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प्रश्न की मुख्य माँग
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जैसे-जैसे हिंद महासागर तीव्र भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा का क्षेत्र बनता जा रहा है, भारत का नेतृत्व सतत्, समावेशी और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के निर्माण पर निर्भर करता है। पर्यावरणीय संरक्षण को विकासात्मक साझेदारियों के साथ एकीकृत कर भारत स्वयं को विश्वसनीय सुरक्षा प्रदाता और विकास के उत्प्रेरक के रूप में स्थापित कर सकता है।
भारत का हिंद महासागर नेतृत्व तभी बना रह सकता है जब शक्ति और उद्देश्य में संतुलन हो। समुद्री सुरक्षा को स्थिरता, समावेशिता और क्षेत्रीय क्षमता निर्माण के साथ जोड़कर, भारत एक लचीली समुद्री व्यवस्था का निर्माण कर सकता है, जो सहयोग के माध्यम से प्रतिद्वंद्विता का मुकाबला करे और हिंद महासागर को विकास के साथ संतुलित हो।
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