीं हो सकेगा और समान अवसर का वादा कमजोर बना रहेगा।

The recurring administrative and ethical failures in conducting nationwide entrance examinations like NEET have severely eroded public trust in institutional bodies. Critically analyze the systemic flaws within the National Testing Agency (NTA) and discuss the recommendations of the K. Radhakrishnan Committee to restore credibility. in hindi

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