प्रश्न की मुख्य माँग
- विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता के कारण भारत की डिजिटल संप्रभुता के समक्ष उत्पन्न चुनौतियाँ।
- महत्त्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना पर बाहरी नियंत्रण से उत्पन्न रणनीतिक एवं आर्थिक जोखिम।
- स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु बहुआयामी उपाय।
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उत्तर
परिचय
डिजिटल अवसंरचना भारत की अर्थव्यवस्था, शासन व्यवस्था तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारशिला है। हाल की घटनाएँ, जैसे वर्ष 2026 में चीनी सॉफ्टवेयर ‘ईसीक्लाउड (EseeCloud)’ के माध्यम से CCTV प्रणाली से समझौता तथा जुलाई 2025 में यूरोपीय संघ (EU) के प्रतिबंधों के कारण नायरा एनर्जी की क्लाउड सेवाओं तक पहुँच का अवरोध, विदेशी स्वामित्व वाले डिजिटल मंचों पर भारत की निर्भरता से उत्पन्न कमजोरियों को उजागर करती हैं। ऐसे समय में, जब समकालीन युद्ध तेजी से सॉफ्टवेयर-आधारित होते जा रहे हैं, यह निर्भरता भारत की परिचालन एवं रणनीतिक स्वायत्तता के लिए प्रत्यक्ष चुनौती प्रस्तुत करती है।
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भारत की डिजिटल संप्रभुता के समक्ष चुनौतियाँ
- महत्त्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर विदेशी नियंत्रण: प्रमाणीकरण प्रणालियाँ, क्लाउड सेवाएँ तथा उत्पादकता सॉफ्टवेयर मुख्यतः विदेशी कंपनियों द्वारा संचालित किए जाते हैं।
- उदाहरण: यूरोपीय संघ (EU) के प्रतिबंधों के कारण माइक्रोसॉफ्ट द्वारा नायरा एनर्जी के डेटा तक पहुँच को अवरुद्ध करना, भारतीय परिचालनों पर बाहरी प्रभाव की संभावना को दर्शाता है।
- रक्षा प्रौद्योगिकियों में रणनीतिक जोखिम: लड़ाकू विमानों, मिसाइलों तथा रडार प्रणालियों में एंबेडेड सॉफ्टवेयर ऐसे निर्माताओं द्वारा नियंत्रित हो सकते हैं, जो विदेशी सरकारों के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
- उदाहरण: वर्ष 1999 के कारगिल संघर्ष के दौरान भारत को GPS संबंधी सीमाओं का सामना करना पड़ा, जिसने परिचालनगत कमजोरियों को उजागर किया।
- अनुसंधान एवं विकास (R&D) में कम निवेश: वर्ष 2000–2020 के दौरान भारत का सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय औसतन GDP का 0.74% रहा, जो वैश्विक औसत 2.07% से काफी कम है। इससे स्वदेशी नवाचार एवं तकनीकी आत्मनिर्भरता सीमित होती है।
डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा हेतु बहुआयामी रणनीति
- महत्त्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्मों का स्वदेशी विकास: स्वदेशी क्लाउड सेवाओं, प्रमाणीकरण प्रणालियों तथा उत्पादकता सॉफ्टवेयर के विकास का विस्तार किया जाए।
- उदाहरण: सरकारी मंत्रालयों का जोहो (Zoho) प्लेटफॉर्म की ओर संक्रमण तथा UPI एवं RuPay की सफलता।
- अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी साझेदारी: विश्वसनीय देशों के साथ हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर के सह-विकास हेतु सहयोग बढ़ाया जाए, जिससे एकतरफा निर्भरता कम हो।
- उदाहरण: सानंद (गुजरात) में माइक्रॉन सेमीकंडक्टर ATMP सुविधा तथा पैक्स सिलिका एआई पहल में भारत की भागीदारी।
- अनुसंधान एवं विकास तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा: अनुसंधान एवं विकास (R&D) व्यय में वृद्धि की जाए तथा रक्षा एवं डिजिटल अवसंरचना क्षेत्रों में निजी नवाचार को प्रोत्साहित किया जाए।
- उदाहरण: एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) परियोजना में प्रतिस्पर्द्धात्मक निजी भागीदारी।
- सॉफ्टवेयर-आधारित युद्ध में रणनीतिक स्वायत्तता: रक्षा, वित्त एवं ऊर्जा क्षेत्रों की महत्त्वपूर्ण प्रणालियों पर घरेलू नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए तथा वैकल्पिक आपूर्ति शृंखलाएँ विकसित की जाएँ।
- साइबर सुरक्षा एवं प्रत्यास्थता अवसंरचना: महत्त्वपूर्ण डिजिटल नेटवर्कों के लिए साइबर सुरक्षा, निगरानी एवं जोखिम खुफिया तंत्र में घरेलू विशेषज्ञता विकसित की जाए।
- मानकीकरण एवं ओपन-सोर्स अपनाना: पारस्परिक कार्यक्षमता सुनिश्चित करने तथा विक्रेता-निर्भरता के जोखिम को कम करने के लिए ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर मानकों को प्रोत्साहित किया जाए।
- उदाहरण: विदेशी सॉफ्टवेयर निर्भरता को कम करने हेतु सरकारी सर्वरों एवं महत्त्वपूर्ण अवसंरचना में लिनक्स (Linux)-आधारित प्रणालियों को बढ़ावा देना।
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निष्कर्ष
डिजिटल संप्रभुता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा एवं तकनीकी निर्भरता के परिप्रेक्ष्य में स्वदेशी क्षमताओं के विकास, रणनीतिक प्रौद्योगिकी साझेदारियों तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) में अधिक निवेश का समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है। इससे भारत जोखिमों को कम करते हुए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को सुदृढ़ कर सकेगा तथा अपनी डिजिटल एवं प्रौद्योगिकीय अवसंरचना को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बना पाएगा।