Q.
POSH अधिनियम, 2013 जैसे कानूनों के बावजूद, शैक्षणिक और कार्यस्थलों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा जारी है। संस्थागत चुनौतियों की आलोचनात्मक जाँच कीजिए और महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान सुनिश्चित करने के उपाय सुझाएँ। (10 अंक, 150 शब्द)
July 17, 2025
GS Paper IISocial Justice
प्रश्न की मुख्य माँग
- अधिनियम की संस्थागत चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।
- महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थल सुनिश्चित करने के उपाय सुझाइये।
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उत्तर
POSH अधिनियम, 2013 जैसे प्रगतिशील कानूनों के बावजूद, संस्थागत विफलता, सामाजिक उदासीनता और जवाबदेही की कमी कार्यस्थलों और शैक्षणिक परिसरों को महिलाओं के लिए असुरक्षित बना रही है। जैसा कि NCRB रिपोर्ट (वर्ष 2022) में बताया गया है, ‘महिलाओं के खिलाफ अपराध’ के कुल 4.45 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए, जो वर्ष 2021 की तुलना में 4% की वृद्धि दर्शाता है।
अधिनियम की संस्थागत चुनौतियाँ
- गैर-कार्यात्मक या अनुपस्थित ICC: POSH अधिनियम में आंतरिक शिकायत समितियों (ICS) का गठन अनिवार्य किया गया है, फिर भी कई संस्थानों ने इनका गठन नहीं किया है या वे केवल कागज पर ही मौजूद हैं।
- उदाहरण: ओडिशा ने बार-बार उत्पीड़न का सामना करने वाले बी.एड. छात्र की मृत्यु के बाद ही कॉलेजों को 24 घंटे के भीतर ICC स्थापित करने का निर्देश दिया।
- प्राधिकारियों में जवाबदेही का अभाव: प्राधिकारी अक्सर शिकायतों को नजरअंदाज कर देते हैं या उन्हें महत्त्वहीन बना देते हैं, तथा त्वरित एवं जिम्मेदारी से कार्रवाई करने में विफल रहते हैं।
- कानून और व्यवस्था तंत्र में विफलता: यहाँ तक कि महानगरों में भी अपराध ‘सुरक्षित’ स्थलों पर किए जाते हैं, जिससे कानून प्रवर्तन की अक्षमता उजागर होती है।
- कम रिपोर्टिंग और प्रतिशोध का डर: पीड़ितों को अक्सर सामाजिक कलंक या सत्ता में बैठे आरोपियों से प्रतिशोध का डर रहता है।
- कैम्पस अपराधों की आवर्ती प्रकृति: कैम्पस हिंसा पृथक नहीं है; यह आवर्ती है और प्रायः प्रणालीबद्ध है, तथा संस्थागत चुप्पी इसमें सहायक होती है।
- उदाहरण: बंगाल में एक लॉ छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद उसी क्षेत्र में एक स्नातकोत्तर छात्रा की हत्या कर दी गई।
- सीमित लिंग संवेदनशीलता और जागरूकता: लैंगिक मानदंडों और POSH विनियमों पर संकाय और कर्मचारियों के बीच प्रशिक्षण की कमी, चुप्पी की संस्कृति को बनाए रखती है।
उदाहरण: NCRB 2022 के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अधिकांश अपराध ‘पति/रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता’ (31.4%), ‘उनकी मर्यादा भंग करने के इरादे से किया गया हमला’ (18.7%), और ‘बलात्कार’ (7.1%) के तहत दर्ज किए गए थे।
- समय पर न्याय का अभाव: विलंबित या असफल न्याय कानूनी तंत्र को बदनाम करता है और पीड़ितों को सहायता लेने से हतोत्साहित करता है।
महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थल सुनिश्चित करने के उपाय
- ICC का अनिवार्य ऑडिट और सार्वजनिक प्रकटीकरण: ICC का नियमित तृतीय-पक्ष ऑडिट सुनिश्चित करना चाहिए और अनुपालन स्थिति को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करना चाहिए।
- ICC से परे शिकायत निवारण प्रकोष्ठ: बाह्य निरीक्षण और छात्र प्रतिनिधित्व के साथ बहु-स्तरीय शिकायत तंत्र लागू करना चाहिए।
- लैंगिक अधिकारों और कानून का पाठ्यक्रम में समावेश: स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में कानूनी अधिकारों, सहमति और सम्मानजनक व्यवहार के बारे में जागरूकता लानी चाहिए।
- समयबद्ध त्वरित निवारण तंत्र: विलंब और अस्वीकृति से बचने के लिए शिकायतों के प्रसंस्करण हेतु निश्चित समय-सीमा और कानूनी समर्थन निर्धारित करना चाहिए।
- उदाहरण: भारत सरकार के तहत निर्भया फंड का उद्देश्य न्याय में तेजी लाना और हिंसा से पीड़ित महिलाओं को सहायता प्रदान करना है।
- परिसर और कार्यस्थल अपराधों के लिए फास्ट-ट्रैक न्यायालय: ऐसे मामलों के त्वरित समाधान के लिए समर्पित कानूनी तंत्र स्थापित करना चाहिए।
- डिजिटल एवं अनाम रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म: उत्पीड़न की रिपोर्ट करने के लिए सुरक्षित एवं अनाम ऑनलाइन टूल लॉन्च करना चाहिए, विशेष रूप से परिसरों में।
- उदाहरण: She-Box (भारत सरकार) महिलाओं को कार्यस्थल पर उत्पीड़न के संबंध में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है।
- निष्क्रियता के परिणामों के साथ शून्य-सहिष्णुता की नीतियाँ: निष्क्रियता के लिए संस्थागत प्रमुखों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई लागू करनी चाहिए।
निष्कर्ष
तथाकथित ‘सुरक्षित स्थलों’ में हिंसा का जारी रहना कमज़ोर संस्थागत तंत्र का एक गंभीर दोष है। हालाँकि POSH अधिनियम एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, लेकिन कार्यान्वयन में खामियाँ, खराब निवारण प्रणालियाँ और जवाबदेही का अभाव गंभीर बाधाएँ बनी हुई हैं। भारत के शैक्षणिक और व्यावसायिक वातावरण में महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थल सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत ढाँचों को मजबूत करना, लैंगिक संवेदनशीलता में सुधार लाना और सख्त जवाबदेही लागू करना आवश्यक है।