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उत्तर:
प्रश्न हल करने का दृष्टिकोण:
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भूमिका:
संगठनात्मक संदर्भ में अनुशासन का तात्पर्य आम तौर पर आदेशों का पालन करना और प्राधिकरण के अधीन रहना है। हालाँकि किसी भी संगठन में एक निश्चित स्तर का अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है, अत्यधिक अनुशासन कभी-कभी प्रति-उत्पादक(counter-productive) हो सकता है।
मुख्य भाग:
यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं कि भारतीय संदर्भ में अत्यधिक अनुशासन किस प्रकार प्रति-उत्पादक हो सकता है:
निष्कर्ष:
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि किसी भी संगठन में व्यवस्था और उत्पादकता बनाए रखने के लिए अनुशासन आवश्यक है, अत्यधिक अनुशासन कभी-कभी प्रति-उत्पादक भी हो सकता है। भारत में, इसे अक्सर नियमों और विनियमों के कठोर पालन के रूप में देखा जाता है, जो रचनात्मकता और नवीनता को दबा सकता है तथा नौकरशाही की अक्षमताओं को जन्म दे सकता है।
इसलिए, उत्पादकता को अधिकतम करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संगठनों के लिए अनुशासन बनाए रखने और रचनात्मकता तथा लचीलेपन को प्रोत्साहित करने के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।
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