Q. लोक प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जुड़ी नैतिक और शासन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। जिम्मेदार AI तैनाती सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा उपायों का सुझाव दीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में नैतिक चुनौतियाँ
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के परिनियोजन में शासन संबंधी चुनौतियाँ
  • जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता परिनियोजन के लिए सुरक्षा उपाय

उत्तर

जैसे-जैसे सरकारें शासन में AI का उपयोग बढ़ा रही हैं, दक्षता का वादा नैतिक दुविधाओं और नियामक खामियों से धूमिल होता जा रहा है। जवाबदेही, निष्पक्षता और संप्रभुता सुनिश्चित करना AI के उपयोग को लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के अनुरूप बनाने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में नैतिक चुनौतियाँ

  • निजता का हनन और डेटा का दुरुपयोग: AI प्रणालियाँ बड़े डेटासेट पर निर्भर करती हैं, जिससे उनके मूल उद्देश्य से परे दुरुपयोग का खतरा रहता है।
    • उदाहरण: कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित डेटा का पुलिसिंग के लिए दुरुपयोग।
  • सूचित सहमति का अभाव: नागरिकों को अक्सर यह पूरी तरह ज्ञात नहीं होता कि उनके डेटा का उपयोग कैसे किया जाता है।
    • उदाहरण: भारत में कम डिजिटल साक्षरता के कारण डेटा साझाकरण प्रणालियों में असूचित सहमति निहित होती है।
  • एल्गोरिदम में पूर्वाग्रह और भेदभाव: पूर्वाग्रही डेटासेट के कारण AI मौजूदा असमानताओं को और बढ़ा सकता है।
    • उदाहरण: चेहरे की पहचान करने वाली प्रणालियाँ विश्व स्तर पर अल्पसंख्यकों के लिए उच्च त्रुटि दर दिखा रही हैं।
  • बहिष्करण और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित होने का जोखिम: AI की छोटी-मोटी त्रुटियाँ भी कमजोर आबादी को वंचित कर सकती हैं।
    • उदाहरण: आधार से जुड़े प्रमाणीकरण में विफलता के कारण कल्याणकारी योजनाओं के लाभों से वंचित होना।
  • श्रम विस्थापन और नैतिक समझौते: सुरक्षा उपायों के अभाव में दक्षता में वृद्धि से नौकरियों का नुकसान हो सकता है।
    • उदाहरण: शासन प्रणालियों में निचले स्तर के प्रशासनिक पदों का स्वचालन द्वारा प्रतिस्थापन।

AI तैनाती में शासन संबंधी चुनौतियाँ

  • निर्णय लेने में जवाबदेही की कमी: अपारदर्शी AI सिस्टम के कारण जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है।
    • उदाहरण: हाइब्रिड सार्वजनिक-निजी AI सिस्टम अस्पष्ट जवाबदेही शृंखलाएँ बनाते हैं।
  • स्पष्ट उद्देश्यों के बिना अत्यधिक निर्भरता: AI को अक्सर उस समस्या को परिभाषित किए बिना तैनात किया जाता है, जिसका वह समाधान करता है।
    • उदाहरण: सरकारें आवश्यकता या आनुपातिकता परीक्षण के बिना AI को अपना रही हैं।
  • डेटा संप्रभुता और सुरक्षा जोखिम: निजी या विदेशी AI अवसंरचना पर निर्भरता राष्ट्रीय डेटा पर नियंत्रण को खतरे में डालती है।
  • नियामक विलंब और नीतिगत अंतराल: प्रौद्योगिकी शासन ढाँचों की तुलना में तेजी से विकसित होती है।
    • उदाहरण: भारत के विकसित हो रहे AI दिशा-निर्देश अभी भी काफी सीमा तक “हस्तक्षेप न करने” का दृष्टिकोण अपना रहे हैं।
  • विक्रेता अवरोध और बाजार संकेंद्रण: बड़े साझेदार कुछ कंपनियों पर दीर्घकालिक निर्भरता उत्पन्न कर सकते हैं।
    • उदाहरण: रणनीतिक तैनाती में एंथ्रोपिक जैसी बड़ी AI कंपनियों से सरकारों के जुड़े होने के जोखिम।

उत्तरदायित्वपूर्ण AI तैनाती के लिए सुरक्षा उपाय

  • आवश्यकता एवं आनुपातिकता परीक्षण: AI का उपयोग तभी करना जब यह आवश्यक हो और उद्देश्य के अनुरूप हो।
    • उदाहरण: AI अपनाने से पहले यह मूल्यांकन करना कि क्या सरल विकल्प मौजूद हैं।
  • डिज़ाइन द्वारा गोपनीयता संबंधी ढाँचे: सुरक्षा उपायों को तैनाती के बाद के बजाय डिजाइन चरण में ही शामिल करना।
    • उदाहरण: शासन प्रणालियों में डेटा न्यूनीकरण और उद्देश्य सीमा के सिद्धांत।
  • पारदर्शी एवं व्याख्या योग्य AI प्रणालियाँ: सुनिश्चित करना कि निर्णयों का ऑडिट किया जा सके और उन्हें समझा जा सके।
    • उदाहरण: AI-संचालित कल्याणकारी या पुलिसिंग उपकरणों में व्याख्यात्मकता को अनिवार्य बनाना।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की क्षमता को सुदृढ़ करना: स्वदेशी AI और वैज्ञानिक क्षमताओं में निवेश करना।
    • उदाहरण: ISRO जैसे अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भारत की सफलता मुख्य वैज्ञानिक निवेश पर आधारित है।
  • स्वतंत्र निरीक्षण एवं विनियमन: नियामक निकाय और सहभागी शासन मॉडल स्थापित करना।
    • उदाहरण: नैतिक निगरानी के लिए कर्नाटक की जिम्मेदार AI समिति।

निष्कर्ष

शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक साधन मात्र रहनी चाहिए, न कि लक्ष्य। नैतिक दूरदर्शिता, सुदृढ़ नियमन और नागरिक-केंद्रित सुरक्षा उपाय यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं कि तकनीकी प्रगति लोकतंत्र को मजबूत करे, न कि अधिकारों, जवाबदेही और जनविश्वास को कमजोर करे।

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