प्रश्न की मुख्य माँग
- कल्याण एवं विकास वितरण में भेदभावपूर्ण आयामों की चर्चा कीजिए।
- लक्षित कल्याण योजनाओं की आवश्यकता के पक्ष में तर्क प्रस्तुत कीजिए।
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उत्तर
भारत की कल्याणकारी व्यवस्था, कमजोर वर्गों के उत्थान हेतु लक्षित हस्तक्षेपों पर आधारित है। यद्यपि बहिष्करण, अक्षमताओं और अनपेक्षित विकृतियों को लेकर उठती चिंताएँ इसकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। इसलिए इसकी सीमाओं और पुनर्वितरणात्मक तर्क—दोनों का सम्यक् मूल्यांकन आवश्यक है।
कल्याण एवं विकास वितरण में भेदभावपूर्ण आयाम
- मेरिट पर बहस: शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण को कभी-कभी मेरिट-आधारित चयन से समझौता करने वाला माना जाता है।
- उदाहरण: नीट (NEET) में आरक्षण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटा (103वाँ संविधान संशोधन) पर निष्पक्षता बनाम समानता की बहस।
- शहरी बहिष्करण: कल्याणकारी ढाँचा मुख्यतः ग्रामीण-केंद्रित है, जिससे शहरी गरीब अपेक्षाकृत उपेक्षित रह जाते हैं।
- उदाहरण: मनरेगा ग्रामीण रोजगार की गारंटी देता है, जबकि शहरी क्षेत्रों के लिए ऐसा कोई व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं है (DUET जैसे पायलट सीमित हैं)।
- भ्रष्टाचार की समस्या: कमजोर अंतिम-स्तर वितरण के कारण लाभ लक्षित लाभार्थियों तक पूरी तरह नहीं पहुँच पाते हैं।
- उदाहरण: सुधारों के बावजूद, कैग रिपोर्टों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अनियमितताएँ पाई गईं, हालाँकि आधार-आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से इसमें कमी आई है।
- सब्सिडी से विकृति: इनपुट सब्सिडी संसाधनों के अक्षम उपयोग और दीर्घकालिक अस्थिरता को बढ़ावा दे सकती है।
- उदाहरण: पंजाब और हरियाणा में मुफ्त बिजली से भूजल दोहन और फसल असंतुलन में वृद्धि हुई है।
- क्षेत्रीय असंतुलन: क्षेत्र-विशेष योजनाएँ विकास में असमानता की धारणा उत्पन्न कर सकती हैं।
- उदाहरण: PM-DevINE (पूर्वोत्तर) एक क्षेत्र को प्राथमिकता देता है, जबकि अन्य पिछड़े क्षेत्रों को आकांक्षी जिला कार्यक्रम जैसी अलग योजनाओं पर निर्भर रहना पड़ता है।
प्रतिवाद: लक्षित कल्याण योजनाओं की आवश्यकता
- समानता पर बल: कल्याणकारी नीतियाँ ऐतिहासिक और संरचनात्मक असमानताओं को दूर करने का प्रयास करती हैं।
- उदाहरण: SC/ST/OBC के लिए आरक्षण नीति से शिक्षा और रोजगार में प्रतिनिधित्व बढ़ा है।
- वित्तीय समावेशन: बैंकिंग और ऋण तक पहुँच का विस्तार गरीबों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ता है।
- उदाहरण: प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 50 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए, जो DBT से जुड़े हैं।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: लक्षित योजनाएँ कमजोर वर्गों को विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय से बचाती हैं।
- उदाहरण: आयुष्मान भारत–PMJAY के तहत गरीब परिवारों को ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा।
- मानव पूँजी विकास: कल्याणकारी योजनाएँ शिक्षा, पोषण और दीर्घकालिक उत्पादकता को बढ़ाती हैं।
- उदाहरण: पीएम पोषण (मिड-डे मील योजना) से स्कूल उपस्थिति और बच्चों के पोषण में सुधार।
- अंतिम छोर तक पहुँच: प्रौद्योगिकी आधारित शासन लक्षित वितरण को बेहतर बनाता है और बहिष्करण को कम करता है।
- उदाहरण: JAM ट्रिनिटी (जन धन–आधार–मोबाइल) के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और भ्रष्टाचार में कमी।
निष्कर्ष
इस प्रकार, कल्याणकारी व्यवस्था में समानता और दक्षता के बीच संतुलन आवश्यक है। बहिष्करण और विकृतियों से जुड़ी चिंताओं का समाधान करना जरूरी है, परंतु सामाजिक न्याय के उद्देश्यों को कमजोर किए बिना। एक पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-आधारित और आवश्यकता-आधारित दृष्टिकोण समावेशी, जवाबदेह और सतत विकास सुनिश्चित कर सकता है।