प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत में ट्रेन में आग लगने की घटनाओं के कारण
- रोकथाम और प्रतिक्रिया में सुधार के उपाय
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उत्तर
हाल ही में टाटानगर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस में येलामंचिली के पास एक एसी कोच में लगी आग भारतीय रेलवे में लगातार बनी हुई आग की गंभीर समस्या को उजागर किया है। वर्ष 2014 से कुल दुर्घटनाओं में 70% की कमी के बावजूद, आग की घटनाएँ एक गंभीर चुनौती बनी हुई हैं, जो वार्षिक दुर्घटनाओं का लगभग 10-20% हिस्सा हैं।
भारत में ट्रेन में आग लगने की घटनाओं के कारण
- विद्युत संबंधी खतरे: पुराने एसी कोचों में सर्किट का ओवरलोड होना और वायरिंग संबंधी अक्सर शॉर्ट सर्किट का कारण बनती है, विशेषकर रात के व्यस्त समय में।
- यात्री लापरवाही: गैस सिलेंडर जैसे प्रतिबंधित ज्वलनशील पदार्थों को ले जाना या कोचों के अंदर धूम्रपान करना मानव जनित खतरों का एक बड़ा कारण बना हुआ है।
- उदाहरण: बंगलूरू-नांदेड़ एक्सप्रेस दुर्घटना का कारण यात्री की लापरवाही और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गलत तरीके से चार्जिंग थी।
- पैंट्री के खतरे: LPG सिलेंडरों का अनुचित प्रबंधन या पैंट्री कारों में तेल का रिसाव उच्च जोखिम वाले क्षेत्र बनाता है जो आस-पास के कोचों को अपनी चपेट में ले सकता है।
- उदाहरण: पैंट्री कार में आग लगने की लगातार रिपोर्टों के बाद जोनल रेलवे को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।
- रोलिंग स्टॉक में खराबी: ब्रेक जाम होने या घर्षण के कारण पहियों का अत्यधिक गर्म होना, नीचे लगे उपकरणों या कोच के फर्श में आग लगा सकता है।
रोकथाम और प्रतिक्रिया में सुधार के उपाय
- स्वचालित आग बुझाने की प्रणाली: धुआँ दिखाई देने पर तुरंत आग बुझाने के लिए सक्रिय होने वाली स्वचालित अग्नि- शमन प्रणालियों को मैनुअल अग्निशामकों से हटाकर स्वचालित अग्नि-शमन प्रणालियों की ओर अग्रसर किया जा रहा है।
- उन्नत पहचान प्रणाली: केवल प्रीमियम ट्रेनों तक सीमित न रहकर, पूरे बेड़े में AI-आधारित ‘अग्नि और धुआँ पहचान प्रणालियों’ का तेजी से कार्यान्वयन किया जा रहा है।
- उदाहरण: प्रारंभिक चेतावनी सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2024 के अंत तक 20,000 से अधिक एसी कोचों में ये प्रणालियाँ लगाई जा चुकी थीं।
- सामग्री का उन्नयन: आग के प्रसार की दर को कम करने के लिए सीटों, पर्दों और फर्श के लिए अग्निरोधी (FR) सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।
- उदाहरण: सभी नए एलएचबी कोच अंतरराष्ट्रीय मानक अग्निरोधी विशिष्टताओं के अनुसार निर्मित किए जा रहे हैं।
- कर्मचारियों का प्रशिक्षण: रात में त्वरित निकासी सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन में मौजूद कर्मचारियों, जैसे कि TTE और बेड-रोल परिचारकों के लिए अनिवार्य, आवधिक मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही हैं।
निष्कर्ष
भारतीय रेलवे ने अपने ट्रैक और सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बना दिया है, फिर भी अग्नि सुरक्षा के लिए प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण के बजाय ‘जोखिम का पूर्वानुमान लगाने वाली’ संस्कृति की आवश्यकता है। स्वचालित अग्नि-शमन तकनीकों के लिए ‘कोई भी लागत बहुत अधिक नहीं’ का दृष्टिकोण अपनाकर और ज्वलनशील पदार्थों के लिए कठोर नियमों को लागू करके, रेलवे यह सुनिश्चित कर सकता है कि ‘शून्य दुर्घटना’ के लक्ष्य को अग्निजनित दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों तक भी बढ़ाया जा सके।