Q. भारत के आर्थिक विकास और खाद्य सुरक्षा में कृषि सब्सिडी की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (10 ‌अंक,150 शब्द)

August 10, 2024

GS Paper III
प्रश्न की मुख्य मांग:

  • भारत के आर्थिक विकास और खाद्य सुरक्षा में कृषि सब्सिडी की सकारात्मक भूमिका का परीक्षण करें।
  • भारत के आर्थिक विकास और खाद्य सुरक्षा में कृषि सब्सिडी की नकारात्मक भूमिका का परीक्षण करें।

 

उत्तर:

भारत में कृषि सब्सिडी , कृषि बजट का लगभग 73% है ,जो  किसानों को समर्थन देने तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।  ये सब्सिडी उर्वरक, बिजली, पानी एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कवर करती हैं तथा  भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को बदलने में सहायक रही हैं। हालांकि, इनसे   विशेष रूप से  राजकोषीय स्थिरता तथा  पर्यावरणीय प्रभावों के संबंध में  चुनौतियां भी उत्पन्न हुई  हैं।

भारत के आर्थिक विकास और खाद्य सुरक्षा में कृषि सब्सिडी की सकारात्मक भूमिका:

  • कृषि उत्पादन में वृद्धि: कृषि सब्सिडियों ने कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे भारत एक खाद्य कमी वाले देश से खाद्य अधिशेष देश बन गया है
    उदाहरण के लिए: हरित क्रांति के दौरान प्रयुक्त  सब्सिडी वाले उर्वरकों तथा  उच्च उपज वाले किस्म के बीजों ने भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में सक्षम बनाया, जिससे खाद्य आयात पर निर्भरता कम हो गई।
  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना: प्रमुख फसलों के लिए MSP जैसी सब्सिडी किसानों के लिए स्थिर आय सुनिश्चित करती हैं, जिससे निरंतर उत्पादन को प्रोत्साहन मिलता है। इस स्थिरता ने भारत की खाद्य सुरक्षा में योगदान दिया है, जिससे देश गेहूं और चावल का प्रमुख निर्यातक बन गया है।
    उदाहरण के लिए: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), जिसमें क्रय पर सब्सिडी प्राप्त होती  है, तथा  गरीबों को किफायती भोजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • सीमांत किसानों का सशक्तिकरण: सब्सिडी लघु  एवं  सीमांत किसानों के लिए
    आवश्यक कृषि लागतों  को किफायती बनाती है।
    उदाहरण के लिए: बिहार जैसे राज्यों में, जहां 80% से अधिक किसान छोटी जोत वाले हैं , बीज एवं उर्वरक पर दी जाने वाली सब्सिडी उन्हें आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने में सक्षम बनाती है, जिससे उत्पादन  में सुधार होता है तथा  ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम होती है।
  • ग्रामीण विकास को प्रोत्साहन : कृषि सब्सिडी ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन करती है, जिससे कृषि को एक जीवंत व्यवसाय बनाए रखा जा सकता है।
    उदाहरण के लिए: पंजाब में विद्युत  पर दी जाने वाली सब्सिडी ने किसानों को सिंचाई तक पहुंचने की सुविधा प्रदान की है, जो इस क्षेत्र में फसल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे ग्रामीण आजीविकाएं बनी रहती हैं तथा  क्षेत्रीय विकास में योगदान मिलता है।
  • प्रौद्योगिकी अंगीकरण को प्रोत्साहित करना: सब्सिडियों ने आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने में मदद की है, जिससे जल के अधिक कुशल उपयोग तथा  उच्च उत्पादकता को बढ़ावा मिला है।
    उदाहरण के लिए : महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ड्रिप सिंचाई एवं सोलर पंपों को अपनाना।

भारत के आर्थिक विकास और खाद्य सुरक्षा में कृषि सब्सिडी की नकारात्मक भूमिका:

  • राजकोषीय दबाव : उर्वरक एवं  बिजली पर दी जाने वाली कृषि सब्सिडियां सरकार पर भारी वित्तीय दबाव डालती हैं, जिससे राजकोषीय में वृद्धि होती है तथा  सरकार की अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश करने की क्षमता सीमित हो जाती है। उदाहरण के लिए, 2023 में उर्वरक सब्सिडी का बिल ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक हो गया।
    उदाहरण के लिए: 2023 में केवल उर्वरक सब्सिडी पर व्यय  ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक हो गया।
  • पर्यावरणीय निम्नीकरण : सब्सिडी वाले उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा का निम्नीकरण  तथा  जल प्रदूषण हुआ है
    उदाहरण के लिए: पंजाब में नाइट्रोजन-आधारित उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा  में अम्लीकरण के साथ  भूजल की कमी हो गई है, जिससे कृषि में दीर्घकालिक स्थिरता एवं  मृदा की उर्वरता प्रभावित हुई   है।
  • बाजार मूल्यों में विकृति: MSP के माध्यम से दी जाने वाली सब्सिडियां प्रायः बाजार विकृतियों का कारण बनती हैं, जिससे गेहूं  एवं  चावल जैसी सीमित फसलों की खेती को प्रोत्साहन मिलता है।
    उदाहरण के लिए: इस प्रथा  ने मोनोक्रॉपिंग को बढ़ावा दिया है, जिससे मृदा  के पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं तथा कीटों एवं बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
  • अकुशल संसाधन उपयोग: संसाधनों का असतत उपयोग इन क्षेत्रों में कृषि के भविष्य के लिए खतरा बन गया है तथा सरकार को ऐसी सब्सिडियों की दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है।
    उदाहरण के लिए :पंजाब एवं  हरियाणा जैसे राज्यों में बिजली सब्सिडियों के कारण भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे जल स्तर में तेजी से गिरावट आ रही है।
  • असमान वितरण : कृषि सब्सिडियां प्रायः बड़े किसानों को अधिक लाभ पहुंचाती हैं, जबकि छोटे किसानों को कम समर्थन मिलता है। उदाहरण के लिए, गुजरात जैसे राज्यों में, बड़े किसानों को बिजली और पानी की सब्सिडियों से अधिक लाभ हुआ है, जिससे कृषि क्षेत्र में आय असमानता बढ़ रही है और ग्रामीण असमानता को बढ़ावा मिल रहा है।
    उदाहरण के लिए: गुजरात जैसे राज्यों में, बड़े किसानों को बिजली एवं  पानी की सब्सिडियों से अधिक लाभ हुआ है, जिससे कृषि क्षेत्र में आय असमानता बढ़ रही है तथा  ग्रामीण असमानता को बढ़ावा मिल रहा है।

सतत प्रथाओं और समान वितरण पर ध्यान केंद्रित करके कृषि सब्सिडी का अनुकूलन भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा। नवाचार , अनुसंधान और कुशल संसाधन उपयोग की ओर सब्सिडियों का पुनर्निर्देशन उत्पादकता बढ़ा सकता है  साथ ही पर्यावरणीय निम्नीकरण  को कम कर सकता है। एक संतुलित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करेगा कि राजकोषीय स्थिरता या पर्यावरणीय स्वास्थ्य से समझौता किए बिना सब्सिडी खाद्य सुरक्षा एवं आर्थिक विकास में सहयोगी बनी  रहे ।

 

Critically examine the role of agricultural subsidies in India’s economic development and food security.  in hindi

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