प्रश्न की मुख्य माँग
- समुद्री रणनीति में स्थिरता और समावेशी विकास को एकीकृत करना
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उत्तर
जैसे-जैसे हिंद महासागर तीव्र भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा का क्षेत्र बनता जा रहा है, भारत का नेतृत्व सतत्, समावेशी और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के निर्माण पर निर्भर करता है। पर्यावरणीय संरक्षण को विकासात्मक साझेदारियों के साथ एकीकृत कर भारत स्वयं को विश्वसनीय सुरक्षा प्रदाता और विकास के उत्प्रेरक के रूप में स्थापित कर सकता है।
हिंद महासागर में भारत का समुद्री नेतृत्व: समावेशी विकास के साथ स्थिरता का आधार
- ‘ब्लू इकॉनमी’ पर बल: साझा समृद्धि के लिए मत्स्य पालन, नवीकरणीय ऊर्जा और समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन।
- उदाहरण: भारत की ‘ब्लू इकॉनमी’ नीति विजन।
- जलवायु सहनशीलता: अनुकूलन वित्तपोषण और प्रौद्योगिकी के माध्यम से समुद्र स्तर में वृद्धि के विरुद्ध द्वीपीय देशों का समर्थन करना।
- ‘सागर’ सिद्धांत: सहयोगी समुद्री सुरक्षा के माध्यम से “क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास” को आगे बढ़ाना।
- क्षमता निर्माण: क्षेत्रीय समुद्री बलों और प्रशासकों को प्रशिक्षण देकर निगरानी, आपदा प्रतिक्रिया और शासन क्षमताओं को सुदृढ़ करना।
- सतत् बंदरगाह: नवीकरणीय ऊर्जा, दक्ष लॉजिस्टिक्स और कम-उत्सर्जन नौवहन अवसंरचना के साथ हरित बंदरगाहों का विकास।
- उदाहरण: सागरमाला के हरित बंदरगाह दिशा-निर्देश।
- समावेशी संपर्क: ऋण-गहन संपर्क मॉडलों के विकल्प के रूप में पारदर्शी और मांग-आधारित समुद्री अवसंरचना को प्रस्तुत करना।
- उदाहरण: भारत–जापान एशिया–अफ्रीका विकास गलियारा।
- समुद्री साझा संसाधनों का संरक्षण: साझा जलक्षेत्रों में समुद्री डकैती, अवैध मत्स्यन और समुद्री प्रदूषण के विरुद्ध सामूहिक कार्रवाई का नेतृत्व।
- बहुपक्षीय मानक-निर्धारण: नियम-आधारित और समावेशी समुद्री शासन को बढ़ावा देने हेतु ‘इंडियन ओशियन रिम एसोशिएसन’ और ‘क्वाड’ प्लेटफार्मों को सुदृढ़ करना।
निष्कर्ष
भारत का हिंद महासागर नेतृत्व तभी बना रह सकता है जब शक्ति और उद्देश्य में संतुलन हो। समुद्री सुरक्षा को स्थिरता, समावेशिता और क्षेत्रीय क्षमता निर्माण के साथ जोड़कर, भारत एक लचीली समुद्री व्यवस्था का निर्माण कर सकता है, जो सहयोग के माध्यम से प्रतिद्वंद्विता का मुकाबला करे और हिंद महासागर को विकास के साथ संतुलित हो।
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