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प्रश्न की मुख्य माँग
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भारत की बुज़ुर्ग आबादी के वर्ष 2050 तक 319 मिलियन तक पहुँचने का अनुमान है, जिससे उनकी सुरक्षा और कल्याण के बारे में चिंताएँ बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, वर्ष 2022 में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ़ अपराधों में 9.3% की वृद्धि हुई है वर्ष 2022 में मामले बढ़कर 28,545 हो गए हैं। यह प्रवृत्ति बदलती पारिवारिक संरचनाओं, शहरीकरण और कमजोर होते अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को दर्शाती है जिसके लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
| पहलू | उपाय |
| कानूनी उपाय | वृद्धजन संरक्षण कानूनों को सुदृढ़ बनाना: माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के अंतर्गत वित्तीय धोखाधड़ी और शारीरिक दुर्व्यवहार सहित वरिष्ठ नागरिकों के विरुद्ध अपराधों के लिए कठोर दंड लागू करना। |
| बुजुर्गों के मामलों के लिए विशेष न्यायालय: वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करनी चाहिए जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो और लंबित मामलों की संख्या कम हो। उदाहरण के लिए: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुजुर्ग पीड़ितों से जुड़े मामलों की प्राथमिकता पर सुनवाई शुरू की, जिससे न्याय मिलने में देरी कम हुई। |
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| प्रशासनिक उपाय | समर्पित वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा प्रकोष्ठ: दिल्ली के मॉडल की तरह, नियमित जांच, आपातकालीन प्रतिक्रिया और सामुदायिक सहभागिता के लिए बुजुर्गों की सुरक्षा पर केंद्रित पुलिस इकाइयाँ स्थापित करनी चाहिए । उदाहरण के लिए: दिल्ली का वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा प्रकोष्ठ सुरक्षा ऑडिट और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है, जिससे बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों में कमी आती है। |
| अनिवार्य पृष्ठभूमि सत्यापन: अकेले रहने वाले बुज़ुर्ग व्यक्तियों के विरुद्ध अपराधों को रोकने के लिए घरेलू कामगारों, ड्राइवरों और किराएदारों का सख्त सत्यापन लागू करना चाहिए । उदाहरण के लिए: मुंबई पुलिस का ‘वरिष्ठ नागरिक पंजीकरण अभियान’ सत्यापित घरेलू सहायक सुनिश्चित करता है, जिससे धोखाधड़ी और दुर्व्यवहार का जोखिम कम होता है। |
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| तकनीकी उपाय | पैनिक बटन और ट्रैकिंग डिवाइस: आपातकालीन स्थितियों में तत्काल पुलिस सहायता के लिए बुज़ुर्ग व्यक्तियों को GPS-सक्षम पैनिक डिवाइस वितरित करना चाहिए। उदाहरण के लिए: तेलंगाना ने ‘हॉक आई’ ऐप लॉन्च किया, जिससे बुज़ुर्ग नागरिक संकट की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचित कर सकते हैं। |
| धोखाधड़ी का पता लगाने वाली प्रणालियाँ: बुज़ुर्गों के बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन को ट्रैक करने के लिए AI-संचालित निगरानी का उपयोग करना चाहिए, जिससे वित्तीय धोखाधड़ी को रोका जा सके। उदाहरण के लिए: RBI के बैंकों को दिए गए निर्देश में वरिष्ठ नागरिकों के खातों में असामान्य लेन-देन के लिए विशेष अलर्ट अनिवार्य किया गया है। |
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| समुदाय-आधारित समाधान | अंतर-पीढ़ीगत सहभागिता कार्यक्रम: भावनात्मक और सामाजिक सहायता के लिए छात्रों को बुज़ुर्ग व्यक्तियों से जोड़ने के लिए स्कूलों और गैर सरकारी संगठनों को प्रोत्साहित करना चाहिए । उदाहरण के लिए: ‘दादा-दादी को गोद लें‘ पहल स्कूली बच्चों को नियमित यात्राओं और संगति के लिए बुज़ुर्ग नागरिकों के साथ जोड़ती है। |
| पड़ोस निगरानी नेटवर्क: बुजुर्ग निवासियों के लिए संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने और आपात स्थितियों में सहायता करने हेतु समुदाय-नेतृत्व वाले सुरक्षा समूह बनाने चाहिए। |
बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा, कुशल पुलिसिंग, तकनीक-संचालित निगरानी और सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता है। सामाजिक सुरक्षा जाल, वित्तीय साक्षरता और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करके एक ऐसा भविष्य बनाया जा सकता है जहाँ वरिष्ठ नागरिक बिना किसी डर के, सम्मान और देखभाल के साथ रह सकें।
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