Q. भारत-बांग्लादेश संबंधों में अविश्वास का माहौल, पड़ोसी देशों की संवेदनशीलताओं के साथ रणनीतिक हितों को संतुलित करने की चुनौतियों को दर्शाता है। हाल के दिनों में द्विपक्षीय संबंधों में आए तनाव के लिए जिम्मेदार कारकों की चर्चा कीजिए और आपसी विश्वास को पुनर्जीवित करने के लिए आगे की राह सुझाइए। (10 अंक, 250 शब्द)

June 9, 2026

GS Paper IIInternational Relations

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत–बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों में हालिया तनाव के लिए उत्तरदायी कारकों का विश्लेषण कीजिए।
  • पारस्परिक विश्वास (Mutual Confidence) के पुनर्निर्माण एवं द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ बनाने हेतु आगे की राह सुझाइए।

उत्तर

परिचय

भारत–बांग्लादेश संबंध, जो साझा इतिहास, भौगोलिक निकटता एवं व्यापक सहयोग पर आधारित हैं, वर्तमान में अपेक्षाओं में अंतर, नीतिगत मतभेदों तथा राजनीतिक परिवर्तनों से उत्पन्न विश्वास के संकट का सामना कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप द्विपक्षीय संवाद, सहयोग और साझेदारी की गति प्रभावित हुई है।

द्विपक्षीय संबंधों में हालिया तनाव के लिए उत्तरदायी कारक

  • नीतिगत अपेक्षाएँ: बांग्लादेश को राजनीतिक परिवर्तनों के बाद भारत से पारस्परिक विश्वास निर्माण हेतु ठोस कदमों की अपेक्षा थी, किंतु कथित विलंब ने असंतोष को जन्म दिया।
    • उदाहरण: बांग्लादेश ने सद्भावना के संकेत के रूप में ट्रांसशिपमेंट एवं व्यापारिक सुविधाओं से संबंधित प्रतिबंधों में ढील की अपेक्षा की थी।
  • व्यापारिक मतभेद: बाजार पहुँच एवं व्यापारिक प्रतिबंधों से जुड़ी चिंताओं ने आर्थिक संबंधों में असंतुलन की धारणा को बढ़ावा दिया है।
    • उदाहरण: बांग्लादेशी उत्पादों के लिए सीमित बाजार पहुँच को लेकर व्यक्त चिंताओं ने द्विपक्षीय आर्थिक माहौल को प्रभावित किया है।
  • अवैध प्रवासन संबंधी विमर्श: अवैध प्रवासन पर राजनीतिक जोर ने बांग्लादेश में संवेदनशीलता उत्पन्न की है, जिससे कूटनीतिक सहजता प्रभावित हुई है।
  • जल विवाद: नदी जल बँटवारे से संबंधित लंबे समय से लंबित समझौतों के समाधान में देरी ने विश्वास की कमी को बढ़ाया है।
    • उदाहरण: वर्ष 1996 की गंगा जल संधि के नवीनीकरण का मुद्दा अभी भी लंबित है।
  • राजनीतिक संक्रमण: बांग्लादेश में बार-बार होने वाले राजनीतिक परिवर्तनों से द्विपक्षीय संबंधों में निरंतरता एवं स्थिरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

पारस्परिक विश्वास के पुनर्निर्माण हेतु आगे की राह

  • पारस्परिकता का संतुलन: भारत को रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ समयबद्ध आर्थिक एवं कूटनीतिक पारस्परिकता को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे विश्वास को सुदृढ़ किया जा सके।
    • उदाहरण: वीजा सुविधाओं तथा ट्रांसशिपमेंट व्यवस्थाओं की पुनर्बहाली विश्वास निर्माण के प्रभावी उपाय सिद्ध हो सकती है।
  • मुद्दों की प्राथमिकता तय करना: विवादास्पद विमर्शों के बजाय विकासोन्मुख एवं संसाधन-आधारित सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
    • उदाहरण: गंगा जल संधि के नवीनीकरण को प्राथमिकता देना साझा संसाधन प्रबंधन में विश्वास को सुदृढ़ कर सकता है।
  • व्यापार का सामान्यीकरण: नॉन-टैरिफ बाधाओं को कम कर तथा बाजार पहुँच को बेहतर बनाकर आर्थिक परस्पर निर्भरता को बढ़ाया जा सकता है।
  • संवाद तंत्र को सुदृढ़ करना: संस्थागत संवाद तंत्रों को मजबूत बनाकर राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद निरंतर संपर्क एवं सहयोग सुनिश्चित किया जा सकता है।
    • उदाहरण: मौजूदा द्विपक्षीय व्यवस्थाओं के अंतर्गत नियमित उच्चस्तरीय परामर्श आयोजित किए जाएँ।
  • संवेदनशीलता-आधारित दृष्टिकोण: कूटनीतिक प्रयासों में दोनों देशों की घरेलू राजनीतिक एवं सामाजिक संवेदनशीलताओं का समुचित ध्यान रखा जाना चाहिए।

निष्कर्ष

भारत और बांग्लादेश को निरंतर संवाद, पारस्परिक संवेदनशीलता तथा सहयोगात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से अपनी साझेदारी को पुनर्संतुलित करना चाहिए। पारस्परिक विश्वास, संवेदनशील कूटनीति तथा साझा विकासात्मक हितों पर आधारित सहयोग को सुदृढ़ कर दोनों देश अपने संबंधों को क्षेत्रीय शांति, स्थिरता एवं समृद्धि के एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित कर सकते हैं। 

The trust deficit in India-Bangladesh relations reflects the challenges of balancing strategic interests with neighbourhood sensitivities. Discuss the factors responsible for the recent strain in bilateral ties and suggest a way forward to rebuild mutual confidence. in hindi

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