Q. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण से भारत के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में हो रहे परिवर्तनों पर चर्चा कीजिए। हाल की उपलब्धियों के उदाहरण दीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को नया आकार देना।

उत्तर

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लोकतांत्रीकरण का तात्पर्य अंतरिक्ष क्षेत्र को राज्य-नियंत्रित एकाधिकार से निजी क्षेत्र की शक्तियों, स्टार्ट-अप्स और अकादमिक जगत को शामिल करने वाले सहभागी पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तित करना है। यह “जनता की अंतरिक्ष यात्रा” सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम करने और समावेशी राष्ट्रीय विकास को गति देने के लिए उपग्रह डेटा और स्वदेशी नवाचार का लाभ उठाती है।

भारत के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को नया आकार देना

  • कृषि परिशुद्धता: अंतरिक्ष डेटा वास्तविक समय में फसलों की निगरानी, ​​उपज का अनुमान और मृदा स्वास्थ्य विश्लेषण प्रदान करता है, जिससे किसान परिशुद्ध कृषि को अपना सकते हैं।
    • उदाहरण: वर्ष 2024-25 में शुरू की गई कृषि-DSS  (निर्णय सहायता प्रणाली) जमीनी स्तर पर कृषि संबंधी निर्णय लेने में मार्गदर्शन के लिए उपग्रह छवियों का उपयोग करती है।
  • आपदा प्रतिरोध: चक्रवात, बाढ़ और वन अग्नि के लिए उपग्रह आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों ने जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम कर दिया है।
    • उदाहरण: INSAT-3DS और EOS-06 से प्राप्त हाई-रिजॉल्यूशन डेटा ने वर्ष 2025 के मानसून के दौरान महत्त्वपूर्ण चेतावनी प्रदान की, जिससे तटीय क्षेत्रों में प्रभाव को कम किया जा सका।
  • अवसंरचना नियोजन: स्थलीय मानचित्रों के साथ अंतरिक्ष संपत्तियों का एकीकरण बड़े पैमाने पर अवसंरचना और शहरी पुनरुद्धार की वैज्ञानिक योजना को सुगम बनाता है।
    • उदाहरण: PM गति शक्ति प्लेटफॉर्म बहु-मोडल कनेक्टिविटी और संपत्तियों के 1,600+ स्तर के मानचित्रण के लिए इसरो के भू-स्थानिक डेटा का उपयोग करता है।
  • डिजिटल समावेशन: उपग्रह संचार (सैटकॉम) दूरस्थ, पहाड़ी और द्वीपीय क्षेत्रों में उच्च गति का इंटरनेट प्रदान करके “डिजिटल विभाजन” को कम कर रहा है।
    • उदाहरण: वर्ष 2025 में LVM-3 के माध्यम से 6,100 किलोग्राम के ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 का प्रक्षेपण उन क्षेत्रों में भी अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड को सीधे स्मार्टफोन तक पहुँचाना संभव बनाता है, जहाँ इंटरनेट की सुविधा नहीं है।
  • स्टार्ट-अप क्रांति: IN-SPACe के माध्यम से अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने से अंतरिक्ष उद्यमियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिससे उच्च कौशल वाले रोजगार का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हुआ है।
    • उदाहरण: भारत में अब 350 से अधिक सक्रिय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप हैं, जिनमें स्काईरूट और अग्निकुल शामिल हैं, जो वर्ष 2025 में प्रदर्शन चरण से तैनाती चरण में पहुँच गए।
  • वित्तीय सुरक्षा: बीमा धोखाधड़ी का पता लगाने और फसलों की क्षति का आकलन करने के लिए रिमोट सेंसिंग और भू-स्थानिक विश्लेषण का उपयोग किया जा रहा है, जिससे दावों का निपटान तेजी से हो सके।
  • समुद्री सशक्तीकरण: उपग्रहों द्वारा प्रदान की जाने वाली संभावित मत्स्य क्षेत्र (PFZ) संबंधी सलाहें छोटे मछुआरों को ईंधन की बचत करते हुए अपनी मत्स्यपालन की क्षमता को अधिकतम करने में मदद करती हैं।
    • उदाहरण: मिशन सागर मत्स्यपालन वाले समुदाय की सुरक्षा और आजीविका के लिए उपग्रहों से प्राप्त समुद्री स्थिति पूर्वानुमानों का लगातार उपयोग कर रहा है।
  • भूमि शासन: उपग्रह मानचित्रण से भूमि स्वामित्व पर कानूनी स्पष्टता मिलती है, ग्रामीण क्षेत्रों में मुकदमेबाजी कम होती है और ऋण तक आसान पहुँच संभव होती है।
    • उदाहरण: स्वामित्व योजना ने वर्ष 2025 के अंत तक 25 लाख से अधिक गाँवों का मानचित्रण करने के लिए हाई-रिजॉल्यूशन उपग्रह छवियों का उपयोग किया है।
  • अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: “वैज्ञानिक दृष्टिकोण” से “वाणिज्य-प्रधान” रणनीति की ओर संक्रमण से वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
    • उदाहरण: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्ष 2025-26 में ₹24,116 करोड़ तक पहुँच गई, जिसका लक्ष्य वर्ष 2033 तक $44 बिलियन तक पहुँचना है।
  • वैज्ञानिक रुझान: चंद्रयान और गगनयान जैसे मिशनों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में रुचि को लोकतांत्रिक बनाया है, जिससे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक नई पीढ़ी प्रेरित हुई है।
    • उदाहरण: ISRO के अंतरिक्ष चुनौतियों और युवा विज्ञान कार्यक्रम में प्रतिवर्ष 60,000 से अधिक छात्र भाग लेते हैं।
  • स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच: संचार उपग्रहों द्वारा संचालित टेलीमेडिसिन सेवाएँ सुदूरतम क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को विशेषज्ञ परामर्श प्रदान करती हैं।

निष्कर्ष

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का एक विशिष्ट वैज्ञानिक गतिविधि से “नागरिक-केंद्रित” पारिस्थितिकी तंत्र में विकास एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक है। सशक्त सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देकर और अंतरिक्ष नीति-2025 के माध्यम से नीतिगत निरंतरता सुनिश्चित करके, भारत अंतरिक्ष को एक दूरस्थ क्षेत्र से सामाजिक-आर्थिक प्रगति और वैश्विक नेतृत्व के साझा क्षितिज में सफलतापूर्वक परिवर्तित कर रहा है।

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