Q. मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित महाभियोग प्रस्ताव संस्थागत जवाबदेही और राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा को लेकर चिंताएँ उत्पन्न करता है। भारत में चुनाव आयुक्तों को हटाने से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

April 1, 2026

GS Paper IIIndian Polity

प्रश्न की मुख्य माँग

  • चुनाव आयुक्तों को हटाने से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों की चर्चा कीजिए।
  • इस राह में आने वाली चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।

उत्तर

भारत के निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसके हटाने से संबंधित संवैधानिक प्रावधान स्वायत्तता और उत्तरदायित्व के मध्य संतुलन स्थापित करने का प्रयास करते हैं, किंतु व्यावहारिक स्तर पर कई चुनौतियाँ इसकी प्रभावशीलता पर प्रश्न उठाती हैं।

मुख्य भाग

संवैधानिक प्रावधान

  • संवैधानिक दर्जा: निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जो कार्यपालिका के हस्तक्षेप से स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।
    • उदाहरण: अनुच्छेद-324 के तहत चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण निर्वाचन आयोग को सौंपा गया है।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त की हटाने की प्रक्रिया: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान सुरक्षा प्राप्त है और उन्हें केवल संसद द्वारा महाभियोग के माध्यम से हटाया जा सकता है।
    • उदाहरण: अनुच्छेद-124(4) के साथ अनुच्छेद-324(5) के अंतर्गत विशेष बहुमत आवश्यक है।
  • अन्य निर्वाचन आयुक्तों की हटाने की प्रक्रिया: अन्य निर्वाचन आयुक्तों को राष्ट्रपति द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर हटाया जा सकता है।
    • उदाहरण: अनुच्छेद-324(5) में हटाने के लिए भिन्न प्रावधान निर्धारित हैं।
  • कार्यकाल की सुरक्षा: नियुक्ति के बाद सेवा की शर्तों और कार्यकाल में उनके प्रतिकूल परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
  • सुरक्षा का उद्देश्य: यह ढाँचा आयोग को मनमाने ढंग से हटाए जाने और राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाने के लिए बनाया गया है।

व्यवहार में चुनौतियाँ

  • हटाने में असमानता: मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच असमान सुरक्षा आंतरिक स्वतंत्रता और संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
    • उदाहरण: अन्य आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर हटाया जा सकता है, जबकि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी सुरक्षा प्राप्त है।
  • राजनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग: महाभियोग प्रस्ताव, भले ही सफल न हों, राजनीतिक दबाव या संकेत के रूप में प्रयुक्त हो सकते हैं।
  • उच्च सीमा: हटाने की अत्यंत कठिन प्रक्रिया कथित पक्षपात या दुराचार के मामलों में जवाबदेही को कम कर सकती है।
    • उदाहरण: अब तक किसी भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सफलतापूर्वक महाभियोग के माध्यम से नहीं हटाया गया है, भले ही कुछ चुनावों के दौरान आरोप लगे हों।
  • विश्वसनीयता संबंधी चिंताएँ: चुनावी प्रक्रियाओं में पक्षपात की धारणा औपचारिक सुरक्षा उपायों के बावजूद जन विश्वास को कमजोर कर सकती है।
    • उदाहरण: वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान मतदाता सूची संशोधन को लेकर आलोचना।
  • संस्थागत दबाव: चुनावों के बढ़ते राजनीतीकरण से कानूनी सुरक्षा के बावजूद आयोग के कार्य पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।

निष्कर्ष

यद्यपि संवैधानिक प्रावधान निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करते हैं, परंतु असमानताओं और धारणा-आधारित चुनौतियों को संबोधित करना आवश्यक है। एक संतुलित व्यवस्था ही स्वायत्तता और उत्तरदायित्व दोनों को बनाए रखते हुए भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास को सुदृढ़ कर सकती है।

The proposed impeachment motion against the Chief Election Commissioner raises concerns about institutional accountability and political contestation. Discuss the constitutional provisions and challenges associated with the removal of Election Commissioners in India. in hindi

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